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25 मई 2007 को गांव कलिंगा में आए थे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
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आदर्श गांव कलिंगा के हर्बल पार्क में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम द्वारा लगाई गई त्रिवेणी व पार?
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। 14 साल पहले भिवानी जिले के सबसे बड़े गांव कलिंगा में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कदम पड़े थे। उस समय करीब 36 करोड़ के बजट से विकास की बयार भी बही थी। मगर अब आदर्श गांव कलिंगा की बदहाली किसी से छिपी नहीं है।
करीब 32 हजार आबादी और दस हजार वोटरों वाले इस आदर्श गांव में तीन ग्राम पंचायतें हैं। तीन बड़े पानों के नाम से मशहूर कलिंगा स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा का पैतृक गांव भी है। गांव का इतिहास सेना में जवानों के अदम्य साहस से भी जुड़ा हैं, क्योंकि गांव के हर घर से एक सैनिक देश की सरहद की रक्षा में लगे हुए हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति एजपीजे अब्दुल कलाम ने जिस हर्बल पार्क में अपने हाथों से त्रिवेणी लगाई थी, आज भी उनके नाम का पत्थर इसका जीता जागता गवाह है। सामाजिक रूप से सुदृढ़ और आर्थिक रूप से पिछड़े गांव की अब सुध लेने वाला कोई नहीं है।
भिवानी शहर से रोहतक रोड पर करीब 25 किलोमीटर दूर कलिंगा गांव धामान खाप का सबसे बड़ा गांव है। यहां की खाप सामाजिक मसलों को आपसी सहमति और भाईचारे से सुलझाने के लिए भी जानी जाती है। तीन ग्राम पंचायतों वाले कलिंगा गांव में तीन बड़े पाने भी हैं, जिनके नाम से उनका इतिहास भी जुड़ा है। गांव में राजू पाना, अमरू पाना और सवाई पाना है। देश की आजादी में अहम योगदान देने वाले महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के नजदीकी रहे स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम इसी गांव में पैदा हुए थे। उसी महान स्वतंत्रता सेनानी के पैतृक गांव को आदर्श गांव का दर्जा मिला था। जिसमें सरकार ने करीब 36 करोड़ का बजट विकास कार्यों के लिए मंजूर किया था। गांव में विकास की गंगा बही तो उसका गवाह खुद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम बने थे। उन्होंने 25 मई 2007 को यहां पहुंचकर गांव के बस स्टैंड पर हर्बल पार्क में त्रिवेणी का पौधा लगाया था। उस दौर में गांव की सभी कच्ची गलियों को पक्का किया गया था और लोहे के खंभों को बदला दिया था। गांव में हर्बल पार्क व जोहड़ों का भी सुंदरीकरण हुआ।
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हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे राष्ट्रपति, बच्चों से भी मिलाया था हाथ
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हेलीकॉप्टर से गांव में पहुंचे थे। जिसके लिए गांव के समीप ही हेलीपैड भी बनाया गया था। गांव में पहली बार हेलीकॉप्टर देखने के लिए महिलाओं व बच्चों सहित ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी थी। हेलीकॉप्टर से नीचे उतरने के बाद डॉ. कलाम सीधे बच्चों की तरफ पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया और घूंघट की आड़ में महिलाओं का अभिवादन स्वीकारा। गांव में किसी पर्व सी खुशी और चेहरे पर बड़ी शख्सियत से मिलने की चाहत थी। इसलिए लोगों ने राष्ट्रपति के साथ फोटो भी खिंचवाए थे। कड़ी सुरक्षा के बावजूद राष्ट्रपति से गांव वाले ऐसे घुल मिल रहे थे, मानों वे उन्हीं के बीच रहने वाले किसी परिचित से मिल रहे हैं।
गांव की वर्तमान में है यह स्थिति
गांव में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग बारहवीं तक सरकारी स्कूल है। पशु अस्पताल, आयुर्वेदिक व सामान्य डिस्पेंसरी है। एक जलघर और व्यायामशाला है। सभी समुदायों की अपनी चौपाल है। बसें रुकती हैं, मगर स्टैंड नहीं है। गांव में कोई लाइब्रेरी या ऐतिहासिक संग्रहालय नहीं है। पंचायतों के पास खुद की कोई भूमि नहीं है।
हर साल बारिश में होता है जलभराव
आदर्श गांव कलिंगा में हर साल बारिश में बाड़ जैसे हालात बनते हैं। यहां जलभराव होता है। इसी वजह से सैम का इलाका बना है, जहां का भूमिगत जल भी खराब हो चुका है। पानी निकासी के सिर्फ अस्थायी प्रबंध किए जाते हैं। जिसकी वजह से गांव में अधिकतर गलियां, जोहड़ व सार्वजनिक पार्क भी बदहाल हो चुके हैं। गंदे पानी की निकासी का भी कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। गांव में साफ सफाई की भी कमी है।
गांव में हैं तीन हजार सैनिक और चार हजार पूर्व सैनिक
कलिंगा में इस समय करीब तीन हजार सैनिक सेना में तैनात हैं, जबकि करीब चार हजार पूर्व सैनिक देश सेवा कर घर आ चुके हैं। गांव का इतिहास सैनिकों के अदम्य साहस से भी जुड़ा है। कोई भी युद्ध ऐसा नहीं, जिसमें गांव के सैनिकों ने अपना बलिदान नहीं दिया हो। (संवाद)
गांव के हालत में बदलाव नहीं
कलिंगा में 14 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आए थे। जिनके नाम का पत्थर आज भी गांव के हर्बल पार्क में लगा है। तीन पंचायतों के बावजूद यहां का भाईचारा काफी मजबूत हैं, लेकिन आज भी आर्थिक रूप से ये पिछड़ा इलाका है। गांव कलिंगा ने राजनीतिक बदलाव भी काफी देखा हैं, मगर उसकी हालत में कोई बदलाव नहीं हुआ।
-ठाकुर रामभूल, सरपंच, सवाई पाना कलिंगा भिवानी।
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भिवानी। 14 साल पहले भिवानी जिले के सबसे बड़े गांव कलिंगा में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कदम पड़े थे। उस समय करीब 36 करोड़ के बजट से विकास की बयार भी बही थी। मगर अब आदर्श गांव कलिंगा की बदहाली किसी से छिपी नहीं है।
करीब 32 हजार आबादी और दस हजार वोटरों वाले इस आदर्श गांव में तीन ग्राम पंचायतें हैं। तीन बड़े पानों के नाम से मशहूर कलिंगा स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा का पैतृक गांव भी है। गांव का इतिहास सेना में जवानों के अदम्य साहस से भी जुड़ा हैं, क्योंकि गांव के हर घर से एक सैनिक देश की सरहद की रक्षा में लगे हुए हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति एजपीजे अब्दुल कलाम ने जिस हर्बल पार्क में अपने हाथों से त्रिवेणी लगाई थी, आज भी उनके नाम का पत्थर इसका जीता जागता गवाह है। सामाजिक रूप से सुदृढ़ और आर्थिक रूप से पिछड़े गांव की अब सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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भिवानी शहर से रोहतक रोड पर करीब 25 किलोमीटर दूर कलिंगा गांव धामान खाप का सबसे बड़ा गांव है। यहां की खाप सामाजिक मसलों को आपसी सहमति और भाईचारे से सुलझाने के लिए भी जानी जाती है। तीन ग्राम पंचायतों वाले कलिंगा गांव में तीन बड़े पाने भी हैं, जिनके नाम से उनका इतिहास भी जुड़ा है। गांव में राजू पाना, अमरू पाना और सवाई पाना है। देश की आजादी में अहम योगदान देने वाले महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के नजदीकी रहे स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम इसी गांव में पैदा हुए थे। उसी महान स्वतंत्रता सेनानी के पैतृक गांव को आदर्श गांव का दर्जा मिला था। जिसमें सरकार ने करीब 36 करोड़ का बजट विकास कार्यों के लिए मंजूर किया था। गांव में विकास की गंगा बही तो उसका गवाह खुद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम बने थे। उन्होंने 25 मई 2007 को यहां पहुंचकर गांव के बस स्टैंड पर हर्बल पार्क में त्रिवेणी का पौधा लगाया था। उस दौर में गांव की सभी कच्ची गलियों को पक्का किया गया था और लोहे के खंभों को बदला दिया था। गांव में हर्बल पार्क व जोहड़ों का भी सुंदरीकरण हुआ।
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हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे राष्ट्रपति, बच्चों से भी मिलाया था हाथ
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हेलीकॉप्टर से गांव में पहुंचे थे। जिसके लिए गांव के समीप ही हेलीपैड भी बनाया गया था। गांव में पहली बार हेलीकॉप्टर देखने के लिए महिलाओं व बच्चों सहित ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी थी। हेलीकॉप्टर से नीचे उतरने के बाद डॉ. कलाम सीधे बच्चों की तरफ पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया और घूंघट की आड़ में महिलाओं का अभिवादन स्वीकारा। गांव में किसी पर्व सी खुशी और चेहरे पर बड़ी शख्सियत से मिलने की चाहत थी। इसलिए लोगों ने राष्ट्रपति के साथ फोटो भी खिंचवाए थे। कड़ी सुरक्षा के बावजूद राष्ट्रपति से गांव वाले ऐसे घुल मिल रहे थे, मानों वे उन्हीं के बीच रहने वाले किसी परिचित से मिल रहे हैं।
गांव की वर्तमान में है यह स्थिति
गांव में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग बारहवीं तक सरकारी स्कूल है। पशु अस्पताल, आयुर्वेदिक व सामान्य डिस्पेंसरी है। एक जलघर और व्यायामशाला है। सभी समुदायों की अपनी चौपाल है। बसें रुकती हैं, मगर स्टैंड नहीं है। गांव में कोई लाइब्रेरी या ऐतिहासिक संग्रहालय नहीं है। पंचायतों के पास खुद की कोई भूमि नहीं है।
हर साल बारिश में होता है जलभराव
आदर्श गांव कलिंगा में हर साल बारिश में बाड़ जैसे हालात बनते हैं। यहां जलभराव होता है। इसी वजह से सैम का इलाका बना है, जहां का भूमिगत जल भी खराब हो चुका है। पानी निकासी के सिर्फ अस्थायी प्रबंध किए जाते हैं। जिसकी वजह से गांव में अधिकतर गलियां, जोहड़ व सार्वजनिक पार्क भी बदहाल हो चुके हैं। गंदे पानी की निकासी का भी कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। गांव में साफ सफाई की भी कमी है।
गांव में हैं तीन हजार सैनिक और चार हजार पूर्व सैनिक
कलिंगा में इस समय करीब तीन हजार सैनिक सेना में तैनात हैं, जबकि करीब चार हजार पूर्व सैनिक देश सेवा कर घर आ चुके हैं। गांव का इतिहास सैनिकों के अदम्य साहस से भी जुड़ा है। कोई भी युद्ध ऐसा नहीं, जिसमें गांव के सैनिकों ने अपना बलिदान नहीं दिया हो। (संवाद)
गांव के हालत में बदलाव नहीं
कलिंगा में 14 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आए थे। जिनके नाम का पत्थर आज भी गांव के हर्बल पार्क में लगा है। तीन पंचायतों के बावजूद यहां का भाईचारा काफी मजबूत हैं, लेकिन आज भी आर्थिक रूप से ये पिछड़ा इलाका है। गांव कलिंगा ने राजनीतिक बदलाव भी काफी देखा हैं, मगर उसकी हालत में कोई बदलाव नहीं हुआ।
-ठाकुर रामभूल, सरपंच, सवाई पाना कलिंगा भिवानी।