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390 रुपये में दी गर्भपात की आयुर्वेदिक दवा, स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा, दुकान सील
Updated Thu, 11 Oct 2018 12:54 AM IST
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भिवानी। दादरी गेट स्थित एक दुकान पर 390 रुपये में गर्भपात की आयुर्वेदिक दवा डिकाय (डमी मरीज) को दी गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की। जांच की तो दुकान पर फार्मासिस्ट ही नहीं था और बिना फार्मासिस्ट के ही दुकान पर ना केवल दवाइयां बेची जा रही थी अपितु प्रेक्टिस भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के बाद दुकान को सील कर दिया। इसी दुकान के नाम से चंद कदम की दूरी पर एक मैटरनिटी अस्पताल भी था जिसकी जांच की तो वहां कोई चिकित्सक ही नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि उक्त दुकान संचालक स्वयं को चिकित्सक बताते हुए दवाइयां वितरित करता था जिस कारण एमटीपी एक्ट के साथ-साथ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज किया गया है।
सिविल सर्जन को गुप्त सूचना मिली कि दादरी गेट स्थित एक दवा दुकानदार गर्भपात की दवाइयां देता है। उसका अस्पताल भी है। इसके बाद डिकाय भेजा गया। डिकाय महिला ने स्वयं को दो माह की गर्भवती बताते हुए गर्भपात की दवा मांगी तो दुकान पर मौजूद दुकानदार ने अलग-अलग किट बनाकर दी। दवाइयां 390 रुपये में दी गई। इसी दौरान डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार की टीम ने छापा मारा। जांच की तो दवाइयां आयुर्वेदिक थी। इसके बाद आयुर्वेदक विभाग से डॉ. संदीप कुमार को बुलाया गया। जांच में पाया गया कि दी गई आयुर्वेदिक दवाइयों से गर्भपात संभव है। इसके अलावा जांच में पाया कि जो दुकानदार दवा वितरित कर रहा था, उसके पास फार्मेसी का लाइसेंस ही नहीं है।
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दुकान पर बिना किसी लाइसेंस और अनुमति के दवाइयां बेची जा रही थी। रिकॉर्ड की भी जांच की गई। बाद में इसकी शिकायत जैन चौक चौकी में दी गई। दुकान को सील कर दिया गया। छापामार टीम में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार के अलावा डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संध्या गुप्ता, डॉ. दिव्या, औषधि नियंत्रक हेमंत ग्रोवर, कर्मचारी अंजू शामिल रही।
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बिना चिकित्सक का अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दादरी गेट पर दिनेश नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम पर छापा मारा तो पता लगा कि यह बंद पड़ा है, यहां चिकित्सक ही नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां सारी चीजों, दवाइयों की जांच की। ईसीजी, अल्ट्रासाउंड में प्रयोग होने वाली जैली की बोतलें मिली मगर ना ईसीजी मशीन और ना ही अल्ट्रासाउंड मशीन। कुछ औजार भी मिले। मगर गर्भपात संबंधित कुछ नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि स्वयं को चिकित्सक बताकर दुकान पर इलाज किया जाता था। टीम सदस्यों ने अस्पताल के बोर्ड हटाने के निर्देश दिएा। इसी कारण एमटीपी के साथ-साथ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज किया गया।
दुकानदारों और अस्पताल संचालकों हड़कंप
लगातार दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से दवा दुकानदारों और प्राइवेट अस्पताल संचालकों में हड़कंप की स्थिति रही। कुछ दुकानदार तो अपनी दुकानें बंद कर चलते बने। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को शहर में एक अन्य जगह भी छापेमारी करनी थी मगर इसी हड़कंप की स्थिति के चलते फिलहाल छापामार कार्रवाई टालनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार शाम को सरकुलर रोड स्थित एक अस्पताल पर छापेमारी की थी।
गर्भपात की दवाइयां बेचने की शिकायत पर छापेमारी की गई थी। डिकाय को 390 रुपये में गर्भपात की आयुर्वेदिक दवाइयां दी गई। दुकानदार के पास लाइसेंस भी नहीं था। दुकान पर मौजूद कृष्ण कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पुलिस को कहा गया है। दुकान को सील कर दिया गया है।
-डॉ. कृष्ण कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन स्वास्थ्य विभाग