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क्रेशर मालिकों के साथ हुए विवाद में डंपर मालिकों ने की सड़क जाम
Updated Sun, 08 Apr 2018 12:56 AM IST
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क्रेशर मालिकों के फैसला का विरोध करते हुए डंपर मालिकों ने नाकों पर लगाया जाम
तोशाम । खानक में पत्थर ढुलाई को लेकर क्रेशर मालिक व डंपर मालिकों के बीच विवाद हो गया। क्रेशर मालिक तीन दिन पहले बनाई गई व्यवस्था को लागू करने पर कायम हैं, वहीं डंपर मालिकों ने शनिवार को पत्थर निकलने वाले नाकों पर जाम लगा दिया।
उल्लेखनीय है कि 4 अप्रैल को क्रेशर मालिकों ने तोशाम स्थित कान्हा फार्म हाउस में अहम बैठक कर 21 सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया। बैठक में फैसला लिया गया कि सभी क्रेशर मालिकों एवं डंपर मालिकों को समान काम मिले इसके लिए व्यवस्था जरूरी है। इसके तहत क्रेशर इकाइयों को तीन भागों में बांटा गया। छोटी क्रेशर इकाइयों के लिए दो, मध्यम के लिए चार व बड़ी क्रेशर इकाइयों के लिए 6 डंपर निर्धारित किए गए। बैठक में फैसला हुआ कि क्रेशर मालिक इस सिस्टम के तहत पत्थर ढुलाई के लिए डंपरों के नंबर देंगे। इन्हीं डंपरों को ही पत्थर ढुलाई की अनुमति दी जाए। फैसले की कॉपी एचएसआईआईडीसी के प्रोजेक्ट मेनेजर को भेज दी गई। शनिवार सुबह जैसे ही इस व्यवस्था के तहत कार्य शुरू हुआ तो डंपर मालिक नाके पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। क्रेशर मालिकों के फैसले का विरोध करते हुए शनिवार को नाके बंद रखे। इसी बीच एसडीएम विजेंद्र हुड्डा ने दोनों पक्षों की शाम को लोक निर्माण विश्राम गृह में बैठक बुलाई। बताया जाता है कि बैठक में बात सिरे नहीं चढ़ पाई। क्रेशर मालिक फैसले पर कायम हैं। क्रेशर मालिकों नें स्पष्ट कहा कि फैसला लागू नहीं होने तक क्रेशर इकाइयां बंद रहेंगी।
एचएसआईआईडीसी अधिकारी रविंद्र जाखड़ ने बताया कि क्रेशर मालिकों व गांव वालों का आपसी मतभेद है। उम्मीद है कि सोमवार तक समाधान निकल आएगा।
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तोशाम । खानक में पत्थर ढुलाई को लेकर क्रेशर मालिक व डंपर मालिकों के बीच विवाद हो गया। क्रेशर मालिक तीन दिन पहले बनाई गई व्यवस्था को लागू करने पर कायम हैं, वहीं डंपर मालिकों ने शनिवार को पत्थर निकलने वाले नाकों पर जाम लगा दिया।
उल्लेखनीय है कि 4 अप्रैल को क्रेशर मालिकों ने तोशाम स्थित कान्हा फार्म हाउस में अहम बैठक कर 21 सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया। बैठक में फैसला लिया गया कि सभी क्रेशर मालिकों एवं डंपर मालिकों को समान काम मिले इसके लिए व्यवस्था जरूरी है। इसके तहत क्रेशर इकाइयों को तीन भागों में बांटा गया। छोटी क्रेशर इकाइयों के लिए दो, मध्यम के लिए चार व बड़ी क्रेशर इकाइयों के लिए 6 डंपर निर्धारित किए गए। बैठक में फैसला हुआ कि क्रेशर मालिक इस सिस्टम के तहत पत्थर ढुलाई के लिए डंपरों के नंबर देंगे। इन्हीं डंपरों को ही पत्थर ढुलाई की अनुमति दी जाए। फैसले की कॉपी एचएसआईआईडीसी के प्रोजेक्ट मेनेजर को भेज दी गई। शनिवार सुबह जैसे ही इस व्यवस्था के तहत कार्य शुरू हुआ तो डंपर मालिक नाके पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। क्रेशर मालिकों के फैसले का विरोध करते हुए शनिवार को नाके बंद रखे। इसी बीच एसडीएम विजेंद्र हुड्डा ने दोनों पक्षों की शाम को लोक निर्माण विश्राम गृह में बैठक बुलाई। बताया जाता है कि बैठक में बात सिरे नहीं चढ़ पाई। क्रेशर मालिक फैसले पर कायम हैं। क्रेशर मालिकों नें स्पष्ट कहा कि फैसला लागू नहीं होने तक क्रेशर इकाइयां बंद रहेंगी।
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एचएसआईआईडीसी अधिकारी रविंद्र जाखड़ ने बताया कि क्रेशर मालिकों व गांव वालों का आपसी मतभेद है। उम्मीद है कि सोमवार तक समाधान निकल आएगा।