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पांच साल बाद वैश्य ट्रस्ट के सदस्य पर गबन का केस दर्ज
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भिवानी। पांच साल बाद दिनोद गेट क्षेत्र स्थित वैश्य ट्रस्ट के एक ट्रस्टी पर बच्चों की फीस गबन मामले में शहर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। ट्रस्ट व अन्य स्टाफ सदस्यों पर केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि स्कूल के पैसे का प्रयोग निजी कार्य में किया गया। मामला उठा तो रुपये वापस जमा करा दिए गए। ट्रस्टी ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए केस दर्ज कराने वाले पर मान हानि का केस करने की बात कही है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने 26 मार्च 2018 उपायुक्त को एक शिकायत देकर वैश्य ट्रस्ट के एक स्कूल में प्रबंध समिति के पदाधिकारियों की मिलीभगत से छात्रों की फीस में 30 लाख रुपये का गबन करने की शिकायत देकर जांच की मांग की थी। इस शिकायत पर उपायुक्त ने शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन सचिव धीरेंद्र खडगटा को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जिन्होंने अपनी जांच में स्कूल मैनेजेंट द्वारा फीस राशि में लाखों का गबन होने की पुष्टि की और पूरी प्रबंध समिति का गठन ही गैर कानूनी तरीके से किए जाने की रिपोर्ट भी उपायुक्त को सौंप दी थी। इसके बाद कार्रवाई के लिए जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में भेजी गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला रजिस्ट्रार कार्यालय ने भी चंडीगढ़ स्टेट रजिस्ट्रार को गैर कानूनी ढंग से गठित की गई प्रबंध समिति व छात्र फंड में 30 लाख रुपये के गबन मामले में कार्रवाई की सिफारिश की। इसी दौरान स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने मामले को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को इस संबंध में जांच कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
यह है शिकायत
बृजपाल परमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि स्कूल में 30 लाख रुपये का गबन किया गया। जिसका पुख्ता प्रमाण 28 जनवरी 2014 को स्कूल के बैंक खातों में नगद जमा करवाया गया 30 लाख रुपये है। अप्रैल-मई 2013 में स्कूल के दाखिले की राशि बैंक में जमा करवाने की बजाये यह राशि ट्रस्टी अपने घर मंगवाता रहा है और इस राशि का गबन किया। इसमें स्कूल प्रिंसिपल और कैशियर का भी हाथ है। जब 25-26 जनवरी को यह बात लीक हुई और संस्था के शुभ चिंतकों तक पहुंची तो उन्होंने सामाजिक दबाव बनाया तब जाकर ट्रस्टी ने 29 जनवरी 2014 को स्कूल के बैंक खाते में लगभग 30 लाख जमा करवाए। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि गबन की गई राशि को जमा कर देने मात्र से गबन खत्म नहीं होता, बल्कि इससे तो गबन की पुष्टि होती है। बृजपाल परमार ने बताया कि दूसरा मामला मई 2013 का है, जिसमे ट्रस्टी ने पांच लाख रुपये चैक द्वारा फर्म लीलूराम गजानंद के मालिक कृष्ण कुमार को दिए, जबकि उसकी फर्म से कोई भी सामान नहीं आया था और न ही आना बाकी था। अब पोल खुलने पर कृष्ण कुमार से पांच लाख रुपये का चेक स्कूल के नाम से लेकर उपरोक्त 30 लाख रुपये जमा करवा दिया जो स्पष्ट गबन और गबन का षड्यंत्र प्रमाणित करता है।
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ट्रस्ट के किसी भी सदस्य ने आज तक कोई शिकायत नहीं की है। यह राजनीतिक साजिश है। न रुपयों का कोई लेन-देन हुआ और न ही कोई 30 लाख रुपये स्कूल के अकाउंट से निकाले। सभी तरह की ऑडिट भी हो चुकी है। एफआईआर दर्ज कराने वाले के खिलाफ मान हानि का केस करेंगे।
पवन बुवानीवाला, महासचिव, वैश्य ट्रस्ट
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने 26 मार्च 2018 उपायुक्त को एक शिकायत देकर वैश्य ट्रस्ट के एक स्कूल में प्रबंध समिति के पदाधिकारियों की मिलीभगत से छात्रों की फीस में 30 लाख रुपये का गबन करने की शिकायत देकर जांच की मांग की थी। इस शिकायत पर उपायुक्त ने शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन सचिव धीरेंद्र खडगटा को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जिन्होंने अपनी जांच में स्कूल मैनेजेंट द्वारा फीस राशि में लाखों का गबन होने की पुष्टि की और पूरी प्रबंध समिति का गठन ही गैर कानूनी तरीके से किए जाने की रिपोर्ट भी उपायुक्त को सौंप दी थी। इसके बाद कार्रवाई के लिए जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में भेजी गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला रजिस्ट्रार कार्यालय ने भी चंडीगढ़ स्टेट रजिस्ट्रार को गैर कानूनी ढंग से गठित की गई प्रबंध समिति व छात्र फंड में 30 लाख रुपये के गबन मामले में कार्रवाई की सिफारिश की। इसी दौरान स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने मामले को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को इस संबंध में जांच कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
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यह है शिकायत
बृजपाल परमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि स्कूल में 30 लाख रुपये का गबन किया गया। जिसका पुख्ता प्रमाण 28 जनवरी 2014 को स्कूल के बैंक खातों में नगद जमा करवाया गया 30 लाख रुपये है। अप्रैल-मई 2013 में स्कूल के दाखिले की राशि बैंक में जमा करवाने की बजाये यह राशि ट्रस्टी अपने घर मंगवाता रहा है और इस राशि का गबन किया। इसमें स्कूल प्रिंसिपल और कैशियर का भी हाथ है। जब 25-26 जनवरी को यह बात लीक हुई और संस्था के शुभ चिंतकों तक पहुंची तो उन्होंने सामाजिक दबाव बनाया तब जाकर ट्रस्टी ने 29 जनवरी 2014 को स्कूल के बैंक खाते में लगभग 30 लाख जमा करवाए। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि गबन की गई राशि को जमा कर देने मात्र से गबन खत्म नहीं होता, बल्कि इससे तो गबन की पुष्टि होती है। बृजपाल परमार ने बताया कि दूसरा मामला मई 2013 का है, जिसमे ट्रस्टी ने पांच लाख रुपये चैक द्वारा फर्म लीलूराम गजानंद के मालिक कृष्ण कुमार को दिए, जबकि उसकी फर्म से कोई भी सामान नहीं आया था और न ही आना बाकी था। अब पोल खुलने पर कृष्ण कुमार से पांच लाख रुपये का चेक स्कूल के नाम से लेकर उपरोक्त 30 लाख रुपये जमा करवा दिया जो स्पष्ट गबन और गबन का षड्यंत्र प्रमाणित करता है।
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ट्रस्ट के किसी भी सदस्य ने आज तक कोई शिकायत नहीं की है। यह राजनीतिक साजिश है। न रुपयों का कोई लेन-देन हुआ और न ही कोई 30 लाख रुपये स्कूल के अकाउंट से निकाले। सभी तरह की ऑडिट भी हो चुकी है। एफआईआर दर्ज कराने वाले के खिलाफ मान हानि का केस करेंगे।
पवन बुवानीवाला, महासचिव, वैश्य ट्रस्ट