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: ट्रेन में टक्कर के बाद लगी आग से यात्रियों को बचाने का अभ्यास
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अंबाला। वाराणसी से चंडीगढ़ जा रही यात्रा स्पेशल ट्रेन नंबर 009211 शुक्रवार सुबह अंबाला रेल यार्ड में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मालगाड़ी के डिब्बे से टकराने के बाद ट्रेन के चौथे कोच में आग लग गई।
आग की वजह से 100 से अधिक यात्री कोच में ही फंस गए। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए मौके पर रेलवे सहित एनडीआरएफ की टीमें पहुंच गई। लगभग 40 मिनट की मशक्कत के बाद 98 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इस दौरान दो यात्रियों की मौत हो गई। वहीं आठ यात्री गंभीर रूप से और सात यात्री मामूली तौर पर घायल हुए।
ये पूरी कार्रवाई मॉकड्रिल के तहत अंबाला रेलवे यार्ड में की गई, जिससे कि दुर्घटना होने पर किसी प्रकार ऐसी स्थिति से निपटा जा सकता है और इसमें सहायता कर्मी किस प्रकार स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर अपना योगदान दे सकते हैं। इसका प्रदर्शन किया। इस मौके पर खुद मंडल रेल प्रबंधक सहित एडीआरएम हनुमान प्रताप, डीएसओ विलियमजीत सिंह, एडीएसओ महकार सिंह, अधीक्षक राम, एनडीआरएफ से देवेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर टीम कमांडर संदीप रावल, इंस्पेक्टर रणजीत मिश्रा, इंस्पेक्टर दीपक और आरपीएफ इंस्पेक्टर जावेद खान मौजूद रहे।
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कंट्रोल रूम से मिला संदेश
शुक्रवार सुबह सब कुछ सामान्य चल रहा था। अचानक रेलवे के सायरन बजने लगे और 10.55 बजे रेलवे अधिकारियों के पास संदेश पहुंचा कि कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक से रवाना हुई वाराणसी-चंडीगढ़ यात्रा स्पेशल के चौथे कोच में आग लग गई है और कोच रेल पटरी से उतर गया है। यह हादसा दूसरी लाइन से गुजर रही मालगाड़ी के कारण हुआ है। सूचना मिलते ही रेलवे की दुर्घटना सहायता ट्रेन को मौके पर भेजा गया। वहीं सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम, स्टेट डिजास्टर टीम, जिला प्रशासन व पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सुबह लगभग 11 बजे शुरु हुआ रेस्क्यू आप्रेशन 11.40 बजे तक जारी रहा। हालांकि इसके बाद भी मॉकड्रिल के तहत एनडीआरएफ व रेलवे की टीमें अपना-अपना कार्य करती रहीं।
वर्जन
मॉकड्रिल के माध्यम से यह प्रदर्शित किया है कि यदि कहीं पर रेलवे हादसा होता है तो उस समय यात्रियों की जान बचाना कैसे बचाई जा सकती है ताकि जनहानि कम से कम हो। इसमें रेलवे की टीम सहित एनडीआरएफ ने सराहनीय कार्य किया है। आधुनिक मशीनों की मदद से यह रेस्क्यू आप्रेशन किया गया और घायलों को तुरंत उपचार भी मुहैया करवाया गया।
मंदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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आग की वजह से 100 से अधिक यात्री कोच में ही फंस गए। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए मौके पर रेलवे सहित एनडीआरएफ की टीमें पहुंच गई। लगभग 40 मिनट की मशक्कत के बाद 98 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इस दौरान दो यात्रियों की मौत हो गई। वहीं आठ यात्री गंभीर रूप से और सात यात्री मामूली तौर पर घायल हुए।
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ये पूरी कार्रवाई मॉकड्रिल के तहत अंबाला रेलवे यार्ड में की गई, जिससे कि दुर्घटना होने पर किसी प्रकार ऐसी स्थिति से निपटा जा सकता है और इसमें सहायता कर्मी किस प्रकार स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर अपना योगदान दे सकते हैं। इसका प्रदर्शन किया। इस मौके पर खुद मंडल रेल प्रबंधक सहित एडीआरएम हनुमान प्रताप, डीएसओ विलियमजीत सिंह, एडीएसओ महकार सिंह, अधीक्षक राम, एनडीआरएफ से देवेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर टीम कमांडर संदीप रावल, इंस्पेक्टर रणजीत मिश्रा, इंस्पेक्टर दीपक और आरपीएफ इंस्पेक्टर जावेद खान मौजूद रहे।
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कंट्रोल रूम से मिला संदेश
शुक्रवार सुबह सब कुछ सामान्य चल रहा था। अचानक रेलवे के सायरन बजने लगे और 10.55 बजे रेलवे अधिकारियों के पास संदेश पहुंचा कि कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक से रवाना हुई वाराणसी-चंडीगढ़ यात्रा स्पेशल के चौथे कोच में आग लग गई है और कोच रेल पटरी से उतर गया है। यह हादसा दूसरी लाइन से गुजर रही मालगाड़ी के कारण हुआ है। सूचना मिलते ही रेलवे की दुर्घटना सहायता ट्रेन को मौके पर भेजा गया। वहीं सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम, स्टेट डिजास्टर टीम, जिला प्रशासन व पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सुबह लगभग 11 बजे शुरु हुआ रेस्क्यू आप्रेशन 11.40 बजे तक जारी रहा। हालांकि इसके बाद भी मॉकड्रिल के तहत एनडीआरएफ व रेलवे की टीमें अपना-अपना कार्य करती रहीं।
वर्जन
मॉकड्रिल के माध्यम से यह प्रदर्शित किया है कि यदि कहीं पर रेलवे हादसा होता है तो उस समय यात्रियों की जान बचाना कैसे बचाई जा सकती है ताकि जनहानि कम से कम हो। इसमें रेलवे की टीम सहित एनडीआरएफ ने सराहनीय कार्य किया है। आधुनिक मशीनों की मदद से यह रेस्क्यू आप्रेशन किया गया और घायलों को तुरंत उपचार भी मुहैया करवाया गया।
मंदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला।