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Ambala News: अव्यवस्थाओं के बीच गेहूं खरीद की तैयारीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Mar 2025 01:30 AM IST
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Preparations for wheat procurement amid chaos
बराड़ा। अनाज मंडी में 1 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूं खरीद को लेकर सरकारी तैयारियां केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। किसानों की सुविधाओं के लिए किए जाने वाले इंतजाम अधूरे पड़े हैं, इससे उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। मंडी में सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं। लाइटिंग व्यवस्था खराब है, शौचालयों की हालत दयनीय है और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। प्रशासन की ओर से इन खामियों को दूर करने के लिए अंतिम समय तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं।
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खराब सड़कें, बढ़ेगी दिक्कत : सबसे बड़ी समस्या मंडी की जर्जर सड़कों को लेकर है। गड्ढों से भरी सड़कें किसानों और आढ़तियों के लिए मुसीबत बन सकती हैं। खराब रास्तों के कारण अनाज से भरे वाहन मंडी तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करेंगे, इससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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आढ़ती संघ के सचिव प्रिंस ने प्रशासन से सड़कों के पैच वर्क की मांग की है, ताकि किसानों को अनाज लाने और सुखाने में परेशानी न हो। वहीं कनिष्ठ अभियंता कुलदीप सिंह के अनुसार मंडी में सीवरेज और पेयजल पाइप बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत की जाएगी, लेकिन फिलहाल इस रबी सीजन में पैच वर्क संभव नहीं है। यह बयान किसानों की चिंताओं को और बढ़ा रहा है, क्योंकि गेहूं का सीजन सिर पर है और जल्द मरम्मत जरूरी है।
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गेहूं उत्पादन में गिरावट, खरीद प्रक्रिया पर सवाल
पिछले रबी सीजन में बराड़ा मंडी में 2 लाख 88 हजार 626 क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी। लेकिन इस बार खराब मौसम के कारण उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि बारदाना और गेहूं उठान की व्यवस्था को बेहतर किया गया है। लेकिन मंडी में अव्यवस्थाओं को देखकर किसानों को इन दावों पर भरोसा नहीं हो रहा है। वहीं सरकार ने इस बार किसानों को प्रति क्विंटल दो हजार 425 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की घोषणा की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 105 रुपये अधिक है। भुगतान प्रक्रिया को 7 दिनों के भीतर पूरा करने के आदेश भी दिए गए हैं, लेकिन किसानों को आशंका है कि इसमें देरी हो सकती है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो एजेंसी को ब्याज सहित रकम लौटानी होगी। पहले भी ऐसे वायदे व्यावहारिक रूप से सफल नहीं हो पाए थे।
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