{"_id":"574359814f1c1bb215691984","slug":"bhiwani-news-morchery-dead-body-live-hours-fifteen","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोर्चरी में रखे शव को 15 घंटे बाद जिंदा बताने पर हड़कंप ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोर्चरी में रखे शव को 15 घंटे बाद जिंदा बताने पर हड़कंप
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Tue, 24 May 2016 12:57 AM IST
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शव
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार शाम गांव कारीमोद के पास सड़क हादसे में मारी गईं महिला के जिंदा होने को लेकर सोमवार को उस समय सस्पेंस व हंगामा खड़ा हो गया, जब परिजन यह कहते हुए मोर्चरी से शव उठाकर इमरजेंसी ले आए कि वह मरी नहीं, उसकी सांस चल रही हैं। परिजनों की इस बात से सकपकाए डाक्टरों ने दोबारा मेडिकल जांच की और उसे मृत बताया। परिजन फिर भी संतुष्ट नहीं हुए और किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाने पर अड़ गए। परिजनों ने चिकित्सकों पर कागजों को हेर-फेर करने के आरोप भी लगाए। करीब दो घंटे की मान-मनौव्वल और चिकित्सकों के बोर्ड से पोस्टमार्टम कराए जाने की बात पर परिजन शव के पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए।
बहल में गारमेंट शॉप पर नौकरी करने वाले रविकांत रविवार शाम नारनौल नगर परिषद चुनाव में वोट डालकर लौट रहे थे। जिले के कारीमोद गांव के पास बाइक चालक को बचाने के फेर में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में रविकांत और उनकी पत्नी मोनिका को गंभीर चोट लगी। रविकांत की माता स्नेहलता व बेटा ऋषभ हल्की चोट आई। जिला अस्पताल में मोनिका को मृत घोषित कर दिया और शव मोर्चरी में रखवा दिया।
हादसे की सूचना के बाद मोनिका के माता-पिता पूना से सोमवार सुबह जिला अस्पताल में पहुंचे और बेटी का शव देखने की इच्छा जाहिर की। सुबह आठ के करीब पिता ईश्वर व माता तारा देवी ने बेटी का शव देखते ही बोले कि वह जिंदा है। कहा, उनके सामने बेटी की आंखों से आंसू निकले हैं। आनन-फानन में माता-पिता मोनिका के शव को स्ट्रेचर में डालकर इमरजेंसी ले आए। चिकित्सक ने जांच करने के बाद फिर उसे मृत बताया। लेकिन, परिजन नहीं माने। तारादेवी ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों ने रविवार शाम डेड घोषित किया था, तब साइन तो करा लिए, लेकिन कागज दिया नहीं। सुबह दूसरे कागज तैयार किए हैं। ईसीजी की रिपोर्ट को लेकर भी उन्हें संदेह है। उन्हें शक है कि मोनिका की मौत चिकित्सकों की लापरवाही की वजह से हुई है। तारा देवी ने मोनिका को प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की मांग की।
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इसी दौरान पीएमओ रघवीर शांडिल्य इमरजेंसी पहुंचे और मोनिका की देह की जांच की। उन्होंने भी मौत की पुष्टि की। चिकित्सकों ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। सीएमओ रणदीप पूनिया ने परिजनों को समझाया और आश्वासन दिया कि शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के बोर्ड से कराया जाएगा। इसके बाद परिजन कुछ नरम पड़े और पोस्टमार्टम कराए जाने को तैयार हुए।
रविकांत के सिर में आए 32 टांके
मोनिका के पति रविकांत हादसे में गंभीर रूप से जख्मी हुए। उनके सिर में 32 टांके आए। रविकांत की माता स्नेहलता व बेटे ऋषभ को मामूली चोट लगी। कार ड्राइवर बाल-बाल बच गया।
तीन डाक्टरों की जांच कमेटी बनाई
सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे मामले जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। पीएमओ रघवीर शांडिल्य, डॉ. एसएस धनखड़ व डॉ. अनीता गुलिया इस मामले की जांच करेंगी। सीएमओ डॉ. रणदीप पूनिया ने बताया कि इस मामले को हम गंभीरता से ले रहे हैं। तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देगी।
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बहल में गारमेंट शॉप पर नौकरी करने वाले रविकांत रविवार शाम नारनौल नगर परिषद चुनाव में वोट डालकर लौट रहे थे। जिले के कारीमोद गांव के पास बाइक चालक को बचाने के फेर में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में रविकांत और उनकी पत्नी मोनिका को गंभीर चोट लगी। रविकांत की माता स्नेहलता व बेटा ऋषभ हल्की चोट आई। जिला अस्पताल में मोनिका को मृत घोषित कर दिया और शव मोर्चरी में रखवा दिया।
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हादसे की सूचना के बाद मोनिका के माता-पिता पूना से सोमवार सुबह जिला अस्पताल में पहुंचे और बेटी का शव देखने की इच्छा जाहिर की। सुबह आठ के करीब पिता ईश्वर व माता तारा देवी ने बेटी का शव देखते ही बोले कि वह जिंदा है। कहा, उनके सामने बेटी की आंखों से आंसू निकले हैं। आनन-फानन में माता-पिता मोनिका के शव को स्ट्रेचर में डालकर इमरजेंसी ले आए। चिकित्सक ने जांच करने के बाद फिर उसे मृत बताया। लेकिन, परिजन नहीं माने। तारादेवी ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों ने रविवार शाम डेड घोषित किया था, तब साइन तो करा लिए, लेकिन कागज दिया नहीं। सुबह दूसरे कागज तैयार किए हैं। ईसीजी की रिपोर्ट को लेकर भी उन्हें संदेह है। उन्हें शक है कि मोनिका की मौत चिकित्सकों की लापरवाही की वजह से हुई है। तारा देवी ने मोनिका को प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की मांग की।
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इसी दौरान पीएमओ रघवीर शांडिल्य इमरजेंसी पहुंचे और मोनिका की देह की जांच की। उन्होंने भी मौत की पुष्टि की। चिकित्सकों ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। सीएमओ रणदीप पूनिया ने परिजनों को समझाया और आश्वासन दिया कि शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के बोर्ड से कराया जाएगा। इसके बाद परिजन कुछ नरम पड़े और पोस्टमार्टम कराए जाने को तैयार हुए।
रविकांत के सिर में आए 32 टांके
मोनिका के पति रविकांत हादसे में गंभीर रूप से जख्मी हुए। उनके सिर में 32 टांके आए। रविकांत की माता स्नेहलता व बेटे ऋषभ को मामूली चोट लगी। कार ड्राइवर बाल-बाल बच गया।
तीन डाक्टरों की जांच कमेटी बनाई
सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे मामले जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। पीएमओ रघवीर शांडिल्य, डॉ. एसएस धनखड़ व डॉ. अनीता गुलिया इस मामले की जांच करेंगी। सीएमओ डॉ. रणदीप पूनिया ने बताया कि इस मामले को हम गंभीरता से ले रहे हैं। तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देगी।