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सावधान ! कहीं गला न काट दे चाइनीज मांझा
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 19 Aug 2016 12:20 AM IST
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चाइनीज मांझा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिल्ली में दो मासूम समेत चार का गला काटकर मौत की नींद सुलाने वाले चाइनीज मांझे की बिक्री पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की आवाज उठने लगी है। इस जानलेवा चाइनीज मांझे पर अरसे से प्रतिबंध लगा है लेकिन शहर में इस मौत के सामान की खुलेआम बिक्री हो रही है और प्रशासन बेखबर है। पुलिस विभाग के अधिकारियों के पास हर साल इसकी बिक्री रोकने के लिए निर्देश आते है मगर पुलिस ने आज तक भी किसी दुकान पर न जांच की और न ही चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि पिछले तीन साल से मार्केट में चाइनीज मांझे की भरमार है। धागे में कांच पाउडर मिलाने की वजह से पतंगबाजी के दौरान पेच लड़ाने में यह काफी मजबूत माना जाता है, इसलिए चाइनीज मांझे की ज्यादा डिमांड है। अमर उजाला टीम ने शहर की चार प्रमुख पतंग-मांझा बेचने वाली दुकानों पर जाकर पड़ताल की तो पाया कि अधिकतर चाइनीज मांझा ही बेच रहे हैं। चारों दुकानदारों से चाइनीज मांझे की मांग की तो आसानी से मिल गया। दुकानों पर मांझा सात-आठ रंगों में उपलब्ध है।
दो सौ से 250 रुपये प्रति हजार गज मिला है चाइनीज मांझा
बाजार में चाइनीज मांझा साधारण धागे वाले मांझे से काफी महंगा है। चाइनीज मांझा दो सौ से 250 रुपये प्रति हजार गज के हिसाब से मिलता है जबकि साधारण धागे वाला माला 150 रुपये हजार गज तक मिल जाता है। दुकानदार अपने थोड़े से फायदे के लिए चाइनीज मांझे के नुकसान को जानते हुए भी बेच रहे हैं।
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डिमांड है इसकी है, क्या करें
एक दुकानदार ने बताया कि बाजार में चाइनीज मांझे की ही मांग है। हर कोई यही खरीदता है। चाइनीज मांझा नाम से बिकता है। अगर दूसरा मांझा दे तो बच्चे, युवा खरीदते ही नहीं। मांग होने के कारण दुकानदार भी इसी की बिक्री कर रहे है।
खुलेआम बिक्री, रोके कौन
प्रतिबंधित होने के बावजूद शहर में भले ही चाइनीज मांझा की बिक्री खुलेआम हो रही है मगर इन्हें रोके कौन। कौन इनके खिलाफ कार्रवाई करे। यह किसी को नहीं पता। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस बारे में कोई गाइड लाइन नहीं। उन्हें कैसे पता लगेगा कि यह प्रतिबंधित चाइनीज मांझा है। वहीं नप अधिकारी मामले में अपना पल्ला झाड़ रहे है।
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अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि पिछले तीन साल से मार्केट में चाइनीज मांझे की भरमार है। धागे में कांच पाउडर मिलाने की वजह से पतंगबाजी के दौरान पेच लड़ाने में यह काफी मजबूत माना जाता है, इसलिए चाइनीज मांझे की ज्यादा डिमांड है। अमर उजाला टीम ने शहर की चार प्रमुख पतंग-मांझा बेचने वाली दुकानों पर जाकर पड़ताल की तो पाया कि अधिकतर चाइनीज मांझा ही बेच रहे हैं। चारों दुकानदारों से चाइनीज मांझे की मांग की तो आसानी से मिल गया। दुकानों पर मांझा सात-आठ रंगों में उपलब्ध है।
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दो सौ से 250 रुपये प्रति हजार गज मिला है चाइनीज मांझा
बाजार में चाइनीज मांझा साधारण धागे वाले मांझे से काफी महंगा है। चाइनीज मांझा दो सौ से 250 रुपये प्रति हजार गज के हिसाब से मिलता है जबकि साधारण धागे वाला माला 150 रुपये हजार गज तक मिल जाता है। दुकानदार अपने थोड़े से फायदे के लिए चाइनीज मांझे के नुकसान को जानते हुए भी बेच रहे हैं।
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डिमांड है इसकी है, क्या करें
एक दुकानदार ने बताया कि बाजार में चाइनीज मांझे की ही मांग है। हर कोई यही खरीदता है। चाइनीज मांझा नाम से बिकता है। अगर दूसरा मांझा दे तो बच्चे, युवा खरीदते ही नहीं। मांग होने के कारण दुकानदार भी इसी की बिक्री कर रहे है।
खुलेआम बिक्री, रोके कौन
प्रतिबंधित होने के बावजूद शहर में भले ही चाइनीज मांझा की बिक्री खुलेआम हो रही है मगर इन्हें रोके कौन। कौन इनके खिलाफ कार्रवाई करे। यह किसी को नहीं पता। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस बारे में कोई गाइड लाइन नहीं। उन्हें कैसे पता लगेगा कि यह प्रतिबंधित चाइनीज मांझा है। वहीं नप अधिकारी मामले में अपना पल्ला झाड़ रहे है।