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Bhiwani News: आषाढ़ गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से शुरू
Sun, 12 Jul 2026 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 12 Jul 2026 02:14 AM IST
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ढिगावामंडी। हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व है। हर साल चार बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। चैत्र और आश्विन मास के अतिरिक्त आषाढ़ और माघ माह में भी गुप्त नवरात्र होते हैं। ये विशेष कामनाओं की सिद्धि के लिए मनाए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य रविंद्र शास्त्री ने बताया कि इस बार आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से प्रारंभ होंगे। नवमी तिथि को इनका समापन होगा।
इन नवरात्र के दौरान चतुर्थी तिथि शुक्रवार को क्षय रहेगी। नवमी तिथि में वृद्धि रहेगी और यह 22 तथा 23 जुलाई को रहेगी। इन नवरात्रों में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
गुप्त नवरात्र में पूजा को गुप्त रखा जाता है। साधना जितनी गुप्त होती है उसका फल उतना ही अधिक मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा के साधनाकाल में जप, तप, अनुष्ठान और साधना गुप्त तरीके से करने पर मनुष्य को जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है।
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पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य रविंद्र शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में की जाती है। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:15 बजे से सुबह 9:05 बजे तक रहेगा। यदि इस समय कलश स्थापना न हो पाए तो इसके बाद शुभ का चौघड़िया सुबह 10:50 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। 15 जुलाई को बुधवार होने के कारण अभिजीत मुहूर्त नहीं आएगा।
नौका पर सवार होकर आएंगी माता
नवरात्र में माता दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व होता है। वैसे तो माता का वाहन शेर है परंतु नवरात्र में माता का वाहन वार के हिसाब से होता है। बुधवार से नवरात्र की शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है। कृषि के लिए इसे विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि माता का नौका पर आगमन भक्तों के कष्ट दूर करने के साथ खुशहाली का संदेश देता है।
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इन नवरात्र के दौरान चतुर्थी तिथि शुक्रवार को क्षय रहेगी। नवमी तिथि में वृद्धि रहेगी और यह 22 तथा 23 जुलाई को रहेगी। इन नवरात्रों में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
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गुप्त नवरात्र में पूजा को गुप्त रखा जाता है। साधना जितनी गुप्त होती है उसका फल उतना ही अधिक मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा के साधनाकाल में जप, तप, अनुष्ठान और साधना गुप्त तरीके से करने पर मनुष्य को जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है।
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पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य रविंद्र शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में की जाती है। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:15 बजे से सुबह 9:05 बजे तक रहेगा। यदि इस समय कलश स्थापना न हो पाए तो इसके बाद शुभ का चौघड़िया सुबह 10:50 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। 15 जुलाई को बुधवार होने के कारण अभिजीत मुहूर्त नहीं आएगा।
नौका पर सवार होकर आएंगी माता
नवरात्र में माता दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व होता है। वैसे तो माता का वाहन शेर है परंतु नवरात्र में माता का वाहन वार के हिसाब से होता है। बुधवार से नवरात्र की शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है। कृषि के लिए इसे विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि माता का नौका पर आगमन भक्तों के कष्ट दूर करने के साथ खुशहाली का संदेश देता है।