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एंबुलेंस के पहिये थमे...कहीं सांसें न थम जाएं

Mon, 04 Sep 2017 12:40 AM IST
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:40 AM IST
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एंबुलेंस के पहिये थमे...कहीं सांसें न थम जाएं
भिवानी। एंबुलेंस का टोटा मरीजों और जरूरतमंद लोगों की जिंदगी पर पर भारी पड़ सकता है। समस्या की गंभीरता बताने के लिए बहल का मामला काफी है। बहल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले करीब चार महीने से एंबुलेंस सुविधा नहीं है। जरूरत पर लोहारू से 40 किलोमीटर दूर एंबुलेंस बहल पहुंचती है। यानी, एंबुलेंस के लिए 50-60 मिनट तो मरीज को इंतजार करना ही पड़ता है।
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एंबुलेंस की कमी का कहीं कम तो कहीं ज्यादा, असर तो पड़ ही रहा है। दरअसल, जल्द अस्पताल पहुंचाकर हजारों लोगों को मौत के मुंह से बचाने वाली एंबुलेंस सेवा की खुद ‘तबीयत’ ठीक नहीं है।
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जिला अस्पताल से लगभग 60 किलोमीटर दूर लोहारू के सामान्य अस्पताल में भी एक एंबुलेंस है। यदि एक कॉल पर गई एंबुलेंस के बाद दूसरी इमरजेंसी कॉल आ जाए तो हालात समझे जा सकते हैं। एंबुलेंस की कमी किसी बड़ी आपदा के वक्त जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
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स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि जिलेभर में तैनात 30 एंबुलेंस में से करीब 10 एंबुलेंस अलग-अलग कारणों से खड़ी हुई है। दो कंडम हो चुकी हैं तो तीन एंबुलेंस पिछले कई महीनों से जिला अस्पताल की पार्किंग में खड़ी हैं। बाकी 20 में से कई एंबुलेंस निर्धारित लिमिट से ज्यादा सड़क नाप चुकी हैं। ज्यादा चलने की वजह से एक-दो एंबुलेंस अक्सर रिपेयरिंग के लिए वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं।

जिला अस्पताल में उठानी पड़ती है परेशानी
जिला अस्पताल के मरीजों को भी कई बार एंबुलेंस की कमी को झेलना पड़ता है। इमरजेंसी केस को तो तुरंत एंबुलेंस मिल जाती है, लेकिन घर भेजते वक्त अक्सर एंबुलेंस के लिए जच्चा-बच्चा को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

तत्काल जरूरत है दस नई एंबुलेंस की
बेहतर व त्वरित एंबुलेंस सेवा के लिए जिले को 10 नई एंबुलेंस की जरूरत है। सूत्र बताते हैं कि जो एंबुलेंस रोड पर चल रही हैं, उनमें से तीन से लेकर चार एंबुलेंस निर्धारित लिमिट से ज्यादा चल चुकी हैं। इसलिए 10 एंबुलेंस की तत्काल जरूरत है।


पॉवर कंपनी देगी नई एंबुलेंस
एक निजी पॉवर कंपनी जल्द ही स्वास्थ्य विभाग को नई एंबुलेंस भेंट करेगी। इस बारे में औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। कंपनी अपने सीएसआर फंड से एंबुलेंस उपलब्ध कराएगी।
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