{"_id":"60b3d65c8ebc3e29c2231768","slug":"apnatwa-abhiyan-corona-effect-family-sufring-bhiwani-news-rtk6107832200","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना ने दिव्यांग भाई-बहन के सिर से छीना पिता का साया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना ने दिव्यांग भाई-बहन के सिर से छीना पिता का साया
विज्ञापन
भिवानी। गांव तिगड़ाना निवासी राजेंद्र की जिंदगी कोरोना ने छीन ली। इसके साथ ही परिवार की खुशियां और चैन भी छीन लिया। इकलौता कमाने वाला होने के कारण अब परिवार के सामने आर्थिक तंगी खड़ी हो गई है। राजेंद्र के दो बच्चे हैं तथा दोनों ही दिव्यांग है। वे बोल और सुन नहीं सकते। बेटी मुस्कान की उम्र 18 साल है और बेटा निखिल 16 साल का है। राजेंद्र की पत्नी राजबाला ने बताया कि राजेंद्र सेनेटरी स्टोर चलाता था। उसके लेन-देने के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता है। मगर जबसे उनकी मौत हुई है लेनदार घर पर आ रहे हैं। हमारे सामने तो दो वक्त की रोटी का भी संकट है। हमें यह भी नहीं पता कि उनका किस के साथ क्या लेनदेन बाकी था।
बोल नहीं सकते पर समझते तो हैं
राजबाला कहती हैं कि उनके दोनों बच्चे बोल और सुन नहीं सकते हैं। मगर समझते तो हैं। पिता के जाने का दुख भले ही वो बोल कर नहीं बता पाते, मगर उनकी आंखों के आंसू हर पल उनके दुख का अहसास करवाते हैं। बच्चों का दिल कमजोर न हो और वो हालात के सामने न झुकें, इसलिए मैं भी उन्हें हौसला देती रहती हूं। पर सच तो यह है कि हालात मेरे भी काबू से बाहर हैं।
बेटे की प्रैक्टिस छूटी
राजबाला ने बताया कि उसका बेटा निखिल देवनगर में बॉक्सिंग का अभ्यास करता है। मगर पिता के जाने के बाद उसका अभ्यास भी छूट गया है। अब यह भी चिंता सता रही है कि जब दो वक्त की रोटी का ही जुगाड़ नहीं होगा तो बॉक्सिंग कोचिंग के लिए रुपये कहां से आएंगे।
विज्ञापन
पति से एक सप्ताह पहले सास की मौत
राजबाला ने बताया कि उनकी सास की मौत राजेंद्र की मौत से एक सप्ताह पहले 3 मई को हुई थी। उनकी पेंशन आती थी। मगर उनकी मौत के बाद वो सहारा भी खत्म हो गया है। अब समझ नहीं आ रहा है कि वो दोनों बच्चों का पालन पोषण कैसे करेंगी।
विज्ञापन
बोल नहीं सकते पर समझते तो हैं
राजबाला कहती हैं कि उनके दोनों बच्चे बोल और सुन नहीं सकते हैं। मगर समझते तो हैं। पिता के जाने का दुख भले ही वो बोल कर नहीं बता पाते, मगर उनकी आंखों के आंसू हर पल उनके दुख का अहसास करवाते हैं। बच्चों का दिल कमजोर न हो और वो हालात के सामने न झुकें, इसलिए मैं भी उन्हें हौसला देती रहती हूं। पर सच तो यह है कि हालात मेरे भी काबू से बाहर हैं।
विज्ञापन
बेटे की प्रैक्टिस छूटी
राजबाला ने बताया कि उसका बेटा निखिल देवनगर में बॉक्सिंग का अभ्यास करता है। मगर पिता के जाने के बाद उसका अभ्यास भी छूट गया है। अब यह भी चिंता सता रही है कि जब दो वक्त की रोटी का ही जुगाड़ नहीं होगा तो बॉक्सिंग कोचिंग के लिए रुपये कहां से आएंगे।
विज्ञापन
पति से एक सप्ताह पहले सास की मौत
राजबाला ने बताया कि उनकी सास की मौत राजेंद्र की मौत से एक सप्ताह पहले 3 मई को हुई थी। उनकी पेंशन आती थी। मगर उनकी मौत के बाद वो सहारा भी खत्म हो गया है। अब समझ नहीं आ रहा है कि वो दोनों बच्चों का पालन पोषण कैसे करेंगी।