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काउंसलर ने कई बच्चियों के साथ की छेड़छाड़
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आदेश चौधरी
भिवानी। असम निवासी नाबालिग बच्ची के यौन शोषण मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। राई के बालग्राम में हुई काउंसिलिंग में बच्ची ने आरोप लगाया है कि बाल कल्याण समिति की सदस्य और भाजपा के भिवानी जिला अध्यक्ष शंकर धूपड़ की बेटी प्रियंका धूपड़ ने बच्ची पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया था। भिवानी में डीसीपीओ की अनुमति पर की गई काउंसिलिंग में एक नहीं कई बार बच्ची पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया और बदले हुए बयानों पर जबरदस्ती हस्ताक्षर भी करवाए। बच्ची ने बताया कि भिवानी में जिस काउंसलर ने उसके साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकत की वो अन्य बच्चियों के साथ भी ऐसा करता है। ऐसा करते हुए उसने स्वयं देखा है। इस मामले में बाल कल्याण समिति सोनीपत की ओर से प्रियंका धूपड़ के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
हुआ यह है कि असम निवासी एक बच्ची के साथ चरखी दादरी में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। इसमें ऊषा नाम की एक महिला पर भी इस प्रकरण में शामिल होने का आरोप है। मामले का खुलासा होने के बाद बाल कल्याण समिति चरखी दादरी ने उस बच्ची को भिवानी बाल आश्रम में रहने के लिए भेज दिया। बाल आश्रम में बच्ची की काउंसिलिंग की जानी थी ताकि उसे मानसिक संबल मिल सके। मगर काउंसलर हरिकिशन ने ही काउंसिलिंग के दौरान बच्ची से छेड़छाड़ कर दी और अश्लील शब्द भी उससे कहे। इसका खुलासा होने के बाद हरिकिशन के खिलाफ केस दर्ज किया गया। फिलहाल वो फरार चल रहा है। बच्ची को फिर से बाल आश्रम में भेज दिया गया था। मगर इस दौरान एक बार फिर से बच्ची की काउंसिलिंग की गई वो भी आश्रम से बाहर ले जाकर। उस कमेटी में चार लोग शामिल रहे। एलपीओ मनोज, सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रियंका धूपड़, प्रोटेक्शन ऑफिसर पिंकी और तत्कालीन महिला थाना प्रभारी कृष्णा। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस काउंसिलिंग को गलत और असंवैधानिक मानते हुए एलपीओ मनोज के खिलाफ केस दर्ज करा दिया और नाबालिग बच्ची की सुरक्षा को देखते हुए सोनीपत के राई बालग्राम में शिफ्ट कर दिया। (संवाद)
फिर हुई काउंसिलिंग तो लगाए आरोप
राई बालग्राम में बाल कल्याण समिति की ओर से बच्ची की फिर से काउंसिलिंग की गई। बच्ची ने आरोप लगाया कि भिवानी में आश्रम से बाहर ले जाकर कराई गई काउंसिलिंग के दौरान सीडब्ल्यूसी की महिला मेंबर ने उस पर काउंसलर के खिलाफ दी गई शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि अगर दादरी वाले मामले में ऊषा को सजा दिलानी है तो काउंसलर के खिलाफ दी गई शिकायत को वापस लेना होगा। बार-बार बच्ची पर ये दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य ने कुछ दस्तावेजों पर जबरदस्ती हस्ताक्षर भी करवा लिए।
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डीजीपी और एसपी को कार्रवाई करने की सिफारिश भेजी
काउंसिलिंग के दौरान बच्ची के बयान दर्ज करने के बाद बाल कल्याण समिति सोनीपत ने हरियाणा पुलिस के डीजीपी और भिवानी के एसपी व डीसी को पत्र जारी कर सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इसके अलावा उन्होंने यह पत्र हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला और बाल विकास विभाग के महानिदेशक, चरखी दादरी के डीसी और एसपी को भी भेजा है।
वर्जन:
कमेटी द्वारा बच्ची को काउंसिलिंग की इजाजत देने की अनुमति मैंने ही दी थी। उस कमेटी में एलपीओ मनोज कुमार, सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य प्रियंका धूपड़, प्रोटेक्शन अफसर पिंकी और तत्कालीन महिला थाना प्रभारी कृष्णा को शामिल किया गया था। पॉक्सो एक्ट का मैं जिले का नोडल अधिकारी हूं। काउंसिलिंग के लिए आदेश देना मेरे अधिकार क्षेत्र में आता है।
- नरेंद्र, डीसीपीओ, भिवानी।
वर्जन::
जांच के बाद केस की पूरी प्रोसिडिंग तैयार कर ली है। शुक्रवार को यह विभाग के पास भेजी जाएगी। प्रियंका धूपड़ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी लिखा गया है। इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि वह किसकी बेटी है। उन्होंने अपने पद की शक्तियों का गलत प्रयोग किया है। कानून सबके लिए बराबर है।
- ज्योति बैंदा, अध्यक्ष, हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग
यदि बाल कल्याण समिति की सदस्य प्रियंका धूपड़ और महिला थाना की तत्कालीन एसएचओ कृष्णा देवी के खिलाफ केस दर्ज करके उन्हें पद से नहीं हटाया गया तो सोमवार से भिवानी और चरखी दादरी में पुलिस व प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे।
- सुशील वर्मा, पूर्व सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
वर्जन
मेरी बेटी पर जो आरोप लगे हैं, उसकी मुझे जानकारी नहीं है। वैसे भी मेरी बेटी भाजपा से नहीं है। वह जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य है। अगर ऐसा कोई मामला होता तो मुझे जरूर पता चलता। इन आरोपों का कोई आधार नहीं है।
- शंकर धूपड़, जिला अध्यक्ष, भाजपा।
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भिवानी। असम निवासी नाबालिग बच्ची के यौन शोषण मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। राई के बालग्राम में हुई काउंसिलिंग में बच्ची ने आरोप लगाया है कि बाल कल्याण समिति की सदस्य और भाजपा के भिवानी जिला अध्यक्ष शंकर धूपड़ की बेटी प्रियंका धूपड़ ने बच्ची पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया था। भिवानी में डीसीपीओ की अनुमति पर की गई काउंसिलिंग में एक नहीं कई बार बच्ची पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया और बदले हुए बयानों पर जबरदस्ती हस्ताक्षर भी करवाए। बच्ची ने बताया कि भिवानी में जिस काउंसलर ने उसके साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकत की वो अन्य बच्चियों के साथ भी ऐसा करता है। ऐसा करते हुए उसने स्वयं देखा है। इस मामले में बाल कल्याण समिति सोनीपत की ओर से प्रियंका धूपड़ के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
हुआ यह है कि असम निवासी एक बच्ची के साथ चरखी दादरी में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। इसमें ऊषा नाम की एक महिला पर भी इस प्रकरण में शामिल होने का आरोप है। मामले का खुलासा होने के बाद बाल कल्याण समिति चरखी दादरी ने उस बच्ची को भिवानी बाल आश्रम में रहने के लिए भेज दिया। बाल आश्रम में बच्ची की काउंसिलिंग की जानी थी ताकि उसे मानसिक संबल मिल सके। मगर काउंसलर हरिकिशन ने ही काउंसिलिंग के दौरान बच्ची से छेड़छाड़ कर दी और अश्लील शब्द भी उससे कहे। इसका खुलासा होने के बाद हरिकिशन के खिलाफ केस दर्ज किया गया। फिलहाल वो फरार चल रहा है। बच्ची को फिर से बाल आश्रम में भेज दिया गया था। मगर इस दौरान एक बार फिर से बच्ची की काउंसिलिंग की गई वो भी आश्रम से बाहर ले जाकर। उस कमेटी में चार लोग शामिल रहे। एलपीओ मनोज, सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रियंका धूपड़, प्रोटेक्शन ऑफिसर पिंकी और तत्कालीन महिला थाना प्रभारी कृष्णा। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस काउंसिलिंग को गलत और असंवैधानिक मानते हुए एलपीओ मनोज के खिलाफ केस दर्ज करा दिया और नाबालिग बच्ची की सुरक्षा को देखते हुए सोनीपत के राई बालग्राम में शिफ्ट कर दिया। (संवाद)
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फिर हुई काउंसिलिंग तो लगाए आरोप
राई बालग्राम में बाल कल्याण समिति की ओर से बच्ची की फिर से काउंसिलिंग की गई। बच्ची ने आरोप लगाया कि भिवानी में आश्रम से बाहर ले जाकर कराई गई काउंसिलिंग के दौरान सीडब्ल्यूसी की महिला मेंबर ने उस पर काउंसलर के खिलाफ दी गई शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि अगर दादरी वाले मामले में ऊषा को सजा दिलानी है तो काउंसलर के खिलाफ दी गई शिकायत को वापस लेना होगा। बार-बार बच्ची पर ये दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य ने कुछ दस्तावेजों पर जबरदस्ती हस्ताक्षर भी करवा लिए।
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डीजीपी और एसपी को कार्रवाई करने की सिफारिश भेजी
काउंसिलिंग के दौरान बच्ची के बयान दर्ज करने के बाद बाल कल्याण समिति सोनीपत ने हरियाणा पुलिस के डीजीपी और भिवानी के एसपी व डीसी को पत्र जारी कर सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इसके अलावा उन्होंने यह पत्र हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला और बाल विकास विभाग के महानिदेशक, चरखी दादरी के डीसी और एसपी को भी भेजा है।
वर्जन:
कमेटी द्वारा बच्ची को काउंसिलिंग की इजाजत देने की अनुमति मैंने ही दी थी। उस कमेटी में एलपीओ मनोज कुमार, सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य प्रियंका धूपड़, प्रोटेक्शन अफसर पिंकी और तत्कालीन महिला थाना प्रभारी कृष्णा को शामिल किया गया था। पॉक्सो एक्ट का मैं जिले का नोडल अधिकारी हूं। काउंसिलिंग के लिए आदेश देना मेरे अधिकार क्षेत्र में आता है।
- नरेंद्र, डीसीपीओ, भिवानी।
वर्जन::
जांच के बाद केस की पूरी प्रोसिडिंग तैयार कर ली है। शुक्रवार को यह विभाग के पास भेजी जाएगी। प्रियंका धूपड़ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी लिखा गया है। इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि वह किसकी बेटी है। उन्होंने अपने पद की शक्तियों का गलत प्रयोग किया है। कानून सबके लिए बराबर है।
- ज्योति बैंदा, अध्यक्ष, हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग
यदि बाल कल्याण समिति की सदस्य प्रियंका धूपड़ और महिला थाना की तत्कालीन एसएचओ कृष्णा देवी के खिलाफ केस दर्ज करके उन्हें पद से नहीं हटाया गया तो सोमवार से भिवानी और चरखी दादरी में पुलिस व प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे।
- सुशील वर्मा, पूर्व सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
वर्जन
मेरी बेटी पर जो आरोप लगे हैं, उसकी मुझे जानकारी नहीं है। वैसे भी मेरी बेटी भाजपा से नहीं है। वह जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य है। अगर ऐसा कोई मामला होता तो मुझे जरूर पता चलता। इन आरोपों का कोई आधार नहीं है।
- शंकर धूपड़, जिला अध्यक्ष, भाजपा।