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फंगस की पुष्टि के लिए जेब पर पड़ रहा 10 हजार का भार
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भिवानी। जिले में ब्लैक फंगस के 32 केस सामने आ चुके हैं, बावजूद इसके जिला स्तर पर इसके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं बन पाई है। अस्पताल में मगर कोई मरीज चिकित्सक को ब्लैक फंगस के लक्षण बताता है तो चिकित्सक उसे टेस्ट करवाने की सलाह देता है। इसमें टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर ही चिकित्सक फंगस होने की पुष्टि कर पाता है। जिसकी जांच के टेस्ट के लिए सौ या दो सौ रुपये नहीं बल्कि दस हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं।
ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर कई लोग तो यह टेस्ट करवा ही नहीं पाते हैं। टेस्ट के बाद अगर ब्लैक फंगस की पुष्टि होती है तो मरीज पर दवा और उपचार का भी अतिरिक्त भार रहता है। जिला स्तर पर इसके उपचार की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीज को पीजीआईएमएस रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है। अगर वह निजी अस्पताल से उपचार लेता है तो उपचार का खर्च अधिक हो जाता है।
ये टेस्ट करवाए जाते हैं
- अगर किसी में फंगस के प्राथमिक लक्षण जैसे : आंखों में सूजन, लाली, नाक, गाल पर सूजन, ब्रेन में दिक्कत और अधिक सिर दर्द है तो चिकित्सक मरीज की एमआरआई का परामर्श देते हैं। एमआरआई के लिए शुरुआती शुल्क छह हजार से साढ़े आठ हजार रुपये तक का है। साथ ही फंगस के टेस्ट का पूरा पैकेज दस हजार रुपये है।
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- अगर फंगस के लक्षण शरीर पर बाहर की ओर दिखाई नहीं देते तो चिकित्सक मरीज का सिटी स्कैन करवाने की सलाह देते हैं। जिसके लिए मरीज को पांच हजार तक का खर्च उठाना पड़ता है।
- नाक में फंगस के लक्षण या तरल पदार्थ दिखने पर एंडो स्कोप के माध्यम से जांच की जाती है। भिवानी सामान्य अस्पताल में यह सुविधा नहीं है।
जिले में ब्लैक फंगस की स्थिति
जिले में म्यूकरमाइकोसिस के अब तक 32 केस सामने आ चुके हैं। जिनमें से चार की मौत हो गई और तीन केस ठीक हो चुके हैं। बाकी 24 केस अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और पीजीआईएमएस रोहतक में उपचाराधीन हैं। इसके अलावा एक केस फंगस के साथ ही कोरोना संक्रमित था, जिसकी कोरोना की वजह से मौत हो गई। जिले में दस के करीब फंगस के आशंकित केस हैं, जिनके टेस्ट किए जा रहे हैं।
ये बोले मरीज के परिजन
इस संबंध में ब्लैक फंगस के मरीज के परिजनों ने बताया कि शुरुआत में जांच के लिए जिला सामान्य अस्पताल पहुंचे थे। जहां चिकित्सक द्वारा करवाए टेस्ट के लिए काफी पैसे देने पड़े थे। शुरू में तो दवा पर भी काफी पैसे खर्च हुए, फिर चिकित्सकों ने परामर्श दिया कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में इसके उपचार की व्यवस्था की गई है। वहां ऑपरेशन से पहले ही मरीज की मौत हो गई थी। तो ऑपरेशन के खर्च की पुष्टि नहीं हो पाई कि पैसे लगते हैं या नहीं। मगर इसके टेस्ट महंगे हैं तो आम आदमी के लिए सरकार द्वारा व्यवस्था करनी चाहिए।
वर्जन::
स्वास्थ्य महानिदेशालय की गाइडलाइन के अनुसार जिला सामान्य अस्पताल में मरीज की जांच कर फंगस की पुष्टि होने पर उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज या पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया जा रहा है। अभी टेस्ट के बारे कोई सूचना नहीं आई है। स्वास्थ्य महानिदेशालय से जो भी सूचना प्राप्त होगी वो तुरंत प्रभाव से लागू की जाएगी।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन
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ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर कई लोग तो यह टेस्ट करवा ही नहीं पाते हैं। टेस्ट के बाद अगर ब्लैक फंगस की पुष्टि होती है तो मरीज पर दवा और उपचार का भी अतिरिक्त भार रहता है। जिला स्तर पर इसके उपचार की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीज को पीजीआईएमएस रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है। अगर वह निजी अस्पताल से उपचार लेता है तो उपचार का खर्च अधिक हो जाता है।
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ये टेस्ट करवाए जाते हैं
- अगर किसी में फंगस के प्राथमिक लक्षण जैसे : आंखों में सूजन, लाली, नाक, गाल पर सूजन, ब्रेन में दिक्कत और अधिक सिर दर्द है तो चिकित्सक मरीज की एमआरआई का परामर्श देते हैं। एमआरआई के लिए शुरुआती शुल्क छह हजार से साढ़े आठ हजार रुपये तक का है। साथ ही फंगस के टेस्ट का पूरा पैकेज दस हजार रुपये है।
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- अगर फंगस के लक्षण शरीर पर बाहर की ओर दिखाई नहीं देते तो चिकित्सक मरीज का सिटी स्कैन करवाने की सलाह देते हैं। जिसके लिए मरीज को पांच हजार तक का खर्च उठाना पड़ता है।
- नाक में फंगस के लक्षण या तरल पदार्थ दिखने पर एंडो स्कोप के माध्यम से जांच की जाती है। भिवानी सामान्य अस्पताल में यह सुविधा नहीं है।
जिले में ब्लैक फंगस की स्थिति
जिले में म्यूकरमाइकोसिस के अब तक 32 केस सामने आ चुके हैं। जिनमें से चार की मौत हो गई और तीन केस ठीक हो चुके हैं। बाकी 24 केस अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और पीजीआईएमएस रोहतक में उपचाराधीन हैं। इसके अलावा एक केस फंगस के साथ ही कोरोना संक्रमित था, जिसकी कोरोना की वजह से मौत हो गई। जिले में दस के करीब फंगस के आशंकित केस हैं, जिनके टेस्ट किए जा रहे हैं।
ये बोले मरीज के परिजन
इस संबंध में ब्लैक फंगस के मरीज के परिजनों ने बताया कि शुरुआत में जांच के लिए जिला सामान्य अस्पताल पहुंचे थे। जहां चिकित्सक द्वारा करवाए टेस्ट के लिए काफी पैसे देने पड़े थे। शुरू में तो दवा पर भी काफी पैसे खर्च हुए, फिर चिकित्सकों ने परामर्श दिया कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में इसके उपचार की व्यवस्था की गई है। वहां ऑपरेशन से पहले ही मरीज की मौत हो गई थी। तो ऑपरेशन के खर्च की पुष्टि नहीं हो पाई कि पैसे लगते हैं या नहीं। मगर इसके टेस्ट महंगे हैं तो आम आदमी के लिए सरकार द्वारा व्यवस्था करनी चाहिए।
वर्जन::
स्वास्थ्य महानिदेशालय की गाइडलाइन के अनुसार जिला सामान्य अस्पताल में मरीज की जांच कर फंगस की पुष्टि होने पर उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज या पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया जा रहा है। अभी टेस्ट के बारे कोई सूचना नहीं आई है। स्वास्थ्य महानिदेशालय से जो भी सूचना प्राप्त होगी वो तुरंत प्रभाव से लागू की जाएगी।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन