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भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में च्वार फसल सक्षम: डा. बीडी यादव
Updated Tue, 20 Mar 2018 01:16 AM IST
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भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में ज्वार फसल सक्षम : डॉ. बीडी यादव
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। ज्वार बरानी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है। खरीफ फसलों की यह एक मुख्य फसल है। यह सूखे को सहन करने में काफी क्षमता रखती है। कपास की लगातार ज्यादा बिजाई के कारण प्रदेश के अधिकांश ज्वार व कपास उत्पादक क्षेत्रों में पोषक तत्वों की निरंतर कमी हो रही है। जिसके कारण किसान पूरी पैदावार नहीं ले पाते। उक्त विचार चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सेवानिवृत्त ज्वार वैज्ञानिक जिन्होंने 28 साल तक निरंतर ज्वार फसल पर काम किया है ने प्रकट किए। ज्वार फसल पर आयोजित शिविर में किसानों को गांव झोझू खुर्द (दादरी) संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर कृषि विकास अधिकारी डा. जितेंद्र सिंह मुख्यातिथि मौजूद थे।
ज्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने कहा कि ज्वार एक दलहनी फसल होने के नाते वायु मंडल से नाइट्रोजन लेकर पौधों को देती है इसके पत्ते जमीन पर झड़कर जैविक खाद का काम करते हैं। नरमा की फसल को ज्वार की फसल चक्र में शामिल करने के बाद नरमा की फसल पैदावार काफी अच्छी मिलती है। इसके साथ किसानों को सलाह दी जाती है कि नरमे की खेती के साथ ज्वार की फसल चक्र में रखना किसान के लिए लाभदायक है। डॉ. सिंह ने किसानों को विभाग द्वारा चलाई जा रही स्कीमों की विस्तार से जानकारी दी। ज्वार विशेषज्ञ ने उखेड़ा रोग ज्वार फसल की एक मुख्य बीमारी बताया और इसकी रोकथाम के उपाय भी बताए। इस अवसर पर प्रदीप, रवींद्र, सुनील, वेद प्रकाश, जागिंद्र, राजेश तथा बलजीत सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। ज्वार बरानी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है। खरीफ फसलों की यह एक मुख्य फसल है। यह सूखे को सहन करने में काफी क्षमता रखती है। कपास की लगातार ज्यादा बिजाई के कारण प्रदेश के अधिकांश ज्वार व कपास उत्पादक क्षेत्रों में पोषक तत्वों की निरंतर कमी हो रही है। जिसके कारण किसान पूरी पैदावार नहीं ले पाते। उक्त विचार चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सेवानिवृत्त ज्वार वैज्ञानिक जिन्होंने 28 साल तक निरंतर ज्वार फसल पर काम किया है ने प्रकट किए। ज्वार फसल पर आयोजित शिविर में किसानों को गांव झोझू खुर्द (दादरी) संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर कृषि विकास अधिकारी डा. जितेंद्र सिंह मुख्यातिथि मौजूद थे।
ज्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने कहा कि ज्वार एक दलहनी फसल होने के नाते वायु मंडल से नाइट्रोजन लेकर पौधों को देती है इसके पत्ते जमीन पर झड़कर जैविक खाद का काम करते हैं। नरमा की फसल को ज्वार की फसल चक्र में शामिल करने के बाद नरमा की फसल पैदावार काफी अच्छी मिलती है। इसके साथ किसानों को सलाह दी जाती है कि नरमे की खेती के साथ ज्वार की फसल चक्र में रखना किसान के लिए लाभदायक है। डॉ. सिंह ने किसानों को विभाग द्वारा चलाई जा रही स्कीमों की विस्तार से जानकारी दी। ज्वार विशेषज्ञ ने उखेड़ा रोग ज्वार फसल की एक मुख्य बीमारी बताया और इसकी रोकथाम के उपाय भी बताए। इस अवसर पर प्रदीप, रवींद्र, सुनील, वेद प्रकाश, जागिंद्र, राजेश तथा बलजीत सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।
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