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600 रुपये मासिक का बिजली बिल भर रहे थे, लोड मिला 13 किलोवाट
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:56 AM IST
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भिवानी। जिस सिविल सर्जन आवास का महज 600 रुपये मासिक बिजली बिल का भुगतान किया जा रहा था। उसका बिजली लोड 13 किलोवाट है। सोमवार को पहुंची बिजली निगम की टीम ने पूर्व सिविल सर्जन आवास के बिजली लोड की जांच की। अब इसकी रिपोर्ट सिविल सर्जन और डीसी को भेजी जा रही है।
बता दें कि चरखी दादरी वासी एक लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, बिजली निगम के एमडी, डीसी और सीएमओ को शिकायत कर एक पूर्व सिविल सर्जन पर लोजेस्टिक सेंटर को आवास के रूप में प्रयोग करने और पांच एसी, 20 पंखें, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स होने के बावजूद लोड महज ढाई किलोवाट दिखा 600 रुपये मासिक का बिजली बिल भरने के आरोप लगाए थे जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है। शिकायतकर्ता ने सरकार को हुए 50-60 लाख रुपये की रिकवरी करने की मांग की थी। इसी मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बिजली लोड की जांच के लिए बिजली निगम को पत्र लिखा था।
सोमवार को एसडीओ कुलदीप के नेतृत्व में बिजली निगम की टीम ने लोजेस्टिक सेंटर का बिजली लोड जांचा। जांच में करीब 13 किलोवाट लोड मिला है। बिजली निगम की टीम में एसडीओ कुलदीप नेहरा, जेई वजीर सिंह, जिले सिंह, अस्पताल की तरफ से मूलचंद शर्मा, इलेक्ट्रिशियन कृष्ण कुमार व अन्य कर्मचारी शामिल हुए। सेंटर में किसी मीटर की व्यवस्था भी नहीं थी कि जो यह बता सके कि अस्पताल के हिस्से की कितनी बिजली लोजेस्टिक सेंटर में रहने वाले अधिकारियों ने प्रयोग की है। लोड का माप तोल करते वक्त जो रिपोर्ट तैयार हुई उसका एल-1 भरकर निगम के अधिकारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करवा दिया गया। आगे कार्रवाई करने का मामला अब स्वास्थ्य विभाग व सतर्कता ब्यूरो के पाले में है।
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यह थी शिकायत
शिकायत में लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने बताया था कि 2014 से 2018 तक सिविल सर्जन रहे डॉ. रणदीप पूनिया ने सरकारी आवास में रहे थे मगर उन्होंने बिजली का मीटर नहीं लगाया। सरकारी आवास में पांच एसी, 20 पंखे, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स के अलावा पानी गर्म करने का हीटर तक लगा है। इसके बावजूद बिजली निगम कर्मचारियों से साठगांठ कर ढाई किलोवाट का लोड दिखाया गया। इस तरह सरकार को करीब 50 से 60 लाख का चूना लगाया गया है। सरकार को इसकी रिकवरी करनी चाहिए। वहीं इस बारे में सिविल सर्जन का कहना था कि 2003 से ये लॉजिस्टिक सेंटर सीएमओ आवास के रूप में प्रयोग हो रहा है। 2003 से जो निर्धारित शुल्क था, वहीं उन्होंने जमा करवाया।
उपायुक्त की तरफ से आए पत्र के बाद लोजेस्टिक सेंटर का लोड जांचा गया है। लोजेस्टिक सेंटर में करीब 13 किलोवाट लोड आंका गया है। इसके एक भाग में करीब ढाई किलोवाट व दूसरे भाग में बाकी लोड है।
-कुलदीप नेहरा, एसडीओ
लोजेस्टिक सेंटर का लोड मापतोल करने के लिए बिजली निगम को पत्र लिखा गया था। उसी के आधार पर निगम के अधिकारियों ने आज लोजेस्टिक सेंटर के लोड का आंकलन किया है। पहले कुछ सीएमओ ने इसे आवास के रूप में प्रयोग किया, मगर इसे पूरी तरह लोजेस्टिक सेंटर के तौर पर ही प्रयोग किया जाएगा।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
बता दें कि चरखी दादरी वासी एक लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, बिजली निगम के एमडी, डीसी और सीएमओ को शिकायत कर एक पूर्व सिविल सर्जन पर लोजेस्टिक सेंटर को आवास के रूप में प्रयोग करने और पांच एसी, 20 पंखें, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स होने के बावजूद लोड महज ढाई किलोवाट दिखा 600 रुपये मासिक का बिजली बिल भरने के आरोप लगाए थे जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है। शिकायतकर्ता ने सरकार को हुए 50-60 लाख रुपये की रिकवरी करने की मांग की थी। इसी मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बिजली लोड की जांच के लिए बिजली निगम को पत्र लिखा था।
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सोमवार को एसडीओ कुलदीप के नेतृत्व में बिजली निगम की टीम ने लोजेस्टिक सेंटर का बिजली लोड जांचा। जांच में करीब 13 किलोवाट लोड मिला है। बिजली निगम की टीम में एसडीओ कुलदीप नेहरा, जेई वजीर सिंह, जिले सिंह, अस्पताल की तरफ से मूलचंद शर्मा, इलेक्ट्रिशियन कृष्ण कुमार व अन्य कर्मचारी शामिल हुए। सेंटर में किसी मीटर की व्यवस्था भी नहीं थी कि जो यह बता सके कि अस्पताल के हिस्से की कितनी बिजली लोजेस्टिक सेंटर में रहने वाले अधिकारियों ने प्रयोग की है। लोड का माप तोल करते वक्त जो रिपोर्ट तैयार हुई उसका एल-1 भरकर निगम के अधिकारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करवा दिया गया। आगे कार्रवाई करने का मामला अब स्वास्थ्य विभाग व सतर्कता ब्यूरो के पाले में है।
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यह थी शिकायत
शिकायत में लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने बताया था कि 2014 से 2018 तक सिविल सर्जन रहे डॉ. रणदीप पूनिया ने सरकारी आवास में रहे थे मगर उन्होंने बिजली का मीटर नहीं लगाया। सरकारी आवास में पांच एसी, 20 पंखे, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स के अलावा पानी गर्म करने का हीटर तक लगा है। इसके बावजूद बिजली निगम कर्मचारियों से साठगांठ कर ढाई किलोवाट का लोड दिखाया गया। इस तरह सरकार को करीब 50 से 60 लाख का चूना लगाया गया है। सरकार को इसकी रिकवरी करनी चाहिए। वहीं इस बारे में सिविल सर्जन का कहना था कि 2003 से ये लॉजिस्टिक सेंटर सीएमओ आवास के रूप में प्रयोग हो रहा है। 2003 से जो निर्धारित शुल्क था, वहीं उन्होंने जमा करवाया।
उपायुक्त की तरफ से आए पत्र के बाद लोजेस्टिक सेंटर का लोड जांचा गया है। लोजेस्टिक सेंटर में करीब 13 किलोवाट लोड आंका गया है। इसके एक भाग में करीब ढाई किलोवाट व दूसरे भाग में बाकी लोड है।
-कुलदीप नेहरा, एसडीओ
लोजेस्टिक सेंटर का लोड मापतोल करने के लिए बिजली निगम को पत्र लिखा गया था। उसी के आधार पर निगम के अधिकारियों ने आज लोजेस्टिक सेंटर के लोड का आंकलन किया है। पहले कुछ सीएमओ ने इसे आवास के रूप में प्रयोग किया, मगर इसे पूरी तरह लोजेस्टिक सेंटर के तौर पर ही प्रयोग किया जाएगा।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन