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सैटेलाइट से हो रही खेतों की निगरानी, फसल अवशेष जलाने पर होगी कार्रवाई : धनखड़
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भिवानी। जिले में गेहूं के फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए खेतों की सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने कहा कि आगजनी की किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और अवशेष जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
फसल प्रबंधन एवं फसल अवशेष न जलाने को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के दौरान धनखड़ ने किसानों को बताया कि जिले में इस वर्ष लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती की गई है और कटाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जिन क्षेत्रों में कम्बाइन मशीन से कटाई हुई है वहां मशीनों के माध्यम से गेहूं के फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिले में किसानों के पास फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पर्याप्त कृषि यंत्र उपलब्ध हैं। किसान इन यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा में भी वृद्धि होती है।
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धनखड़ ने खेतों में जाकर किसानों को समझाया कि वे गेहूं के अवशेषों में आग न लगाएं क्योंकि प्रत्येक खेत की निगरानी सैटेलाइट के माध्यम से की जा रही है। इसके बावजूद यदि कोई किसान अवशेषों में आग लगाता पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माना, एफआईआर और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री जैसी कार्रवाई की जाएगी। रेड एंट्री होने पर संबंधित किसान आगामी दो वर्षों तक अपनी फसल मंडी में नहीं बेच सकेगा और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित रहेगा।
कृषि उप निदेशक डॉ. विनोद फोगाट ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें और गेहूं के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
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फसल प्रबंधन एवं फसल अवशेष न जलाने को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के दौरान धनखड़ ने किसानों को बताया कि जिले में इस वर्ष लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती की गई है और कटाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जिन क्षेत्रों में कम्बाइन मशीन से कटाई हुई है वहां मशीनों के माध्यम से गेहूं के फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि जिले में किसानों के पास फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पर्याप्त कृषि यंत्र उपलब्ध हैं। किसान इन यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा में भी वृद्धि होती है।
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धनखड़ ने खेतों में जाकर किसानों को समझाया कि वे गेहूं के अवशेषों में आग न लगाएं क्योंकि प्रत्येक खेत की निगरानी सैटेलाइट के माध्यम से की जा रही है। इसके बावजूद यदि कोई किसान अवशेषों में आग लगाता पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माना, एफआईआर और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री जैसी कार्रवाई की जाएगी। रेड एंट्री होने पर संबंधित किसान आगामी दो वर्षों तक अपनी फसल मंडी में नहीं बेच सकेगा और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित रहेगा।
कृषि उप निदेशक डॉ. विनोद फोगाट ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें और गेहूं के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।