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घरों में पूजा के लिए शाम 06:13 से रात 08:09 बजे तक शुभ मुहूर्त
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दीपावली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति की खरीदारी करती महिला। संवाद
- फोटो : Bhiwani
तोशाम (भिवानी)। दीपों का पर्व दीपावली कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि को वीरवार को मनाया जा रहा है। दीपावली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश के साथ कुबेर की पूजा की जाएगी। पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया दीपावली के दिन धन की अधिष्ठात्री देवी की पूजा होती है। दीपावली पर्व पर ग्रह-गोचरों का भी शुभ संयोग बना है। घरों में पूजा के लिए शाम 06:13 से रात 08:09 बजे तक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त है।
दीपावली पर एक ही राशि में चार ग्रहों के होने से चतुर्ग्रही योग व महालक्ष्मी योग का दुर्लभ संयोग बना है। दोनों योग दीपावली के मौके पर पूरे दिन और रात रहेंगे। ऐसे में श्रद्धालु मां लक्ष्मी, भगवान गणेश व कुबेर की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। दीपावली पर एक ही राशि में चार ग्रह सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा होने से दीपावली का दिन बेहद खास है। चतुर्ग्रही योग के साथ महालक्ष्मी योग का निर्माण चंद्र एवं मंगल के साथ मिलने से बन रहा है।
लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल सबसे बेहतर
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि अमावस्या तिथि का आरंभ चार नवंबर को सुबह 6:03 बजे से पांच नवंबर रात्रि 2:44 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। स्थिर लग्न सिंह लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से लक्ष्मी स्थिर होती हैं। दीपावली के दिन ही मां काली की पूजा होती है। मां काली की पूजा निशीथ काल में करना श्रेयस्कर है।
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घर और प्रतिष्ठान में पूजन का मुहूर्त
लाभ चौघड़िया : सुबह 12:09 से दोपहर 1:31बजे तक।
अमृत : दोपहर 1:31 बजे से दोपहर 2:53बजे तक।
शुभ चौघड़िया : दोपहर बाद 04:15 से सायं 5:37 बजे तक।
कुंभ लग्न: दोपहर 1:24 से दोपहर 2:53 बजे तक (स्थिर लग्न)
प्रदोष काल : शाम 5:39 से रात 08:15 बजे तक।
वृषभ लग्न : शाम 06:13 से रात 08:09 बजे (घर में पूजा के लिए)
सिंह लग्न : रात्रि 12:44 से रात्रि 03: 02 बजे (ईष्ट साधना सिद्धि के लिए)
महानिशिथ काल : रात्रि 11:44 से 12:36 बजे तक (काली पूजा और तांत्रिक पूजा के लिए )
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दीपावली पर एक ही राशि में चार ग्रहों के होने से चतुर्ग्रही योग व महालक्ष्मी योग का दुर्लभ संयोग बना है। दोनों योग दीपावली के मौके पर पूरे दिन और रात रहेंगे। ऐसे में श्रद्धालु मां लक्ष्मी, भगवान गणेश व कुबेर की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। दीपावली पर एक ही राशि में चार ग्रह सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा होने से दीपावली का दिन बेहद खास है। चतुर्ग्रही योग के साथ महालक्ष्मी योग का निर्माण चंद्र एवं मंगल के साथ मिलने से बन रहा है।
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लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल सबसे बेहतर
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि अमावस्या तिथि का आरंभ चार नवंबर को सुबह 6:03 बजे से पांच नवंबर रात्रि 2:44 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। स्थिर लग्न सिंह लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से लक्ष्मी स्थिर होती हैं। दीपावली के दिन ही मां काली की पूजा होती है। मां काली की पूजा निशीथ काल में करना श्रेयस्कर है।
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घर और प्रतिष्ठान में पूजन का मुहूर्त
लाभ चौघड़िया : सुबह 12:09 से दोपहर 1:31बजे तक।
अमृत : दोपहर 1:31 बजे से दोपहर 2:53बजे तक।
शुभ चौघड़िया : दोपहर बाद 04:15 से सायं 5:37 बजे तक।
कुंभ लग्न: दोपहर 1:24 से दोपहर 2:53 बजे तक (स्थिर लग्न)
प्रदोष काल : शाम 5:39 से रात 08:15 बजे तक।
वृषभ लग्न : शाम 06:13 से रात 08:09 बजे (घर में पूजा के लिए)
सिंह लग्न : रात्रि 12:44 से रात्रि 03: 02 बजे (ईष्ट साधना सिद्धि के लिए)
महानिशिथ काल : रात्रि 11:44 से 12:36 बजे तक (काली पूजा और तांत्रिक पूजा के लिए )