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लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश देने निकली युवाओं की टोली
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मास्टर प्यारेलाल सांगवान।
- फोटो : Bhiwani
आज जलवायु परिवर्तन बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। बिगड़ते जलवायु परिवर्तन और गहराते पर्यावरण प्रदूषण के बारे में आज भले ही हम आगाह न हो मगर इसके भविष्य में भयंकर परिणाम हो सकते है। युवाओं की एक टोली ने इन भयंकर परिणामों को समझा और लोगों को जागरूक करने के लिए मुहिम शुरू कर दी। लोगों को जागरूकता के लिए युवाओं द्वारा बनाये ग्रुप को नाम दिया गया स्टैंड विद नेचर। इस ग्रुप को बनाने वाले युवा 23 वर्षीय ढाबढाणी वासी ने हाल ही में हरियाणा और दिल्ली में करीब 1200 किलोमीटर साइकिल चलाकर करीब एक लाख स्कूली बच्चों, कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों, विभिन्न संगठनों के सदस्यों को जागरूक किया।
युवाओं की यह टोली पहले अपने स्तर पर पौधरोपण करने, जागरूकता रैली निकालने जैसे कार्य करती थी मगर जब जलवायु परिवर्तन के भयावह परिणाम के बारे में सुना तो लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। इस टीम में फिलहाल आठ से 10 सदस्य हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों भिवानी, दिल्ली, फरीदाबाद, चंडीगढ़ आदि में रहते हैं। कुछ नौकरी भी कर रहे हैं मगर वे जागरूकता अभियान में अपना योगदान देने से पीछे नहीं हटते। हाल में इस ग्रुप ने लोगों को जागरूक करने के लिए साइकिल यात्रा निकालने का निर्णय लिया। साइकिल यात्रा ग्रुप बनाने वाले 23 वर्षीय युवा लोकेश ने निकाली। साइकिल यात्रा भिवानी से शुरू हुई। यहां से तोशाम, नारनौल, झज्जर, चंडीगढ़, सोनीपत, करनाल, फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम आदि में साइकिल यात्रा से लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक किया। यात्रा के दौरान करीब एक सौ स्कूलों, करीब 30 संस्थाओं, करीब 30 एकेडमियों में लोगों को जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूक किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने, पेड़ों की कटाई रोकने का संदेश दिया। ग्रुप के मुखिया लोकेश ने बताया कि ग्रुप के सदस्य नौकरी भी कर रहे है और अपने वेतन का एक हिस्सा जागरूकता के लिए खर्च करते हैं।
अपने मुनाफे के लिए कर रहे प्रकृति से खिलवाड़ : आज लोग अपने मुनाफे के चक्कर में प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। इसी कारण आज जलवायु परिवर्तन बड़ा मुद्दा बन गया है। हम पर्यावरण संरक्षण के लिए अनेक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है और उम्मीद करेंगे कि उनके अच्छे परिणाम रहेंगे।
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उधर, रक्त न मिलने से हुई महिला की मौत तो बना दिया रक्तदान का रिकॉर्ड
रक्त नहीं मिलने के कारण वर्ष 1984 में फरटीया गांव में एक महिला की मौत हो गई। महिला की मौत से क्षुब्ध शिक्षक प्यारे लाल सांगवान ने अपने कुछ साथियों संग ठानी की रक्त की कमी के कारण किसी की मौत नहीं होने देंगे। इस कारण उन्होंने लोहारू क्षेत्र में स्वैच्छिक रक्तदाता ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में आज 450 से अधिक सदस्य हैं, जो हर समय रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। इतना ही नहीं शिक्षक प्यारे लाल स्वयं 102 बार रक्तदान कर चुके हैं। अब उम्र की बंदिशों के कारण वे रक्तदान नहीं कर पा रहे हैं। मगर अब वे स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न कार्यक्रमों में लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करने में जुटे हैं।
लोहारू क्षेत्र के रहने वाले प्यारे लाल राज्य शिक्षक अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। 35 साल तक उन्होंने रक्तदान किया। छह बार वे सम्मानित भी हो चुके हैं। अब उनके पुत्र, पुत्री, पुत्रवधू, भतीजे, दामाद नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं। अब ताक सांगवान परिवार 250 से अधिक दफा रक्तदान कर चुका है।
हेडमास्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए प्यारे लाल सांगवान अब 66 वर्ष के हो गए हैं और 65 वर्ष की आयु के बंधन के कारण अब रक्तदान नहीं कर सकते। मगर अब उन्होंने युवाओं को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। स्वयं 147 रक्तदान शिविर लगाने के अलावा वे स्कूल-कॉलेजों, आईटीआई आदि में जागरूकता कार्यक्रम कर युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। प्यारे लाल सांगवान ने कहा कि वे चाहते हैं कि रक्त के अभाव में किसी की जान न जाए। इसी कारण उन्होंने नियमित रूप से रक्तदान किया और युवाओं से भी आह्वान करते हैं कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें ताकि किसी की जान बचाई जा सके।
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युवाओं की यह टोली पहले अपने स्तर पर पौधरोपण करने, जागरूकता रैली निकालने जैसे कार्य करती थी मगर जब जलवायु परिवर्तन के भयावह परिणाम के बारे में सुना तो लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। इस टीम में फिलहाल आठ से 10 सदस्य हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों भिवानी, दिल्ली, फरीदाबाद, चंडीगढ़ आदि में रहते हैं। कुछ नौकरी भी कर रहे हैं मगर वे जागरूकता अभियान में अपना योगदान देने से पीछे नहीं हटते। हाल में इस ग्रुप ने लोगों को जागरूक करने के लिए साइकिल यात्रा निकालने का निर्णय लिया। साइकिल यात्रा ग्रुप बनाने वाले 23 वर्षीय युवा लोकेश ने निकाली। साइकिल यात्रा भिवानी से शुरू हुई। यहां से तोशाम, नारनौल, झज्जर, चंडीगढ़, सोनीपत, करनाल, फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम आदि में साइकिल यात्रा से लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक किया। यात्रा के दौरान करीब एक सौ स्कूलों, करीब 30 संस्थाओं, करीब 30 एकेडमियों में लोगों को जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूक किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने, पेड़ों की कटाई रोकने का संदेश दिया। ग्रुप के मुखिया लोकेश ने बताया कि ग्रुप के सदस्य नौकरी भी कर रहे है और अपने वेतन का एक हिस्सा जागरूकता के लिए खर्च करते हैं।
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अपने मुनाफे के लिए कर रहे प्रकृति से खिलवाड़ : आज लोग अपने मुनाफे के चक्कर में प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। इसी कारण आज जलवायु परिवर्तन बड़ा मुद्दा बन गया है। हम पर्यावरण संरक्षण के लिए अनेक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है और उम्मीद करेंगे कि उनके अच्छे परिणाम रहेंगे।
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उधर, रक्त न मिलने से हुई महिला की मौत तो बना दिया रक्तदान का रिकॉर्ड
रक्त नहीं मिलने के कारण वर्ष 1984 में फरटीया गांव में एक महिला की मौत हो गई। महिला की मौत से क्षुब्ध शिक्षक प्यारे लाल सांगवान ने अपने कुछ साथियों संग ठानी की रक्त की कमी के कारण किसी की मौत नहीं होने देंगे। इस कारण उन्होंने लोहारू क्षेत्र में स्वैच्छिक रक्तदाता ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में आज 450 से अधिक सदस्य हैं, जो हर समय रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। इतना ही नहीं शिक्षक प्यारे लाल स्वयं 102 बार रक्तदान कर चुके हैं। अब उम्र की बंदिशों के कारण वे रक्तदान नहीं कर पा रहे हैं। मगर अब वे स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न कार्यक्रमों में लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करने में जुटे हैं।
लोहारू क्षेत्र के रहने वाले प्यारे लाल राज्य शिक्षक अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। 35 साल तक उन्होंने रक्तदान किया। छह बार वे सम्मानित भी हो चुके हैं। अब उनके पुत्र, पुत्री, पुत्रवधू, भतीजे, दामाद नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं। अब ताक सांगवान परिवार 250 से अधिक दफा रक्तदान कर चुका है।
हेडमास्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए प्यारे लाल सांगवान अब 66 वर्ष के हो गए हैं और 65 वर्ष की आयु के बंधन के कारण अब रक्तदान नहीं कर सकते। मगर अब उन्होंने युवाओं को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। स्वयं 147 रक्तदान शिविर लगाने के अलावा वे स्कूल-कॉलेजों, आईटीआई आदि में जागरूकता कार्यक्रम कर युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। प्यारे लाल सांगवान ने कहा कि वे चाहते हैं कि रक्त के अभाव में किसी की जान न जाए। इसी कारण उन्होंने नियमित रूप से रक्तदान किया और युवाओं से भी आह्वान करते हैं कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें ताकि किसी की जान बचाई जा सके।

बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते लोकेश कुमार।- फोटो : Bhiwani