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Bhiwani News: नगर परिषद का लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान फिर हुआ ठप
Wed, 28 Aug 2024 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 28 Aug 2024 11:34 PM IST
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रात के समय जिला जेल के सामने सड़क पर लगा लावारिश पशुओं का जमावड़ा।
भिवानी। शहर से गुजरने वाले हाईवे और नेशनल हाईवे पर इनदिनों लावारिस पशु डेरा डाले रहते हैं। शाम ढलते ही लावारिस पशु मुख्य रास्तों पर जमावड़ा लगाते हैं, जिससे हादसों का भी अंदेशा बना रहता है। नगर परिषद का लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान भी ठंडा पड़ा है।
नंदीशाला और गोशाला में शहर से लावारिस पशुओं को पकड़कर अब नहीं छोड़ा जा रहा है। वहीं गोशाला संचालक भी पिंक टैग और येलो टैग में उलझकर रह गए हैं, क्योंकि लावारिस पशुओं का गो सेवा आयोग की तरफ से मिलने वाला बजट भी अभी तक नहीं मिला है।
भिवानी शहर व आसपास के ग्रामीण इलाकों में करीब पांच हजार गोवंश लावारिस घूम रहे हैं। करीब डेढ़ हजार लावारिस गोवंश तो सांझ ढलने के बाद हाईवे और नेशनल हाईवे पर ही अपना बसेरा बनाए हुए हैं, जिनकी वजह से रफ्तार में दौड़ रहे वाहनों के हादसाग्रस्त होने का अंदेशा बना रहता है। नगर परिषद की तरफ से लावारिस गोवंश पकड़ने के लिए भी ठेका दिया था, मगर अब ठेकेदार भी अपना काम समेट चुका है।
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इसके बाद बजट नहीं मिलने की वजह से गोशाला और नंदीशालाओं ने भी लावारिस गोवंश से तौबा कर ली है। ऐसे में लावारिस गोवंश के लिए अब कोई न तो ठिकाना है न खुराक का कोई प्रबंध। प्रशासन भी अब चुनावी गतिविधियों में ही उलझा हुआ है। लावारिस गोवंश की कोई सुध नहीं ले रहा है।
लावारिस गोवंश के लिए गोशालाओं को बजट का इंतजार
गो सेवा आयोग ने लावारिस गोवंश के लिए पिंक टैग के साथ बजट का प्रावधान भी किया है। इसमें एक साल से नीचे के बछड़ा-बछड़ियों के लिए प्रतिदिन 20 रुपये, एक साल से ऊपर गोवंश के लिए रोजाना 30 रुपये और एक साल से ऊपर नंदी के लिए रोजाना 40 रुपये का बजट का खुराक के लिए प्रावधान है। लेकिन इस साल अधिकांश गोशाला को बजट नहीं मिला है। वहीं लावारिस पशुओं को पिंक टैग लगाने का काम भी बंद है। जबकि गोशाला में पहले से मौजूद गोवंश को येलो टैगिंग का प्रावधान है। उनके लिए अलग से बजट दिया जा रहा है।
गोशाला को पिंक टैग के तहत शहर से लावारिस पशुओं को पकड़कर लाने पर अलग से बजट का गो सेवा आयोग ने प्रावधान किया है। लेकिन इस साल ये बजट नहीं मिला है। जिला प्रशासन की ओर से ही लावारिस गोवंश को यहां भेजा जाता है। गो सेवा आयोग से गोशाला में ढांचागत सुविधा विस्तार के लिए सौ गोवंश पर सात लाख रुपये बजट का प्रावधान भी किया है, मगर ये बजट भी अब तक नहीं मिला है।
- मोहनलाल अग्रवाल, अध्यक्ष, श्रीगोशाला ट्रस्ट भिवानी।
शहर में नगर परिषद की नंदीशाला को हाल ही में पंजीकृत किया गया है। लेकिन अभी तक यहां रह रहे 800 से अधिक गोवंश के लिए सरकार व गो सेवा आयोग की तरफ से कोई बजट नहीं मिला है। लावारिस गोवंश पकड़ने का अभियान भी काफी समय से बंद पड़ा है। नंदीशाला का संचालन नंदीशाला सेवा दल की ओर से ही किया जा रहा है।
- अमित बंसल, सदस्य, नंदीशाला सेवा दल भिवानी।
नगर परिषद की ओर से शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए चुनावों के बाद टेंडर कराया जाएगा। कुछ अर्से पहले भी करीब तीन हजार लावारिस गोवंश को पकड़ने का ठेका दिया गया था। नंदीशाला और गोशालाओं में उन्हें भेजा जा चुका है।
-भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद भिवानी।
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नंदीशाला और गोशाला में शहर से लावारिस पशुओं को पकड़कर अब नहीं छोड़ा जा रहा है। वहीं गोशाला संचालक भी पिंक टैग और येलो टैग में उलझकर रह गए हैं, क्योंकि लावारिस पशुओं का गो सेवा आयोग की तरफ से मिलने वाला बजट भी अभी तक नहीं मिला है।
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भिवानी शहर व आसपास के ग्रामीण इलाकों में करीब पांच हजार गोवंश लावारिस घूम रहे हैं। करीब डेढ़ हजार लावारिस गोवंश तो सांझ ढलने के बाद हाईवे और नेशनल हाईवे पर ही अपना बसेरा बनाए हुए हैं, जिनकी वजह से रफ्तार में दौड़ रहे वाहनों के हादसाग्रस्त होने का अंदेशा बना रहता है। नगर परिषद की तरफ से लावारिस गोवंश पकड़ने के लिए भी ठेका दिया था, मगर अब ठेकेदार भी अपना काम समेट चुका है।
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इसके बाद बजट नहीं मिलने की वजह से गोशाला और नंदीशालाओं ने भी लावारिस गोवंश से तौबा कर ली है। ऐसे में लावारिस गोवंश के लिए अब कोई न तो ठिकाना है न खुराक का कोई प्रबंध। प्रशासन भी अब चुनावी गतिविधियों में ही उलझा हुआ है। लावारिस गोवंश की कोई सुध नहीं ले रहा है।
लावारिस गोवंश के लिए गोशालाओं को बजट का इंतजार
गो सेवा आयोग ने लावारिस गोवंश के लिए पिंक टैग के साथ बजट का प्रावधान भी किया है। इसमें एक साल से नीचे के बछड़ा-बछड़ियों के लिए प्रतिदिन 20 रुपये, एक साल से ऊपर गोवंश के लिए रोजाना 30 रुपये और एक साल से ऊपर नंदी के लिए रोजाना 40 रुपये का बजट का खुराक के लिए प्रावधान है। लेकिन इस साल अधिकांश गोशाला को बजट नहीं मिला है। वहीं लावारिस पशुओं को पिंक टैग लगाने का काम भी बंद है। जबकि गोशाला में पहले से मौजूद गोवंश को येलो टैगिंग का प्रावधान है। उनके लिए अलग से बजट दिया जा रहा है।
गोशाला को पिंक टैग के तहत शहर से लावारिस पशुओं को पकड़कर लाने पर अलग से बजट का गो सेवा आयोग ने प्रावधान किया है। लेकिन इस साल ये बजट नहीं मिला है। जिला प्रशासन की ओर से ही लावारिस गोवंश को यहां भेजा जाता है। गो सेवा आयोग से गोशाला में ढांचागत सुविधा विस्तार के लिए सौ गोवंश पर सात लाख रुपये बजट का प्रावधान भी किया है, मगर ये बजट भी अब तक नहीं मिला है।
- मोहनलाल अग्रवाल, अध्यक्ष, श्रीगोशाला ट्रस्ट भिवानी।
शहर में नगर परिषद की नंदीशाला को हाल ही में पंजीकृत किया गया है। लेकिन अभी तक यहां रह रहे 800 से अधिक गोवंश के लिए सरकार व गो सेवा आयोग की तरफ से कोई बजट नहीं मिला है। लावारिस गोवंश पकड़ने का अभियान भी काफी समय से बंद पड़ा है। नंदीशाला का संचालन नंदीशाला सेवा दल की ओर से ही किया जा रहा है।
- अमित बंसल, सदस्य, नंदीशाला सेवा दल भिवानी।
नगर परिषद की ओर से शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए चुनावों के बाद टेंडर कराया जाएगा। कुछ अर्से पहले भी करीब तीन हजार लावारिस गोवंश को पकड़ने का ठेका दिया गया था। नंदीशाला और गोशालाओं में उन्हें भेजा जा चुका है।
-भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद भिवानी।