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दो माह में 15 डॉक्टर हुए कम

Sat, 20 Aug 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 20 Aug 2016 12:37 AM IST
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युवा चिकित्सकों को भिवानी स्वास्थ्य विभाग रास नहीं आ रहा है। सामान्य अस्पताल ही नहीं विभिन्न सीएचसी, पीएचसी से भी युवा चिकित्सक लंबी छुट्टी लेकर या ट्रांसफर लेकर जा रहे हैं। सामान्य अस्पताल के आठ मेडिकल ऑफिसर तो गैरहाजिर चल रहे हैं। दो माह में करीब 15 डॉक्टर कम हो गए हैं। डॉक्टर कम होने का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ज्यादा हालात इमरजेंसी में खराब है। यहां मरीजों की भारी भीड़ रहती है। एक समय में एक ही चिकित्सक होता है, जिसे न केवल मरीजों की जांच करनी होती है बल्कि एमएलआर भी काटनी होती है। पुलिस द्वारा लाए आरोपियों का भी मेडिकल करना होता है।
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आठ गैर हाजिर, तीन अवैतनिक अवकाश पर
सामान्य अस्पताल में सेवाओं के हालात बदतर हैं। यहां नेत्र रोग विभाग, सर्जन, फिजिशियन, बाल रोग विभाग में एक-एक विशेषज्ञ हैं तो स्त्री रोग विभाग, हड्डी रोग विभाग में दो-दो। बाकी स्वास्थ्य सेवाएं मेडिकल ऑफिसर पर निर्भर है। सामान्य अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के 50 पद स्वीकृत हैं मगर कार्यरत हैं महज 20। सामान्य अस्पताल के आठ डाक्टर गैर हाजिर चल रहे हैं, उनके आने की संभावना न के बराबर है। एक डॉक्टर ने सीधे ही रिजाइन दे दिया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़ में रिजाइन लेटर पेंडिंग है। एक डॉक्टर ने पिछले दिनों ट्रांसफर करवा लिया है। तीन डॉक्टर डॉ. नीरज, डॉ. अमित और डॉ. साहिल पिछले दो-तीन महीने से ईओएल (अवैतनिक) अवकाश लिया है। एक डॉक्टर पीजी करने के लिए अवकाश पर हैं। इतने डॉक्टर कम होने का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। सामान्य अस्पताल में मरीजों की भीड़ को संभालने के लिए एक-एक डाक्टर है। ज्यादा हालात इमरजेंसी में खराब है। रात के समय तो मरीजों की भीड़ इमरजेंसी में लग जाती है। डॉक्टर एक होता है। उसे ही न केवल मरीजों की जांच करनी होती है बल्कि एमएलआर काटने, हादसों, लड़ाई-झगड़ों में घायल मरीजों का इलाज और पुलिस की तरफ से लाए जाने वाले अपराधियों की मेडिकल जांच भी करनी होती है।
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43 फीसदी डाक्टर, उनमें से भी छह गए पीजी करने
सामान्य अस्पताल के अलावा यदि जिले की अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की बात की जाए तो हालात खराब हैं। जिलेभर में सामान्य अस्पताल को छोड़कर अन्य सब अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी पर मेडिकल ऑफिसर के 153 पद स्वीकृत हैं। जरूरत सवा दो सौ से भी अधिक है। इन 153 स्वीकृत पदों की जगह महज 66 ही कार्यरत हैं जबकि 87 पद रिक्त हैं। यानी स्वीकृत पदों पर भी महज 43 फीसदी डॉक्टर हैं। इनमें से छह डॉक्टर पीजी करने के लिए छुट्टी पर गए हैं। यहां एसएमओ के नौ पद स्वीकृत हैं मगर कार्यरत हैं महज तीन। दादरी अस्पताल, तोशाम और किशनलाल जालान अस्पताल में। डिप्टी सिविल सर्जन के आठ पद स्वीकृत हैं इनमें से महज तीन ही भरे हैं। पांच रिक्त पड़े हैं।  
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पीजी मतलब आने की संभावना नहीं
भले ही चिकित्सक आगे की पढ़ाई (पीजी) करने के लिए लंबी छुट्टी पर जाते हैं मगर स्वास्थ्य विभाग की कहावत है कि पीजी करने गया डॉक्टर मतलब छोड़ गया। अब आने की संभावना नहीं। ऐसे में पीजी करने गए या बिना बताए गैर हाजिर चल रहे डॉक्टरों के वापसी की संभावनाएं न के बराबर है।

वर्कलोड फुल, टेंशन फुल, वेतन कम कैसे करें काम
युवा चिकित्सकों के समक्ष अनेक समस्याएं हैं। एक चिकित्सक ने बताया कि सिविल अस्पताल हो या सीएचसी-पीएचसी। वर्कलोड बहुत ज्यादा है। इमरजेंसी में एक चिकित्सक को दो से अधिक मरीज एक शिफ्ट में देखने होते हैं। मरीजों की भीड़ में हर तरह के लोग आते हैं। कुछ गाली गलौच करते हैं तो कुछ जगह-जगह से फोन करवाते हैं। डॉक्टर ड्यूटी के दौरान पानी पीने तक नहीं जा सकता। वर्कलोड, टेंशन फुल रहती है और वेतन प्राइवेट अस्पतालों से भी कम। ऐसे में युवा डॉक्टर बड़े-बड़े प्राइवेट अस्पतालों को तरजीह देते हैं।


प्रदेशभर में ही डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। युवा डॉक्टर हर तरह की सुविधाएं चाहते हैं। इसलिए बड़े महानगरों में काम करना ज्यादा बेहतर समझते हैं। भिवानी जिले में वर्कलोड रहता है फिर भी हमारा प्रयास रहता है कि युवा चिकित्सकों के साथ तालमेल कर उनकी छोटी-छोटी समस्याओं को दूर कर उन्हें यहां बनाए रखें।  - डॉ. हेमंत, कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल

 
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