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Bhiwani News: पिता की इच्छानुसार अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के बजाय खेतों में दबाकर रोपित किए 11 पौधे
Sat, 28 Sep 2024 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 28 Sep 2024 01:55 AM IST
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अपने पिता की अस्थियों को खेत में दबाकर पौध रोपण करते कुलदीप भुक्कल व राजेश भुक्कल।
भिवानी। सनातन संस्कृति में व्यक्ति के दाह संस्कार के बाद अस्थियों को प्रवाहित करने के लिए गढ़ मुक्तेश्वर ले जाया जाता है। लेकिन गांव संडवा निवासी कुलदीप भुक्कल व राजेश भुक्कल ने अपने पिता रोहताश सिंह की मृत्यु उपरांत उनकी आत्मशांति एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है।
कुलदीप भुक्कल व राजेश भुक्कल ने अपने पिता रोहताश सिंह की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के बजाय अपने खेत में ही दबाकर उस स्थान पर 11 पौधों का रोपण किया। इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काफी सराहनीय मुहिम ग्रामीणों द्वारा बताई जा रही है। इस बारे में गांव संडवा निवासी कुलदीप भुक्कल व राजेश भुक्कल ने बताया कि बीते दिनों उनके पिता रोहताश का हृदय गति रूकने से निधन हो गया था।
उन्होंने बताया कि उनके पिता पर्यावरण प्रेमी थे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बेहद सराहनीय कार्य करते थे और उनकी इच्छा थी कि उनकी मृत्यु उपरांत ऐसा कार्य किया जाए जो कि अन्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने अपने पिता की इच्छा अनुसार उनकी आत्मशांति एवं पर्यावरण संरक्षण की सोच रखते हुए उनकी अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने की बजाए खेतों में दबाकर उस पर 11 पौधों का रोपण किया है। इस अवसर पर संतोष भुक्कल, राजेराम, सुरेश, संतलाल, सुभाष, बाल, जगदीश, सतबीर, बलवान, सुरेंद्र मास्टर मौजूद रहे। संवाद
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कुलदीप भुक्कल व राजेश भुक्कल ने अपने पिता रोहताश सिंह की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के बजाय अपने खेत में ही दबाकर उस स्थान पर 11 पौधों का रोपण किया। इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काफी सराहनीय मुहिम ग्रामीणों द्वारा बताई जा रही है। इस बारे में गांव संडवा निवासी कुलदीप भुक्कल व राजेश भुक्कल ने बताया कि बीते दिनों उनके पिता रोहताश का हृदय गति रूकने से निधन हो गया था।
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उन्होंने बताया कि उनके पिता पर्यावरण प्रेमी थे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बेहद सराहनीय कार्य करते थे और उनकी इच्छा थी कि उनकी मृत्यु उपरांत ऐसा कार्य किया जाए जो कि अन्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने अपने पिता की इच्छा अनुसार उनकी आत्मशांति एवं पर्यावरण संरक्षण की सोच रखते हुए उनकी अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने की बजाए खेतों में दबाकर उस पर 11 पौधों का रोपण किया है। इस अवसर पर संतोष भुक्कल, राजेराम, सुरेश, संतलाल, सुभाष, बाल, जगदीश, सतबीर, बलवान, सुरेंद्र मास्टर मौजूद रहे। संवाद
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