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Bhiwani News: 12 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मा. आनंद घणघस को मिला न्याय
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भिवानी। गांव धनाना निवासी पात्र अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मा. आनंद घणघस को 12 वर्षों बाद न्याय मिला। मामला वर्ष 2012-13 का है। जब मा. आनंद घणघस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। घणघस के खिलाफ भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर स्कूली रिकॉर्ड जलाने व चोरी करने, प्राचार्य व स्टाफ सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार करने, राष्ट्रीय झंडा न फहराने देने, सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित अन्य गंभीर आरोप लगे थे।
आनंद ने बताया कि उनके खिलाफ एक झूठी एफआईआर भी दर्ज करवाई गई। इन आरोपों के बाद सत्ता का दुरुपयोग करते हुए झूठे सबूत बनाते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच करवाई गई और उनकी सेवाएं समाप्त करवा दी गईं। दूसरी तरफ पुलिस विभाग ने तत्कालीन सरकार के दबाव में काम करते हुए झूठी एफआईआर को बेस बनाते हुए न्यायालय में एक क्रिमिनल केस भी उनके खिलाफ दायर करवाया गया।
आनंद ने बताया कि भ्रष्टाचार के इस झूठे केस ने न केवल उनका उनका, बल्कि उनके परिवार का भी जीना मुहाल कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह मामला 12 वर्षों तक चलता रहा। 12 वर्षों बाद निचली अदालत यमुनानगर ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए मा. आनंद के पूरी मामले को आधारहीन करार दिया और आनंद को चार्ज पर ही डिस्चार्ज कर इस झूठ के षड्यंत्र को साबित किया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने अपनी गलती सुधारते हुए 11 मार्च 2024 को मा. आनंद घणघस को अध्यापक पद पर बहाल किया।
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इस मामले में भिवानी बार एसोसिएशन के सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक धांगड़ ने इस फैसले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर फैसला बताते हुए बताया कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं और ऐसे फैसलों के कारण आम आदमी का न्याय प्रणाली पर विश्वास बढ़ता है। संवाद
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आनंद ने बताया कि उनके खिलाफ एक झूठी एफआईआर भी दर्ज करवाई गई। इन आरोपों के बाद सत्ता का दुरुपयोग करते हुए झूठे सबूत बनाते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच करवाई गई और उनकी सेवाएं समाप्त करवा दी गईं। दूसरी तरफ पुलिस विभाग ने तत्कालीन सरकार के दबाव में काम करते हुए झूठी एफआईआर को बेस बनाते हुए न्यायालय में एक क्रिमिनल केस भी उनके खिलाफ दायर करवाया गया।
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आनंद ने बताया कि भ्रष्टाचार के इस झूठे केस ने न केवल उनका उनका, बल्कि उनके परिवार का भी जीना मुहाल कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह मामला 12 वर्षों तक चलता रहा। 12 वर्षों बाद निचली अदालत यमुनानगर ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए मा. आनंद के पूरी मामले को आधारहीन करार दिया और आनंद को चार्ज पर ही डिस्चार्ज कर इस झूठ के षड्यंत्र को साबित किया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने अपनी गलती सुधारते हुए 11 मार्च 2024 को मा. आनंद घणघस को अध्यापक पद पर बहाल किया।
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इस मामले में भिवानी बार एसोसिएशन के सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक धांगड़ ने इस फैसले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर फैसला बताते हुए बताया कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं और ऐसे फैसलों के कारण आम आदमी का न्याय प्रणाली पर विश्वास बढ़ता है। संवाद