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अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों व खादों की संतुलित मात्रा का प्रयोग जरूरी : डॉ. आरके सैनी
Sat, 03 May 2025 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 03 May 2025 11:35 PM IST
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गांव गोलपुरा में कृषि शिविर को संबोधित करते डाॅ. आरके सैनी।
भिवानी। कृषि एवं किसान किसान कल्याण विभाग और हिंदुस्तान गम एंड कैमिकल्स के सौजन्य से खंड कैरू के गांव गोलपुरा में कृषि शिविर लगाया गया। इसमें किसानों को विभिन्न खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी सुझाव दिए गए।
चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत मुख्य वक्ता डॉ. आरके सैनी ने ग्वार व नरमा फसलों की भरपूर पैदावार लेने के लिए विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने कहा कि अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों व खादों की संतुलित मात्रा का प्रयोग जरूरी है।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे ग्वार की एचजी 2-20, एचजजी-563 व एचजी-365 किस्मों का प्रयोग करें। प्रति एकड़ 25 किलो डीएपी डालने से निश्चित रूप से पैदावार में वृद्धि होगी। इसके अलावा ग्वार के उखेड़ा रोग की रोकथाम के लिए बीज को कार्बेन्डाजिम से उपचारित कर के बोएं।
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उन्होंने नरमा की गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए भी किसानों को विभिन्न उपायों की जानकारी दी। कृषि विकास अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बाजरा, मूंग व चारा की फसलों की देखभाल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसल बिजाई से पहले कृषि विशेषज्ञों से संपर्क अवश्य करें। इस अवसर पर किसानों को सलाह दी कि वे कुछ क्षेत्र में आर्गेनिक खेती जरूर करें। शिविर में राजेंद्र सिंह, देवेंद्र कौशिक, कालिया, गजानंद, ओमप्रकाश, जयवीर, ताराचंद, रमेश, सुरेंद्र शर्मा, बलवान सहित 50 किसानों ने भाग लिया।
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चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत मुख्य वक्ता डॉ. आरके सैनी ने ग्वार व नरमा फसलों की भरपूर पैदावार लेने के लिए विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने कहा कि अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों व खादों की संतुलित मात्रा का प्रयोग जरूरी है।
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उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे ग्वार की एचजी 2-20, एचजजी-563 व एचजी-365 किस्मों का प्रयोग करें। प्रति एकड़ 25 किलो डीएपी डालने से निश्चित रूप से पैदावार में वृद्धि होगी। इसके अलावा ग्वार के उखेड़ा रोग की रोकथाम के लिए बीज को कार्बेन्डाजिम से उपचारित कर के बोएं।
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उन्होंने नरमा की गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए भी किसानों को विभिन्न उपायों की जानकारी दी। कृषि विकास अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बाजरा, मूंग व चारा की फसलों की देखभाल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसल बिजाई से पहले कृषि विशेषज्ञों से संपर्क अवश्य करें। इस अवसर पर किसानों को सलाह दी कि वे कुछ क्षेत्र में आर्गेनिक खेती जरूर करें। शिविर में राजेंद्र सिंह, देवेंद्र कौशिक, कालिया, गजानंद, ओमप्रकाश, जयवीर, ताराचंद, रमेश, सुरेंद्र शर्मा, बलवान सहित 50 किसानों ने भाग लिया।