{"_id":"6a91d7b61d089b05800cc397","slug":"nine-government-schools-in-bawani-khera-will-receive-special-academic-support-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-156169-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: बवानीखेड़ा के नौ सरकारी स्कूलों को मिलेगा विशेष शैक्षणिक सहयोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: बवानीखेड़ा के नौ सरकारी स्कूलों को मिलेगा विशेष शैक्षणिक सहयोग
विज्ञापन
बवानीखेड़ा। निपुण हरियाणा मिशन के तहत विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार के लिए खंड बवानीखेड़ा के नौ सरकारी स्कूलों का विशेष शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम के लिए चयन किया गया है। जिले के करीब 100 सरकारी विद्यालयों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है जिनमें बवानीखेड़ा खंड के ये नौ स्कूल भी हैं।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने कार्यक्रम के क्रियान्वयन और चयनित विद्यालयों की नियमित निगरानी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्यक्रम में राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला दुर्जनपुर, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला ढाणी यादव, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला ढुंढवा जोहड़, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला लोहारी जाटू, राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला जमालपुर, राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला पुर, राजकीय प्राथमिक पाठशाला किरावड़, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला बलियाली तथा राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला सुई को शामिल किया गया है।
इन विद्यालयों के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हर माह होगी स्कूलों की समीक्षा
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले में शैक्षणिक कोर टीम गठित की जाएगी। इसमें संबंधित समन्वयक, खंड शिक्षा अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और अन्य शैक्षणिक अधिकारी शामिल होंगे। टीम चयनित विद्यालयों का नियमित भ्रमण करेगी और निर्धारित मासिक कार्यक्रम के अनुसार उनकी शैक्षणिक स्थिति की समीक्षा करेगी।
विज्ञापन
मासिक बैठकों में विद्यार्थियों की प्रगति, छात्रवार एवं दक्षतावार स्थिति, उपस्थिति, उपचारात्मक शिक्षण, शिक्षक मार्गदर्शन, शैक्षणिक भ्रमण और कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता की समीक्षा की जाएगी। जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की प्रगति अपेक्षाकृत कम मिलेगी, वहां सुधारात्मक शैक्षणिक सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी।
तीन श्रेणियों में होगा विद्यालयों का आकलन
खंड शिक्षा अधिकारी सतेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग ने विद्यालयों को उनकी शैक्षणिक स्थिति के आधार पर उत्कृष्ट, विकासशील और गहन सहयोग की आवश्यकता वाले तीन वर्गों में रखने की व्यवस्था की है। गहन सहयोग की जरूरत वाले विद्यालयों में संरचित मार्गदर्शन, प्रदर्शन आधारित शिक्षण और लगातार शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षा विभाग की इस पहल से चयनित विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने तथा विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में अपेक्षित सुधार लाने की उम्मीद है। अधिकारियों की ओर से विद्यालयों की लगातार निगरानी किए जाने से शिक्षकों को बेहतर शैक्षणिक सहयोग मिलेगा। विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की स्थिति के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने कार्यक्रम के क्रियान्वयन और चयनित विद्यालयों की नियमित निगरानी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्यक्रम में राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला दुर्जनपुर, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला ढाणी यादव, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला ढुंढवा जोहड़, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला लोहारी जाटू, राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला जमालपुर, राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला पुर, राजकीय प्राथमिक पाठशाला किरावड़, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला बलियाली तथा राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला सुई को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
इन विद्यालयों के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हर माह होगी स्कूलों की समीक्षा
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले में शैक्षणिक कोर टीम गठित की जाएगी। इसमें संबंधित समन्वयक, खंड शिक्षा अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और अन्य शैक्षणिक अधिकारी शामिल होंगे। टीम चयनित विद्यालयों का नियमित भ्रमण करेगी और निर्धारित मासिक कार्यक्रम के अनुसार उनकी शैक्षणिक स्थिति की समीक्षा करेगी।
विज्ञापन
मासिक बैठकों में विद्यार्थियों की प्रगति, छात्रवार एवं दक्षतावार स्थिति, उपस्थिति, उपचारात्मक शिक्षण, शिक्षक मार्गदर्शन, शैक्षणिक भ्रमण और कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता की समीक्षा की जाएगी। जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की प्रगति अपेक्षाकृत कम मिलेगी, वहां सुधारात्मक शैक्षणिक सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी।
तीन श्रेणियों में होगा विद्यालयों का आकलन
खंड शिक्षा अधिकारी सतेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग ने विद्यालयों को उनकी शैक्षणिक स्थिति के आधार पर उत्कृष्ट, विकासशील और गहन सहयोग की आवश्यकता वाले तीन वर्गों में रखने की व्यवस्था की है। गहन सहयोग की जरूरत वाले विद्यालयों में संरचित मार्गदर्शन, प्रदर्शन आधारित शिक्षण और लगातार शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षा विभाग की इस पहल से चयनित विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने तथा विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में अपेक्षित सुधार लाने की उम्मीद है। अधिकारियों की ओर से विद्यालयों की लगातार निगरानी किए जाने से शिक्षकों को बेहतर शैक्षणिक सहयोग मिलेगा। विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की स्थिति के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।