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अस्पताल में इलाज न मिलने पर किया हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 12 Jul 2016 12:23 AM IST
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डेमो पिक
- फोटो : फाइल फोटो
सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में खून से लथपथ दो युवकों ने उपचार न मिलने पर हंगामा किया। डाक्टर के साथ तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने युवकों को शांत कराया। वहीं दो दुष्कर्म आरोपियों को मेडिकल के लिए लेकर पहुंची एक महिला पुलिस अधिकारी भी रात दो बजे तक डाक्टर का इंतजार करती रही। करीब 10 घंटे बाद मेडिकल हुआ। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के भी फोन मिलाए गए मगर किसी का स्विच ऑफ मिला तो किसी ने उठाया नहीं।
सामान्य अस्पताल की कार्यप्रणाली भी कमाल है। रात को इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ लगी थी मगर इलाज के लिए एक ही डाक्टर लगा था। मरीजों की जांच के साथ एमएलआर काटने का भी काम चल रहा था। रात करीब 11 बजे इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ लगी थी। कोई लड़ाई-झगड़े में घायल था तो कोई सड़क हादसे में। पेट दर्द व अन्य बीमारियों के मरीज भी लाइन लगाए खड़े थे। इसी दौरान बाइक फिसलने से गिरे दो युवक भी गंभीर हालत में उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। एक के मुंह, सिर, हाथों पर लगीचोट से लगातार खून निकल रहे थे। करीब 15-20 मिनट इलाज के लिए इंतजार किया। जब किसी ने नहीं संभाला तो लगातार खून निकलने से परेशान एक युवक ने हंगामा शुरू कर दिया। खून से सना एक हाथ एक एमएलआर पर रख दिया। जिस कारण एमएलआर भी खून से खराब हो गई। इस बात पर डाक्टर भी तैश में आ गया। डाक्टर व उक्त युवक में तीखी नोकझोंक हुई। हंगामा हुआ तो सिक्योरिटी गार्ड व अन्य स्टाफ ने युवकों को रोका। अस्पताल चौकी से पुलिस को बुलाया गया। युवक ने कहा कि वह सिर्फ इतना ही कह रहा है कि जहां से खून निकल रहा है वहां टांके लगा दे।
कम से कम दो डाक्टरों की लगे ड्यूटी
'हंगामे के दौरान मौजूद अन्य मरीज भी परेशान रहे। मरीज के साथ आए राज कुमार, मरीज दिनेश, घायल राजीव ने बताया कि इमरजेंसी में काफी भीड़ रहती है। सड़क हादसों के साथ मारपीट व अन्य मामलों के भी मरीज आते है। ऐसे में यहां कम से कम दो डाक्टरों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
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शाम चार बजे पहुंचे अस्पताल, रात दो बजे हुआ मेडिकल
नजदीकी गांव में किशोरी से दुष्कर्म मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को काबू किया। महिला थाना से एसआई बृजबाला दोनों आरोपियों को सायं करीब चार बजे मेडिकल के लिए सामान्य अस्पताल लाई। मगर आरोपियों के मेडिकल का इंतजार करते-करते रात के 11 बज गए। रात को महिला पुलिस अधिकारी सिविल सर्जन आवास पर पहुंची तो वहां कोई गेट खोलने वाला नहीं था। किसी अन्य ने बताया कि सिविल सर्जन बीमार हैं। फिर कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी का नंबर लेकर उनसे बात करने के लिए प्रयास किया गया मगर उनसे भी बात नहीं हो पाई। इमरजेंसी के डाक्टर से गुहार लगाई तो जवाब मिला कि पहले बाकी मरीजों का इलाज कर दे फिर दुष्कर्म आरोपियों का मेडिकल होगा। आखिरकार रात करीब दो बजे यानी करीब 10 घंटे बाद दोनों का मेडिकल हुआ और पुलिस अधिकारी दोनों को महिला थाने लेकर पहुंची। एसआई बृजबाला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इमरजेंसी में बेहतर व्यवस्था बनानी चाहिए। अब मेडिकल के लिए इतने घंटे इंतजार करेंगे तो बाकी काम कैसे होंगे। कम से कम दो चिकित्सकों की इमरजेंसी में ड्यूटी लगानी चाहिए या फिर पुलिस संबंधित केसों दुष्कर्म केसों में मेडिकल के लिए अलग डाक्टर की ड्यूटी लगानी चाहिए।
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सामान्य अस्पताल की कार्यप्रणाली भी कमाल है। रात को इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ लगी थी मगर इलाज के लिए एक ही डाक्टर लगा था। मरीजों की जांच के साथ एमएलआर काटने का भी काम चल रहा था। रात करीब 11 बजे इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ लगी थी। कोई लड़ाई-झगड़े में घायल था तो कोई सड़क हादसे में। पेट दर्द व अन्य बीमारियों के मरीज भी लाइन लगाए खड़े थे। इसी दौरान बाइक फिसलने से गिरे दो युवक भी गंभीर हालत में उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। एक के मुंह, सिर, हाथों पर लगीचोट से लगातार खून निकल रहे थे। करीब 15-20 मिनट इलाज के लिए इंतजार किया। जब किसी ने नहीं संभाला तो लगातार खून निकलने से परेशान एक युवक ने हंगामा शुरू कर दिया। खून से सना एक हाथ एक एमएलआर पर रख दिया। जिस कारण एमएलआर भी खून से खराब हो गई। इस बात पर डाक्टर भी तैश में आ गया। डाक्टर व उक्त युवक में तीखी नोकझोंक हुई। हंगामा हुआ तो सिक्योरिटी गार्ड व अन्य स्टाफ ने युवकों को रोका। अस्पताल चौकी से पुलिस को बुलाया गया। युवक ने कहा कि वह सिर्फ इतना ही कह रहा है कि जहां से खून निकल रहा है वहां टांके लगा दे।
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कम से कम दो डाक्टरों की लगे ड्यूटी
'हंगामे के दौरान मौजूद अन्य मरीज भी परेशान रहे। मरीज के साथ आए राज कुमार, मरीज दिनेश, घायल राजीव ने बताया कि इमरजेंसी में काफी भीड़ रहती है। सड़क हादसों के साथ मारपीट व अन्य मामलों के भी मरीज आते है। ऐसे में यहां कम से कम दो डाक्टरों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
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शाम चार बजे पहुंचे अस्पताल, रात दो बजे हुआ मेडिकल
नजदीकी गांव में किशोरी से दुष्कर्म मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को काबू किया। महिला थाना से एसआई बृजबाला दोनों आरोपियों को सायं करीब चार बजे मेडिकल के लिए सामान्य अस्पताल लाई। मगर आरोपियों के मेडिकल का इंतजार करते-करते रात के 11 बज गए। रात को महिला पुलिस अधिकारी सिविल सर्जन आवास पर पहुंची तो वहां कोई गेट खोलने वाला नहीं था। किसी अन्य ने बताया कि सिविल सर्जन बीमार हैं। फिर कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी का नंबर लेकर उनसे बात करने के लिए प्रयास किया गया मगर उनसे भी बात नहीं हो पाई। इमरजेंसी के डाक्टर से गुहार लगाई तो जवाब मिला कि पहले बाकी मरीजों का इलाज कर दे फिर दुष्कर्म आरोपियों का मेडिकल होगा। आखिरकार रात करीब दो बजे यानी करीब 10 घंटे बाद दोनों का मेडिकल हुआ और पुलिस अधिकारी दोनों को महिला थाने लेकर पहुंची। एसआई बृजबाला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इमरजेंसी में बेहतर व्यवस्था बनानी चाहिए। अब मेडिकल के लिए इतने घंटे इंतजार करेंगे तो बाकी काम कैसे होंगे। कम से कम दो चिकित्सकों की इमरजेंसी में ड्यूटी लगानी चाहिए या फिर पुलिस संबंधित केसों दुष्कर्म केसों में मेडिकल के लिए अलग डाक्टर की ड्यूटी लगानी चाहिए।