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Bhiwani News: लू की वजह से दुधारू पशुओं में घट गई 25 फीसदी दूध की मात्रा, कपास की फसल झुलसी

Tue, 28 May 2024 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Tue, 28 May 2024 11:31 PM IST
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Due to heat wave, milk quantity of dairy animals decreased by 25 percent, cotton crop got scorched.
गांव मुंढाल में लू से बचाने के लिए छांव में रखी भैंस।
भिवानी। लू की वजह से जनजीवन प्रभावित है। वहीं इसका असर पशुओं और किसानों की फसलों पर भी देखा जा रहा है। लू की वजह से दुधारू पशुओं में करीब 25 फीसदी दूध में कमी आई है। वहीं सिंचाई के बावजूद कपास की फसल भी झुलस चुकी है। अब किसानों को फिर से बिजाई करनी पड़ेगी।
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पशु चिकित्सक डा. विजय सनसनवाल ने बताया कि यदि पुराना तूड़ा घर पर मिले तो पशुपालक अभी नया तूड़ा पशुओं को न दें। कोशिश करें कि पशुपालक हरा चारा अच्छी मात्रा में पशुओं के तूड़े में मिलाएं। इसके अलावा पशुओं को ठंडी जगह पर बांधे, अगर बाहर पेड़ के नीचे बांधा जाए तो उसके आसपास पानी का छिड़काव करें। घरों के अंदर बंधने वाले पशुओं के ऊपर पंखे व कूलर की व्यवस्था करें। खिड़की आदि में बोरी बांधकर रखें और उन्हें समय-समय पर पानी से गीला करते रहें। पशु को दिन में तीन-चार बार पानी पिलाएं, क्योंकि लू की वजह से पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तथा डी-हाईड्रेशन की वजह से बुखार भी आ जाता है, जिससे पशु चरना भी छोड़ देता है तथा कई पशुओं के इस अवस्था में दस्त भी लग जाते हैं और कमजोरी में पशु बैठ भी जाता है।
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उन्होंने कहा कि पशुओं को सूखा तूड़ा कम व हरा चारा ज्यादा दें। इसके अलावा बीमार पशु का तुरंत पशु चिकित्सक से उपचार करवाएं। अगर पशु को बंध है या कब्ज है तो 50 ग्राम मीठा सोडा, 50 ग्राम नमक, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम गुड मिलाकर लड्डू बना लें व सुबह-शाम एक-दो दिन तक दें। दूसरा 100 ग्राम सादा नमक, 200 ग्राम मेगाल्फ और 30 ग्राम सौंठ आधा लीटर पानी में पिलाएं।
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एक लाख हेक्टेयर भूमि पर होगी कपास की बिजाई
भिवानी जिले में 6,16,290 एकड़ भूमि में खरीफ फसलों की बिजाई होगी। खरीफ सीजन के दौरान भिवानी जिले में धान का करीब दस हजार हेक्टेयर में बिजाई का दायरा रहेगा। इसी तरह किसान 80,000 हेक्टेयर में बाजरा की बिजाई करेंगे। 500 हेक्टेयर दायरे में किसान मक्का की फसल भी लेंगे। वहीं सबसे अधिक एक लाख हेक्टेयर भूमि में कपास की बिजाई किसान करेंगे। मई में कपास की बिजाई किसानों द्वारा की जा रही है, ऐसे में ट्यूबवेल से सिंचाई किए जाने के बावजूद कपास की बिजाई नौतपा में झुलस चुकी है। इन किसानों को फिर से बिजाई करनी पड़ेगी। इसका अतिरिक्त खर्च भी उन्हें उठाना होगा।

अधिकांश किसानों द्वारा अधिक गर्मी को देखते हुए अभी कपास की बिजाई नहीं की है। जिन किसानों ने कपास की बिजाई की हैं, उसमें अभी अधिक नुकसान नहीं है। किसानों को अगर फसल में किसी तरह की मौसम व बीमारियों को लेकर कोई दिक्कत आती है तो वे संबंधित कृषि अधिकारियों से संपर्क कर उसका समाधान पा सकते हैं।
-डॉ विनोद, फौगाट कृषि उपनिदेशक भिवानी।
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