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Ambala News: रामायण सिखाती है जीवन जीने की कला- गोविंद
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शहर के सेक्टर-आठ स्थित श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर-आठ स्थित श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास गोविंद मुदगल शास्त्री ने कहा कि रामायण मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है, जबकि श्रीमद्भागवत कथा जीव को मोक्ष का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को रोजाना जीवन में ऐसे कर्म करने चाहिए कि रात को सोते समय मन में कोई पछतावा न हो। प्रात काल जागने पर परमात्मा का भजन-स्मरण करना चाहिए और जवानी को इस तरह व्यतीत करना चाहिए कि बुढ़ापे में कष्ट न उठाना पड़े। अंतिम समय तक प्रभु का नाम लेने की शक्ति बनी रहे, यही परमात्मा से प्रार्थना होनी चाहिए। उन्होंने राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भागवत कथा के श्रवण मात्र से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार होता है।
इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर निष्काम कर्म और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण से ही आत्मिक शांति तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव है। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान विनोद बंसल ने बताया कि कथा प्रतिदिन सायं चार से सात बजे तक आयोजित की जा रही है।
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अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर-आठ स्थित श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास गोविंद मुदगल शास्त्री ने कहा कि रामायण मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है, जबकि श्रीमद्भागवत कथा जीव को मोक्ष का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को रोजाना जीवन में ऐसे कर्म करने चाहिए कि रात को सोते समय मन में कोई पछतावा न हो। प्रात काल जागने पर परमात्मा का भजन-स्मरण करना चाहिए और जवानी को इस तरह व्यतीत करना चाहिए कि बुढ़ापे में कष्ट न उठाना पड़े। अंतिम समय तक प्रभु का नाम लेने की शक्ति बनी रहे, यही परमात्मा से प्रार्थना होनी चाहिए। उन्होंने राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भागवत कथा के श्रवण मात्र से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार होता है।
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इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर निष्काम कर्म और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण से ही आत्मिक शांति तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव है। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान विनोद बंसल ने बताया कि कथा प्रतिदिन सायं चार से सात बजे तक आयोजित की जा रही है।

शहर के सेक्टर-आठ स्थित श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धाल
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