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Ambala News: अब आम, नाशपाती, आलू बुखारा पर होगा शोध
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चांदसोली में बनाया गया अनुसंधान केंद्र। आर्काइव
नारायणगढ़। सेब के साथ-साथ चांदसोली में बनाए बागवानी अनुसंधान केंद्र में अब अन्य फलों पर शोध होगा। अनुसंधान केंद्र में अब चीकू, आड़ू, नाशपाती और आलू बुखारा के साथ-साथ आम की भी छह किस्मों पर शोध का काम शुरू हो चुका है।
शोध में इन फलों की नई किस्म को बनाया जाएगा। इसके बाद किसानों को उसकी पौध दी जाएगी। इससे अंबाला के वातावरण में भी विशेष किस्मों के फल भी उगाए जा सके सकेंगे। उत्पादन के साथ-साथ नई किस्मों के लिए किसानों को दाम भी अच्छे मिलेंगे। इससे किसानों को भी आर्थिक तौर पर लाभ मिलेगा।
लुधियाना से लेकर आए पौधे
अनुसंधान केंद्र के फार्म मैनेजर डॉ. सुनील ने बताया कि हमारे अनुसंधान केंद्र में फिलहाल फलों पर ही शोध किया जा रहा है। केंद्र में लुधियाना से आड़ू, चीकू, आलू बुखारा के पौध लगाई है। इन पर शोध करके अंबाला के वातावरण के अनुसार नई किस्म तैयार होंगी। इन फलों की सामान्य किस्मों को यहां पर उगाया जाता है। नई किस्म से उत्पादन में भी बढ़ोतरी मिलेगी।
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छह प्रकार के आम की किस्में लगाईं
डॉ. सुनील ने बताया कि अनुसंधान केंद्र में छह तरह के आम की नई किस्में भी लगाई हैं। अंबाला क्षेत्र में मुख्यत: दशहरी, लंगड़ा और चौसा ही लगाया जाता है। इसी को देखते हुए केंद्र में अब आम की आम्रपाली, अरूणिका, अंबिका, मल्लिका सहित छह तरह की नई किस्म लगाई है। कई महीनों तक फल वैज्ञानिक इनका अध्ययन करेंगे और नई किस्म की कमियों की जांच करेंगे।
13.27 करोड़ से बना है यह केंद्र
गौरतलब है कि बीते माह ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस केंद्र का उद्घाटन किया था। इसके बाद से ही यहां पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस केंद्र को 13 करोड़ 27 लाख की लागत से बनाया गया है। यहां पर जल्द ही कॉलेज की भी सुविधा मिलेगी।
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शोध में इन फलों की नई किस्म को बनाया जाएगा। इसके बाद किसानों को उसकी पौध दी जाएगी। इससे अंबाला के वातावरण में भी विशेष किस्मों के फल भी उगाए जा सके सकेंगे। उत्पादन के साथ-साथ नई किस्मों के लिए किसानों को दाम भी अच्छे मिलेंगे। इससे किसानों को भी आर्थिक तौर पर लाभ मिलेगा।
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लुधियाना से लेकर आए पौधे
अनुसंधान केंद्र के फार्म मैनेजर डॉ. सुनील ने बताया कि हमारे अनुसंधान केंद्र में फिलहाल फलों पर ही शोध किया जा रहा है। केंद्र में लुधियाना से आड़ू, चीकू, आलू बुखारा के पौध लगाई है। इन पर शोध करके अंबाला के वातावरण के अनुसार नई किस्म तैयार होंगी। इन फलों की सामान्य किस्मों को यहां पर उगाया जाता है। नई किस्म से उत्पादन में भी बढ़ोतरी मिलेगी।
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छह प्रकार के आम की किस्में लगाईं
डॉ. सुनील ने बताया कि अनुसंधान केंद्र में छह तरह के आम की नई किस्में भी लगाई हैं। अंबाला क्षेत्र में मुख्यत: दशहरी, लंगड़ा और चौसा ही लगाया जाता है। इसी को देखते हुए केंद्र में अब आम की आम्रपाली, अरूणिका, अंबिका, मल्लिका सहित छह तरह की नई किस्म लगाई है। कई महीनों तक फल वैज्ञानिक इनका अध्ययन करेंगे और नई किस्म की कमियों की जांच करेंगे।
13.27 करोड़ से बना है यह केंद्र
गौरतलब है कि बीते माह ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस केंद्र का उद्घाटन किया था। इसके बाद से ही यहां पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस केंद्र को 13 करोड़ 27 लाख की लागत से बनाया गया है। यहां पर जल्द ही कॉलेज की भी सुविधा मिलेगी।