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संकट आने पर सगे संबंधी नाता तोड़ जाते हैं परंतु सच्चा मित्र ही कष्टों का निर्वाण करता है : पंडित भगवती प्रसाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 03:00 AM IST
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Relatives break when trouble comes, but only a true friend removes sufferings: Bhagwati Prasad
वास्तविक में मित्र वही कहलाता है जोकि दोस्त के सभी प्रकार के दुख संकटों का निवारण कर दे। ये विचार शहर के
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सेक्टर सात स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में चल रहे सामूहिक श्री 108 रामायण का पाठ के दौरान मंदिर पुरोहित पंडित भगवती
प्रसाद ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि सुखों का लाभ लेने के लिए तो हर कोई व्यक्ति एक दूसरे के साथ दिखाई देता है लेकिन मित्रता की भूमिका सच्चा दोस्त ही निभाता है। इसलिए यदि किसी से भी मित्रता रखो तो भगवान श्रीराम व सुग्रीव जैसी रखो।

उन्होंने बताया कि जब किसी पर भी मुसीबत आ जाती है तो रिश्तेदार सगे संबंधी नाता तोड़कर चले जाते हैं, लेकिन सच्चा मित्र ही दुखों व कष्टों में साथ खड़ा रहता है। एक रोज हनुमान श्रीराम और लक्ष्मण को किष्किन्धा पर्वत के मलय शिखर पर लेकर पहुंचे जहां पर सुग्रीव अपने अन्य मंत्रियों के साथ बैठे थे। हनुमान ने सुग्रीव से दोनों भाइयों का परिचय करवाया और कहा कि अयोध्या के महाराज दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र महा पराक्रमी रामचन्द्र अपने अनुज लक्ष्मण के साथ यहां पधारे हैं। इनके पंचवटी में निवास काल में इनकी पत्नी सीता को लंका का राजा रावण धोखे से हरण करके ले गया। उन्हीं की खोज करने के लिये यह आपकी सहायता चाहते हैं और आपसे मित्रता करने की इच्छा रखते हैं। आपको इनकी मित्रता स्वीकार कर इनका यथोचित सत्कार करें। ये दोनों बड़े गुणवान, पराक्रमी और धर्मात्मा हैं। राम व लक्ष्मण का परिचय जानकार प्रसन्नचित्त सुग्रीव बोले, हे प्रभो आप धर्मज्ञ, परम तपस्वी और सब पर दया करने वाले हैं। आप नर होकर भी मुझ वानर से मित्रता कर रहे हैं ये मेरा परम सौभाग्य है। आपकी मित्रता से मुझे ही उत्तम लाभ होगा। मेरा हाथ आपकी मैत्री के लिए फैला हुआ है, आप इसे अपने हाथ में लेकर परस्पर मैत्री का अटूट संबंध बना दें। सुग्रीव के वचन सुन कर राम ने उन्हें गले से लगा लिया। हनुमान ने भिक्षुरूप त्याग कर अग्नि प्रज्वलित की। श्रीराम व सुग्रीव ने अग्नि की प्रदक्षिणा कर मैत्री की शपथ ली और दोनों एक दूसरे के मित्र बन गए। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया। कथा से पूर्व पंडित धर्मेंद्र गौड़ और पंडित त्रिलोचन शर्मा की ओर से विधिपूर्वक कथा व्यास का पूजन करवाया गया। शुक्रवार को सोबित परिवार की ओर से प्रसाद की सेवा व पूजा अर्चना की गई। कथा का शुभारंभ गणेश वंदना से किया गया। कथा के समापन पर सभी भक्तजनों ने आरती की व प्रसाद ग्रहण किया।
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