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समस्याओं को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन
Updated Tue, 01 Aug 2017 01:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहल।
किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर किसानों ने भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान बचाओ-खेती बचाओ पंचायत का आयोजन किया। इसमेें किसानों ने कहा कि चहुंओर समस्याओं से घिरे किसान को न समय पर बिजली मिल रही है और न खाद-बीज। बिजली निगम भी तरह-तरह के जुर्माने और नियम कानूनों के बहाने किसानों को प्रताड़ित कर रहा है। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन एसडीओ को दिया।
बिजली घर परिसर में सोमवार को आयोजित पंचायत में किसानों ने कहा कि महंगी खेती और फसल के सही दाम नहीं मिलने के कारण प्रदेश की किसान की हालत दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। इसलिए, दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर प्रदेश के किसान के कर्जे माफ किए जाने चाहिए। किसानों ने नियमित रूप से घरेलू बिजली बिल अदा करने वाले किसानों के घरों में बिजली कर्मचारी न जाने, निगम में जेई, फोरमैन के रिक्त पद भरने, निगम में लोडिंग गाड़ियां उपलब्ध करवाने, वर्षों पुरानी एलटी ट्यूबवेल लाइनों को एचटी लाइनों में तब्दील करने और बिजली निगम के बढ़ाए गए बिजली बिल को वापस लेने की मांग की।
किसानों ने कहा कि निगम ट्यूबवेलों के नाम पर ली जा रही रिश्वत को बंद करें, जिन किसानों के कनेक्शन केबल या एलटी लाइन से संभव है, उन पर ट्रांसफॉर्मर के नाम का तीस हजार रुपये का प्रभार न डाला जाए, जले हुए ट्रांसफॉर्मर को 72 घंटों के अंदर बदलना सुनिश्चित करें। बिजली बिल सरचार्ज माफी की स्कीम को फिर से चालू किया जाए। किसान नेताओं ने नौ अगस्त को करनाल में आयोजित कर्जा छोड़ा या सत्ता छोड़ो के नारे तले आयोजित होने वाले किसान मजदूर कर्ज मुक्त आंदोलन में किसानों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेने के लिए अपील की। पंचायत की अध्यक्षता प्रधान रवि सांगवान ने की। इस अवसर पर जिला प्रधान मेवासिंह आर्य, सूरत सिंह हरियावास समेत अनेक किसान नेता मौजूद थे।
बहल।
किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर किसानों ने भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान बचाओ-खेती बचाओ पंचायत का आयोजन किया। इसमेें किसानों ने कहा कि चहुंओर समस्याओं से घिरे किसान को न समय पर बिजली मिल रही है और न खाद-बीज। बिजली निगम भी तरह-तरह के जुर्माने और नियम कानूनों के बहाने किसानों को प्रताड़ित कर रहा है। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन एसडीओ को दिया।
बिजली घर परिसर में सोमवार को आयोजित पंचायत में किसानों ने कहा कि महंगी खेती और फसल के सही दाम नहीं मिलने के कारण प्रदेश की किसान की हालत दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। इसलिए, दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर प्रदेश के किसान के कर्जे माफ किए जाने चाहिए। किसानों ने नियमित रूप से घरेलू बिजली बिल अदा करने वाले किसानों के घरों में बिजली कर्मचारी न जाने, निगम में जेई, फोरमैन के रिक्त पद भरने, निगम में लोडिंग गाड़ियां उपलब्ध करवाने, वर्षों पुरानी एलटी ट्यूबवेल लाइनों को एचटी लाइनों में तब्दील करने और बिजली निगम के बढ़ाए गए बिजली बिल को वापस लेने की मांग की।
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किसानों ने कहा कि निगम ट्यूबवेलों के नाम पर ली जा रही रिश्वत को बंद करें, जिन किसानों के कनेक्शन केबल या एलटी लाइन से संभव है, उन पर ट्रांसफॉर्मर के नाम का तीस हजार रुपये का प्रभार न डाला जाए, जले हुए ट्रांसफॉर्मर को 72 घंटों के अंदर बदलना सुनिश्चित करें। बिजली बिल सरचार्ज माफी की स्कीम को फिर से चालू किया जाए। किसान नेताओं ने नौ अगस्त को करनाल में आयोजित कर्जा छोड़ा या सत्ता छोड़ो के नारे तले आयोजित होने वाले किसान मजदूर कर्ज मुक्त आंदोलन में किसानों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेने के लिए अपील की। पंचायत की अध्यक्षता प्रधान रवि सांगवान ने की। इस अवसर पर जिला प्रधान मेवासिंह आर्य, सूरत सिंह हरियावास समेत अनेक किसान नेता मौजूद थे।
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