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दिवाली की छुट्टी गई नर्सिंग स्टूडेंट नहीं लौटी, स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2016 10:50 PM IST
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hospital
भिवानी।
दीपावली की छुट्टी गई 120 नर्सिंग स्टूडेंट के न लौटने की वजह से इमरजेंसी समेत जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा बुरी तरीके से प्रभावित दिखी। दो सौ मरीजों की तीमारदारी केवल दो नर्स के आसरे रही।
इंजेक्शन और मरहम पट्टी के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। दर्द से कराह रहे मरीजों को भी समय पर उपचार नहीं मिल सका।
इलाज और तीमारदारी में स्टाफ नर्सों की मदद करने वाली एएनएम, जीएनएम दीपावली पर छुट्टी गई, मगर दो दिन बाद भी नहीं लौटीं। जबकि, मंगलवार को भी इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ उमड़ी। ओपीडी की छुट्टी होने के कारण इमरजेंसी में ज्यादा मरीज पहुंचे। मगर इमरजेंसी में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। मंगलवार को सुबह से ही इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ ज्यादा रही और यहां सिर्फ दो ही स्टाफ नर्स थी। दो चिकित्सक मरीजों की जांच कर इंजेक्शन व दवाइयां लिख रहे थे मगर स्टाफ नर्स की मदद करने के लिए कोई ईएमटी या नर्सिंग स्टूडेंट्स नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। दोनों नर्स मरीजों को इंजेक्शन, दवाइयां, मरहम पट्टी करने के साथ-साथ रजिस्टर में एंट्री, कंप्यूटर में एंट्री करवा रही थी।
अस्पताल परिसर में ही चल रहे नर्सिंग कॉलेज में एएनएम और जीएनएम का कोर्स करवाया जाता है। जीएनएम के 20-20 के तीन बैच है जबकि एएनएम के 30-30 के दो। यानी करीब 120 नर्सिंग स्टूडेंट्स स्टाफ नर्सों की मदद के लिए रहती है।
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दो वार्डों की जिम्मेवारी एक नर्स के कंधे
वार्डों में और भी ज्यादा समस्या रही। सुबह के सत्र में तो सभी वार्डों में एक-एक नर्स रही मगर सायंकालीन शिफ्ट में एक-एक नर्स को दो-दो वार्डों की जिम्मेवारी दी गई। नर्सिंग स्टूडेंट्स नहीं होने के कारण मरीज व स्टाफ नर्स खासे परेशान दिखे। किसी को भी समय पर उपचार नहीं मिला।
ट्रीटमेंट स्लिप के लिए भी इंतजार
मरीज की पूरी जानकारी ऑन लाइन करने के लिए शुरू किया गया सिस्टम फिलहाल तो राहत कम आफत ज्यादा बना है। इमरजेंसी में दर्द से मरीज कराह रहे थे और इमरजेंसी की विंडो पर ट्रीटमेंट स्लिप नहीं बन रही थी। दरअसल प्रिंटर में आई खराबी के कारण ट्रीटमेंट स्लिप बनाने का काम बंद किया गया था। बाद में विशेषज्ञ को बुलाकर प्रिंटर ठीक करवाया गया और ट्रीटमेंट स्लिप बनाने का काम शुरू हुआ।
परेशानी मरीजों की जुबानी
कमल के आंतड़ियों में बहुत तेज दर्द हो रहा है। बेटा इलाज के लिए इमजरेंसी लाया है, मगर यहां कोई संभाल ही नहीं है मरीजों की।
लक्ष्मी, महिला मरीज
बिचला बाजार
छाती में दर्द उठा हुआ है। डाक्टर ने जांच करके पर्ची पर इलाज लिख दिया है। अब भीड़ ज्यादा है और इलाज मिल नहीं रहा। ईसीजी करवाने के लिए लिखा है तो यहां हो ही नहीं रही।
रणबीर सिंह, गांव दिनोद
स्टाफ नर्स की भारी कमी है। अब नर्सिंग स्टूडेंट्स के छुट्टी जाने के कारण भारी दिक्कतें आ रही है। सरकार से स्टाफ नर्स के रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग अनेक बार की गई। नर्सिंग कॉलेज स्टाफ को भी सभी स्टूडेंट्स को एक साथ छुट्टी नहीं देनी चाहिए थी।
सुनीता, जिला प्रधान
नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन
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दीपावली की छुट्टी गई 120 नर्सिंग स्टूडेंट के न लौटने की वजह से इमरजेंसी समेत जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा बुरी तरीके से प्रभावित दिखी। दो सौ मरीजों की तीमारदारी केवल दो नर्स के आसरे रही।
इंजेक्शन और मरहम पट्टी के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। दर्द से कराह रहे मरीजों को भी समय पर उपचार नहीं मिल सका।
इलाज और तीमारदारी में स्टाफ नर्सों की मदद करने वाली एएनएम, जीएनएम दीपावली पर छुट्टी गई, मगर दो दिन बाद भी नहीं लौटीं। जबकि, मंगलवार को भी इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ उमड़ी। ओपीडी की छुट्टी होने के कारण इमरजेंसी में ज्यादा मरीज पहुंचे। मगर इमरजेंसी में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। मंगलवार को सुबह से ही इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ ज्यादा रही और यहां सिर्फ दो ही स्टाफ नर्स थी। दो चिकित्सक मरीजों की जांच कर इंजेक्शन व दवाइयां लिख रहे थे मगर स्टाफ नर्स की मदद करने के लिए कोई ईएमटी या नर्सिंग स्टूडेंट्स नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। दोनों नर्स मरीजों को इंजेक्शन, दवाइयां, मरहम पट्टी करने के साथ-साथ रजिस्टर में एंट्री, कंप्यूटर में एंट्री करवा रही थी।
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अस्पताल परिसर में ही चल रहे नर्सिंग कॉलेज में एएनएम और जीएनएम का कोर्स करवाया जाता है। जीएनएम के 20-20 के तीन बैच है जबकि एएनएम के 30-30 के दो। यानी करीब 120 नर्सिंग स्टूडेंट्स स्टाफ नर्सों की मदद के लिए रहती है।
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दो वार्डों की जिम्मेवारी एक नर्स के कंधे
वार्डों में और भी ज्यादा समस्या रही। सुबह के सत्र में तो सभी वार्डों में एक-एक नर्स रही मगर सायंकालीन शिफ्ट में एक-एक नर्स को दो-दो वार्डों की जिम्मेवारी दी गई। नर्सिंग स्टूडेंट्स नहीं होने के कारण मरीज व स्टाफ नर्स खासे परेशान दिखे। किसी को भी समय पर उपचार नहीं मिला।
ट्रीटमेंट स्लिप के लिए भी इंतजार
मरीज की पूरी जानकारी ऑन लाइन करने के लिए शुरू किया गया सिस्टम फिलहाल तो राहत कम आफत ज्यादा बना है। इमरजेंसी में दर्द से मरीज कराह रहे थे और इमरजेंसी की विंडो पर ट्रीटमेंट स्लिप नहीं बन रही थी। दरअसल प्रिंटर में आई खराबी के कारण ट्रीटमेंट स्लिप बनाने का काम बंद किया गया था। बाद में विशेषज्ञ को बुलाकर प्रिंटर ठीक करवाया गया और ट्रीटमेंट स्लिप बनाने का काम शुरू हुआ।
परेशानी मरीजों की जुबानी
कमल के आंतड़ियों में बहुत तेज दर्द हो रहा है। बेटा इलाज के लिए इमजरेंसी लाया है, मगर यहां कोई संभाल ही नहीं है मरीजों की।
लक्ष्मी, महिला मरीज
बिचला बाजार
छाती में दर्द उठा हुआ है। डाक्टर ने जांच करके पर्ची पर इलाज लिख दिया है। अब भीड़ ज्यादा है और इलाज मिल नहीं रहा। ईसीजी करवाने के लिए लिखा है तो यहां हो ही नहीं रही।
रणबीर सिंह, गांव दिनोद
स्टाफ नर्स की भारी कमी है। अब नर्सिंग स्टूडेंट्स के छुट्टी जाने के कारण भारी दिक्कतें आ रही है। सरकार से स्टाफ नर्स के रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग अनेक बार की गई। नर्सिंग कॉलेज स्टाफ को भी सभी स्टूडेंट्स को एक साथ छुट्टी नहीं देनी चाहिए थी।
सुनीता, जिला प्रधान
नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन