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Bhiwani News: हाईकोर्ट ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपियों के ब्रेन मैपिंग के दिए आदेश

Wed, 22 Mar 2023 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Wed, 22 Mar 2023 11:07 PM IST
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High court orders brain mapping of two accused of gang rape of a minor
भिवानी। भिवानी जिले की एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने पुलिस को दो आरोपियों का ब्रेन मैपिंग (पॉलीग्राफ टेस्ट) कराने के आदेश दिए हैं। महिला पुलिस पुलिस अब स्थानीय कोर्ट से अनुमति लेकर दोनों आरोपियों का मधुबन में पॉलीग्राफ टेस्ट कराएगी। इस बारे में 7 नवंबर 2022 को महिला पुलिस थाना भिवानी में केस दर्ज हुआ था। पीड़िता ने शिकायत में दुष्कर्म के आरोप अपने मौसा और उसके भाई पर लगाए थे।
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पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि 2018 में वह स्कूल की छुट्टियों के दौरान अपनी मौसी के घर आई थी। उसके मौसा ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और किसी को कुछ बताने पर जान से मारने व बदनाम करने की धमकी दी। इसके बाद उसने ये बात मौसा के भाई को बताई, जिसके बाद मौसा के भाई ने भी उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2018 से लेकर 2022 तक दोनों आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसके परिवार को भी जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में महिला पुलिस थाना ने पीड़िता की शिकायत पर सात नवंबर 2022 को दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोपी इस मामले में खुद को बचाने के प्रयास में लगातार परिवार पर दबाव बनाते रहे, मगर बात नहीं बनी तो दुष्कर्म के तकनीकी सबूत नहीं होने का बहाना बनाकर केस में खुद का बचाव करने लगे। इसी मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद पीड़ित पक्ष की मांग पर दुष्कर्म के दोनों आरोपियों की ब्रेन मैपिंग कराए जाने की मांग रखी गई।
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यह है ब्रेन मैपिंग टेस्ट
अक्सर किसी अपराध की जांच के सिलसिले में ब्रेन मैपिंग टेस्ट ऐसी जांच प्रक्रिया है, जिसके तहत आरोपी के मस्तिष्क की हलचलों की छवियों के जरिये उसके दोषी होने का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट में अभियुक्त को कंप्यूटर से जुड़ा एक हेलमेट पहनाया जाता है, जिसमें कई सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे होते हैं। जांच के दौरान फॉरेंसिक विशेषज्ञ आरोपी को अपराध से जुड़ी वस्तुओं के चित्र दिखाते या कुछ ध्वनियां सुनाते हैं। आरोपी के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया का निरीक्षण कर उसकी संदिग्धता का पता लगाते हैं। सेंसर मस्तिष्क की गतिविधियों को मॉनिटर करता है और तरंगों को अंकित करता है। ये तरंगे तभी पैदा होती हैं, जब आरोपी का उन चित्रों और ध्वनियों से कोई संबंध होता है। निर्दोष आरोपी अपराध से जुड़ी ध्वनियों और चित्रों को पहचान नहीं पाते, जबकि संदिग्ध उन्हें पहचान लेते हैं।
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नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों के ब्रेन मैपिंग कराने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में स्थानीय कोर्ट से अनुमति लेने के उपरांत मधुबन लैब में दोनों की ब्रेन मैपिंग कराई जाएगी, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- धर्मली देवी, एसएचओ महिला पुलिस थाना भिवानी
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