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गांव रोहनात धरने पर मृतक संत लाल के बेटे ने शुरू किया मौन व्रत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2022 12:06 AM IST
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Deceased Santlal's son begins indefinite silent fast on Rohanat dharna in village
बवानीखेड़ा (भिवानी) । गांव रोहनात के ग्रामीण अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 38 दिन से निरंतर धरनारत हैं। शनिवार को भी ग्रामीण गांव के ऐतिहासिक कुएं पर धरने पर डटे हुए हैं। मृतक संतलाल के बड़े बेटे नसीब अपने पिता की मृत्यु के एक माह बाद भी मांगें पूरी न होने के कारण अनिश्चितकालीन मौन व्रत धारण कर लिया है। वहीं वीरवार से बीआर आंबेडकर मोर्चा के प्रधान वेदप्रकाश कटारिया धरनास्थल पर दिन रात डटे हुए हैं और 10 दिन के लिए अनाज त्याग कर भूख हड़ताल पर हैं, वहीं ग्रामीण क्रमिक हड़ताल किए हुए हैं।
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ज्ञात है कि गांव रोहनात में 10 अगस्त से ग्रामीण अपने विभिन्न मांगों को लेकर धरनारत हैं। 17 अगस्त को धरनारत ग्रामीण संतलाल की मौत हो गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन को तेज करते हुए मृतक संतलाल के शव के साथ 10 दिन तक धरना दिया था। बाद में जिला प्रशासन व धरना कमेटी के बीच सहमति बनने के बाद संतलाल के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप कौशिक ने बताया कि प्रशासन ने मृतक संतलाल के परिवार को सहायता राशि का कुछ अंश ही दिया है। बाकी की सहायता राशि की अभी तक अदायगी नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने मृतक संतलाल के बेटे को कौशल रोजगार के तहत नौकरी दिए जाने की बात कही थी परंतु उसके बेटे को आज तक रोजगार नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अब उस सहमति पर खरा नहीं उतर रहा है और मागों को मानने में आनाकानी कर रहा है। संवाद
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