{"_id":"6ab044e68b0169c4e5098da2","slug":"high-blood-pressure-during-pregnancy-poses-a-risk-to-both-mother-and-baby-ambala-news-c-18-knl1018-996054-2026-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: गर्भावस्था में बीपी बढ़ना मां और शिशु के लिए खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: गर्भावस्था में बीपी बढ़ना मां और शिशु के लिए खतरा
विज्ञापन
करनाल। सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 10 से 15 गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सामने आ रही है। स्त्री रोग चिकित्सकों के अनुसार, यह स्थिति मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। समय पर जांच और सही पोषण की कमी से कई मामले जटिल हो रहे हैं।
गर्भावस्था में हाई बीपी को प्रीक्लेम्पसिया कहा जाता है। इसके बढ़ने पर सिर दर्द, चक्कर, सूजन और गंभीर मामलों में दौरे पड़ सकते हैं। इससे समय से पहले डिलीवरी या शिशु के विकास में बाधा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अनियमित जीवनशैली, तनाव और पौष्टिक आहार की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। फोलिक एसिड और आयरन की पर्याप्त मात्रा न लेना भी कमजोरी बढ़ाता है, जिससे बीपी असंतुलित हो सकता है। डॉ वैशाली ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं कम जागरूक होती हैं। वे गर्भधारण के बाद देर से जांच के लिए अस्पताल पहुंचती हैं, जिससे कई समस्याएं बढ़ जाती हैं।
हाई बीपी के कारण और बचाव
अनियमित जीवनशैली, तनाव और पौष्टिक आहार की कमी हाई बीपी के मुख्य कारण हैं। समय पर जांच न करवाना भी स्थिति को जटिल बनाता है। फोलिक एसिड और आयरन की पर्याप्त मात्रा लेना आवश्यक है। चिकित्सकों का कहना है कि जागरूकता और नियमित जांच से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
विज्ञापन
-
समय पर जांच जरूरी
डाॅ. वैशाली ने बताया कि गर्भावस्था में नियमित जांच बहुत जरूरी है। कई महिलाएं शुरुआती महीनों में फोलिक एसिड और आयरन की दवा को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे शरीर में खून की कमी और बीपी असंतुलन की समस्या बढ़ जाती है। अगर समय रहते जांच और उपचार किया जाए तो जटिलताओं से बचा जा सकता है।
विज्ञापन
गर्भावस्था में हाई बीपी को प्रीक्लेम्पसिया कहा जाता है। इसके बढ़ने पर सिर दर्द, चक्कर, सूजन और गंभीर मामलों में दौरे पड़ सकते हैं। इससे समय से पहले डिलीवरी या शिशु के विकास में बाधा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अनियमित जीवनशैली, तनाव और पौष्टिक आहार की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। फोलिक एसिड और आयरन की पर्याप्त मात्रा न लेना भी कमजोरी बढ़ाता है, जिससे बीपी असंतुलित हो सकता है। डॉ वैशाली ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं कम जागरूक होती हैं। वे गर्भधारण के बाद देर से जांच के लिए अस्पताल पहुंचती हैं, जिससे कई समस्याएं बढ़ जाती हैं।
विज्ञापन
हाई बीपी के कारण और बचाव
अनियमित जीवनशैली, तनाव और पौष्टिक आहार की कमी हाई बीपी के मुख्य कारण हैं। समय पर जांच न करवाना भी स्थिति को जटिल बनाता है। फोलिक एसिड और आयरन की पर्याप्त मात्रा लेना आवश्यक है। चिकित्सकों का कहना है कि जागरूकता और नियमित जांच से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
विज्ञापन
-
समय पर जांच जरूरी
डाॅ. वैशाली ने बताया कि गर्भावस्था में नियमित जांच बहुत जरूरी है। कई महिलाएं शुरुआती महीनों में फोलिक एसिड और आयरन की दवा को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे शरीर में खून की कमी और बीपी असंतुलन की समस्या बढ़ जाती है। अगर समय रहते जांच और उपचार किया जाए तो जटिलताओं से बचा जा सकता है।