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तीर्थ यात्रा बन गया अंतिम सफर: वृंदावन नाव हादसे में भिवानी की आशा मिड्ढा की मौत, भाभी और भतीजी भी थीं मौजूद
Sat, 11 Apr 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 01:26 AM IST
सार
आशा मथुरा जाने को लेकर बेहद उत्साहित थीं। एक दिन पहले ही वह लुधियाना से आने वाली बस के इंतजार में सोनीपत अपनी बेटी के पास रुकने गई थीं। उन्हें बेटा वहां तक छोड़कर आया था। अगले दिन बेटी और दामाद उन्हें मुरथल तक बस में बैठाने के लिए छोड़ने गए थे।
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नाव हादसे में जान गंवाने वाली आशा अपने पति अर्जुन मिढा के साथ।
- फोटो : संवाद
विस्तार
वृंदावन में हुए नाव हादसे में भिवानी के जगत कॉलोनी निवासी 55 वर्षीय आशा मिड्ढा की मौत हो गई। वह रेलवे रोड स्थित जगदंबा भोजनालय के संचालक अर्जुन मिड्ढा की पत्नी थीं। हादसे की सूचना जैसे ही भिवानी में परिजनों को मिली, परिवार में कोहराम मच गया और सभी लोग तत्काल वृंदावन रवाना हो गए। घर में मातम छा गया।
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जानकारी के अनुसार आशा मिड्ढा वीरवार सुबह भिवानी से निकली थीं। उन्होंने लुधियाना में रह रहे अपने मायके पक्ष के साथ तीर्थ यात्रा की योजना बनाई थी। हादसे के समय उनके साथ मायके से भाभी और भतीजी भी मौजूद थीं। आशा तीन बच्चों की मां थीं। उनके दो बेटे अजय और दिनेश तथा एक बेटी है। तीनों बच्चे विवाहित हैं।
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परिजनों के अनुसार आशा के ननदोई राधेश्याम ने बताया कि वह पिछले वर्ष भी वृंदावन गई थीं। इस बार उन्होंने लुधियाना से मायके पक्ष के साथ यात्रा का निर्णय लिया था। आशा नौ अप्रैल को घर से निकली थीं। उन्हें उनका बेटा सोनीपत छोड़ने गया था। वहां वह रात को अपनी बेटी के घर रुकी थीं। इसके बाद शुक्रवार सुबह वह लुधियाना से आ रही बस में मुरथल से सवार होकर मथुरा पहुंची थीं कि यह हादसा हो गया।
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तीर्थ यात्रा पर जाने के लिए थी बेहद उत्साहित थीं आशा
आशा मथुरा जाने को लेकर बेहद उत्साहित थीं। एक दिन पहले ही वह लुधियाना से आने वाली बस के इंतजार में सोनीपत अपनी बेटी के पास रुकने गई थीं। उन्हें बेटा वहां तक छोड़कर आया था। अगले दिन बेटी और दामाद उन्हें मुरथल तक बस में बैठाने के लिए छोड़ने गए थे। उस समय भी आशा काफी खुश नजर आ रही थीं। किसी को अंदेशा नहीं था कि यह तीर्थ यात्रा उनका अंतिम सफर साबित होगी।