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पूजते हैं जिन्हें, उनकी परवाह करें: तैलीय भोजन और प्लास्टिक खाने से दो दिन में 32 लावारिस गायों की मौत
Thu, 29 Sep 2022 01:39 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 29 Sep 2022 01:39 AM IST
सार
गायों के शवों को साथ लेकर गोसेवकों ने लावारिस पशुओं का इलाज न करने का आरोप लगाते हुए कल देर रात हंगामा किया। गोसेवकों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने चार मांगें मानीं है। गोसेवक बोले कि लिखित आदेश मिलने के बाद ही धरना खत्म करेंगे।
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बीमार गायों का इलाज करते हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा के भिवानी शहर में बार-बार जागरूक करने के बावजूद अमावस्या के दिन तैलीय भोजन और प्लास्टिक खाने से दो दिन में 32 लावारिस गायों की मौत हो गई। इनमें कुछ गायों के शवों को साथ लेकर गोसेवकों ने लावारिस पशुओं का इलाज न करने का आरोप लगाते हुए कल देर रात हंगामा किया।
उसके बाद प्रशासन ने बुधवार को गोसेवकों की चारों मांगें मान ली। अब गोसेवकों का कहना है कि एसडीएम संदीप अग्रवाल ने भले ही उनकी मांगें मान ली है, मगर जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक पशु चिकित्सालय के सामने धरना जारी रहेगा।
अमावस्या के दिन गोसेवकों और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के काफी प्रयास के बावजूद लोग नहीं माने और गायों को हलवा, पुरी खिलाई। इससे सैकड़ों गायें बीमार हो गईं। गोसेवकों का दावा है कि ज्यादा तैलीय भोजन खाने से मंगलवार रात तक 12 लावारिस गायों की मौत हो गई। उन्हें बिना पोस्टमार्टम कराए गोसेवकों ने शवों को दफना दिया।
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उसके बाद बुधवार को महम रोड स्थित श्रीगोशाला में उपचार के दौरान 20 गायों ने दम तोड़ दिया, जबकि पांच अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। उधर, इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए गोसेवकों ने गायों के शवों के साथ मंगलवार देर रात शहर में प्रदर्शन किया और रोहतक गेट पर धरना दिया। तब एसडीएम संदीप अग्रवाल गोसेवकों के बीच पहुंचे और उन्होंने सभी मांगें मानने का आश्वासन दिया।
बुधवार सुबह एसडीएम कार्यालय में गोसेवकों और एसडीएम संदीप की बैठक हुई, जिसमें एसडीएम ने मांगें मानने का आश्वासन दिया। गोरक्षा दल के जिलाध्यक्ष संजय परमार ने बताया कि एसडीएम ने सभी मांगे मान ली हैं, मगर इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जब तक उन्हें लिखित में नहीं मिलता या अधिसूचना जारी नहीं होती, उनका धरना चलता रहेगा।
यह भी पढ़ें : महेंद्रगढ़: आंधी संग बारिश से कपास, बाजरे की फसल गिरी, पेड़ टूटकर गिरने से ट्रेनों का परिचालन बाधित
बता दें कि गोसेवकों और पशु चिकित्सकों के बीच पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा है। गोसेवक पशु चिकित्सकों पर लावारिस पशुओं का इलाज नहीं करने का आरोप लगा रहे थे तो पशुपालन विभाग के अधिकारी गोसेवकों पर परेशान करने के आरोप लगाए थे।
श्रीगोशाला में इलाज के लिए लाई गईं 69 बीमार गायें, पांच की हालत गंभीर
69 बीमार लावारिस गायों को गोसेवकों ने महम रोड स्थित श्रीगोशाला में पहुंचाया। इसमें से 20 गायों ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद शवों को दफना दिया गया। 49 गायों की जान बचाई गई, हालांकि पांच गायों की हालत अभी भी गंभीर बनी है। श्री गोशाला ट्रस्ट के प्रधान मोहनलाल अग्रवाल द्वारा भिवानी जिला प्रशासन और पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार कालीरामण के आग्रह पर महम रोड स्थित गोशाला में पितृपक्ष की अमावस्या पर बीमार गायों के उपचार के लिए अलग से शेड लगवा चिकित्सा की व्यवस्था कराई गई। मोहनलाल अग्रवाल ने बताया कि पितृपक्ष के श्राद्धों के दौरान गोरक्षा दल प्रधान संजय परमार व उसके करीब 200 गोसेवकों ने चार एंबुलेंस के माध्यम से 69 लावारिस पशुओं को यहां छोड़ा था।
ये थीं गोसेवकों की मांगें
कितनी गायों की मौत हुई है, यह सही आंकड़ा मेरे पास अभी नहीं है। गायों की मौत तला भोजन खाने के अलावा प्लास्टिक व अन्य पदार्थ खाने से हुई है। इमरजेंसी केस के दौरान कुछ गायों की सर्जरी की गई तो काफी प्लास्टिक उनके पेट से निकला। - डॉ. सुखदेव सिंह राठी, उप निदेशक, पशुपालन विभाग, भिवानी।
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उसके बाद प्रशासन ने बुधवार को गोसेवकों की चारों मांगें मान ली। अब गोसेवकों का कहना है कि एसडीएम संदीप अग्रवाल ने भले ही उनकी मांगें मान ली है, मगर जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक पशु चिकित्सालय के सामने धरना जारी रहेगा।
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अमावस्या के दिन गोसेवकों और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के काफी प्रयास के बावजूद लोग नहीं माने और गायों को हलवा, पुरी खिलाई। इससे सैकड़ों गायें बीमार हो गईं। गोसेवकों का दावा है कि ज्यादा तैलीय भोजन खाने से मंगलवार रात तक 12 लावारिस गायों की मौत हो गई। उन्हें बिना पोस्टमार्टम कराए गोसेवकों ने शवों को दफना दिया।
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उसके बाद बुधवार को महम रोड स्थित श्रीगोशाला में उपचार के दौरान 20 गायों ने दम तोड़ दिया, जबकि पांच अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। उधर, इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए गोसेवकों ने गायों के शवों के साथ मंगलवार देर रात शहर में प्रदर्शन किया और रोहतक गेट पर धरना दिया। तब एसडीएम संदीप अग्रवाल गोसेवकों के बीच पहुंचे और उन्होंने सभी मांगें मानने का आश्वासन दिया।
बुधवार सुबह एसडीएम कार्यालय में गोसेवकों और एसडीएम संदीप की बैठक हुई, जिसमें एसडीएम ने मांगें मानने का आश्वासन दिया। गोरक्षा दल के जिलाध्यक्ष संजय परमार ने बताया कि एसडीएम ने सभी मांगे मान ली हैं, मगर इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जब तक उन्हें लिखित में नहीं मिलता या अधिसूचना जारी नहीं होती, उनका धरना चलता रहेगा।
यह भी पढ़ें : महेंद्रगढ़: आंधी संग बारिश से कपास, बाजरे की फसल गिरी, पेड़ टूटकर गिरने से ट्रेनों का परिचालन बाधित
बता दें कि गोसेवकों और पशु चिकित्सकों के बीच पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा है। गोसेवक पशु चिकित्सकों पर लावारिस पशुओं का इलाज नहीं करने का आरोप लगा रहे थे तो पशुपालन विभाग के अधिकारी गोसेवकों पर परेशान करने के आरोप लगाए थे।
श्रीगोशाला में इलाज के लिए लाई गईं 69 बीमार गायें, पांच की हालत गंभीर
69 बीमार लावारिस गायों को गोसेवकों ने महम रोड स्थित श्रीगोशाला में पहुंचाया। इसमें से 20 गायों ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद शवों को दफना दिया गया। 49 गायों की जान बचाई गई, हालांकि पांच गायों की हालत अभी भी गंभीर बनी है। श्री गोशाला ट्रस्ट के प्रधान मोहनलाल अग्रवाल द्वारा भिवानी जिला प्रशासन और पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार कालीरामण के आग्रह पर महम रोड स्थित गोशाला में पितृपक्ष की अमावस्या पर बीमार गायों के उपचार के लिए अलग से शेड लगवा चिकित्सा की व्यवस्था कराई गई। मोहनलाल अग्रवाल ने बताया कि पितृपक्ष के श्राद्धों के दौरान गोरक्षा दल प्रधान संजय परमार व उसके करीब 200 गोसेवकों ने चार एंबुलेंस के माध्यम से 69 लावारिस पशुओं को यहां छोड़ा था।
ये थीं गोसेवकों की मांगें
- एक नंबर जारी किया जाए जो 24 घंटे ऑन रहे। जहां घायल लावारिस पशुओं, जानवरों की सूचना दी जा सके ताकि समय पर इलाज मिल सके।
- पशु एंबुलेंस पर एक चालक की नियुक्ति की जाए।
- मोबाइल वैन लोहारू से भिवानी शिफ्ट की जाए।
- पशुओं के इलाज में लापरवाही करने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाए।
कितनी गायों की मौत हुई है, यह सही आंकड़ा मेरे पास अभी नहीं है। गायों की मौत तला भोजन खाने के अलावा प्लास्टिक व अन्य पदार्थ खाने से हुई है। इमरजेंसी केस के दौरान कुछ गायों की सर्जरी की गई तो काफी प्लास्टिक उनके पेट से निकला। - डॉ. सुखदेव सिंह राठी, उप निदेशक, पशुपालन विभाग, भिवानी।