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पंचगावा की बेटी सीमा कृषि वैज्ञानिक बनकर करेगी किसानों की सेवा
Updated Thu, 13 Jul 2017 12:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
लोहारू।
गांव-देहात में पली-बढी पंचगावा निवासी सीमा श्योराण कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों और देश की सेवा करेगी। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ‘पूसा’ नई दिल्ली की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इसी संस्थान से एमएससी की थी। उसमेें भी उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया था।
सीमा श्योराण के पिता यशपाल श्योराण लोहारू के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिपिक हैं। स्थानीय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पहुंचने पर सीमा का स्वागत किया गया। सभी ने उन्हें उनकी उपलब्धि पर बधाई दी। सीमा ने बताया कि उन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर जोबनेर यूनिवर्सिटी, जयपुर से गोल्ड मेडल के साथ की थी। जेआरएफ में देशभर में पांचवां स्थान प्राप्त किया। बताया कि उन्होंने पीएचडी में प्रवेश पाने तक प्रतिदिन 13-14 घंटे पढ़ाई की है। किसान पृष्ठभूमि से होने के कारण उन्होंने कृषि क्षेत्र को चुना और वे कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों की सेवा करना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे सर्वप्रथम अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसकी प्राप्ति तक कठोर मेहनत करें। सीमा श्योराण ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा और पूरे परिवार को दिया। सीमा के पिता यशपाल श्योराण ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को अपना व्यक्तित्व बनाने और पढ़ाई के लिए पूरी आजादी दी हुई है। सीमा ने पूसा में यह उपलब्धि हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वे भी इससे गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं।
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लोहारू।
गांव-देहात में पली-बढी पंचगावा निवासी सीमा श्योराण कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों और देश की सेवा करेगी। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ‘पूसा’ नई दिल्ली की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इसी संस्थान से एमएससी की थी। उसमेें भी उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया था।
सीमा श्योराण के पिता यशपाल श्योराण लोहारू के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिपिक हैं। स्थानीय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पहुंचने पर सीमा का स्वागत किया गया। सभी ने उन्हें उनकी उपलब्धि पर बधाई दी। सीमा ने बताया कि उन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर जोबनेर यूनिवर्सिटी, जयपुर से गोल्ड मेडल के साथ की थी। जेआरएफ में देशभर में पांचवां स्थान प्राप्त किया। बताया कि उन्होंने पीएचडी में प्रवेश पाने तक प्रतिदिन 13-14 घंटे पढ़ाई की है। किसान पृष्ठभूमि से होने के कारण उन्होंने कृषि क्षेत्र को चुना और वे कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों की सेवा करना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे सर्वप्रथम अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसकी प्राप्ति तक कठोर मेहनत करें। सीमा श्योराण ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा और पूरे परिवार को दिया। सीमा के पिता यशपाल श्योराण ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को अपना व्यक्तित्व बनाने और पढ़ाई के लिए पूरी आजादी दी हुई है। सीमा ने पूसा में यह उपलब्धि हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वे भी इससे गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं।
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