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भिवानी का पोता असम में बना विधायक
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Sat, 21 May 2016 12:43 AM IST
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अासाम
- फोटो : अमर उजाला
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असम के चुनावी नतीजों के बाद जिले के गांव नकीपुर के लोग खुश हैं। उनके गांव का पोता असम में विधायक बना है। असम के ढेकिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए अशोक सिंघल के दादा नकीपुर में रहते थे। बाद में व्यवसाय के सिलसिले असम चले गए और वहीं बस गए। सिंघल परिवार साल-दो साल में अपने पैतृक गांव आते रहते हैं।
अशोक के भाजपा से विधायक चुने जाने की खबर इलाके के लोगों को मिली तो गदगद हो उठे। अशोक सिंघल लगभग 35 हजार मतों से चुनाव जीते। लोहारू पंचायत समिति के चेयरमैन नंदलाल मतानीवाला, भाजपा नेता कमलेश भोडूका, विजय शेखावत आदि ने फोन कर अशोक सिंघल को जीत की बधाई दी। सिंघल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनके दादा हरदेव दास 1955 में व्यापार के सिलसिले में नकीपुर गांव से असम आ गए थे। असम में ही उनके पिता का जन्म हुआ। उनके पिता परमानंद सिंघल का कपड़े का व्यापार है। साल-दो साल में उनका पैतृक गांव में आना रहता है। जब भी सालासर, बालाजी धाम व नकीपुर पहाड़ी माता मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होता है, वे अक्सर आते हैं। अब तक दो बार चुनाव लड़ चुके अशोक सिंघल का परिवार लगभग 50 साल से आरएसएस से जुड़ा है। वे खुद जन्म से आरएसएस से जुड़े हैं। देश में इमरजेंसी के वक्त मीसा के तहत 1975 से 77 तक अशोक के पिता जेल में रह चुके हैं।
जनता ने कांग्रेस से मुक्ति चाही, इसलिए भाजपा को जिताया
भाजपा विधायक सिंघल ने कहा कि असम की जनता कांग्रेस से मुक्ति चाहती थी, इसलिए भाजपा को जनता ने जिताया। असम को बचाना है... चुनाव में केवल यही एक मुद्दा था। भाजपा की सरकार बन गई है। अब वहां काम करेंगे। कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। मंत्री बनने के अवसर के बारे में उन्होंने कहा कि मंत्री की सोच नहीं है। मंत्री, एमएलए, वर्कर सब बराबर हैं। टीम भावना से काम करना है। फिर भी पार्टी कोई जिम्मेदारी देती है, वे तैयार हैं।
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अशोक के भाजपा से विधायक चुने जाने की खबर इलाके के लोगों को मिली तो गदगद हो उठे। अशोक सिंघल लगभग 35 हजार मतों से चुनाव जीते। लोहारू पंचायत समिति के चेयरमैन नंदलाल मतानीवाला, भाजपा नेता कमलेश भोडूका, विजय शेखावत आदि ने फोन कर अशोक सिंघल को जीत की बधाई दी। सिंघल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनके दादा हरदेव दास 1955 में व्यापार के सिलसिले में नकीपुर गांव से असम आ गए थे। असम में ही उनके पिता का जन्म हुआ। उनके पिता परमानंद सिंघल का कपड़े का व्यापार है। साल-दो साल में उनका पैतृक गांव में आना रहता है। जब भी सालासर, बालाजी धाम व नकीपुर पहाड़ी माता मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होता है, वे अक्सर आते हैं। अब तक दो बार चुनाव लड़ चुके अशोक सिंघल का परिवार लगभग 50 साल से आरएसएस से जुड़ा है। वे खुद जन्म से आरएसएस से जुड़े हैं। देश में इमरजेंसी के वक्त मीसा के तहत 1975 से 77 तक अशोक के पिता जेल में रह चुके हैं।
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जनता ने कांग्रेस से मुक्ति चाही, इसलिए भाजपा को जिताया
भाजपा विधायक सिंघल ने कहा कि असम की जनता कांग्रेस से मुक्ति चाहती थी, इसलिए भाजपा को जनता ने जिताया। असम को बचाना है... चुनाव में केवल यही एक मुद्दा था। भाजपा की सरकार बन गई है। अब वहां काम करेंगे। कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। मंत्री बनने के अवसर के बारे में उन्होंने कहा कि मंत्री की सोच नहीं है। मंत्री, एमएलए, वर्कर सब बराबर हैं। टीम भावना से काम करना है। फिर भी पार्टी कोई जिम्मेदारी देती है, वे तैयार हैं।
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