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Ambala News: हरबिलास हत्याकांड में वेंकट गर्ग को विदेश से लाने में भाषा दीवार
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अंबाला। नारायणगढ़ के हलबिलास हत्याकांड में भी विदेश में भागे हत्यारोपी वेंकट गर्ग को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। हरबिलास हत्याकांड (24 जनवरी) को तीन महीने से अधिक समय हो गया है फिर भी पुलिस के हाथ वेंकट तक नहीं पहुंच सके हैं।
किसी भी अपराधी को विदेश से लाने में पुलिस के सामने कई चुनौतियां बन जाती हैं। इसमें से एक है भाषा की चुनौती। दरअसल, पुलिस को अगर अपराधी को उस देश में जाकर पकड़ना हो तो संबंधित देख की एजेंसियों की मदद लेनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें अपराधी की पूरी जानकारी देनी होती है।
जानकारी देने के लिए उन्हें उनकी ही भाषा में अपराधी के अपराध का रिकॉर्ड व अन्य जानकारी देनी होती है। यही कारण है कि संबंधित अपराधी का रिकॉर्ड उस देश की भाषा में देने में पुलिस को काफी समय लग जाता है। इसी बात का फायदा उठाते हुए आरोपी एक देश से दूसरे देश चला जाता है।
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गैंगस्टर ग्योंग का मामला बना था चुनाैती
गैंगस्टर जाेगिंदर ग्योंग फिलीपींस भाग गया था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बताया जाता है कि फिलीपींस से उसे भारत लाने में करीब चार माह का समय तो सिर्फ दस्तावेज तैयार करने में ही लगा। इस समय में पुलिस ने रिकॉर्ड को हिंदी से संबंधित देश की भाषा में बदलवाया। इसके बाद आगे की प्रक्रिया को अमल में लाया गया। इसी प्रकार पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो नारायणगढ़ में बसपा के प्रदेश सचिव हरबिलास रज्जूमाजरा की हत्या कराने से पहले ही मुख्य साजिशकर्ता वेंकट गर्ग विदेश भाग गया था। अब उसे विदेश से लाना भी एक चुनौती से कम नहीं है।
फर्जी पासपोर्ट दूसरी चुनौती
भगोड़े अपराधियों की ओर से अक्सर विदेश भागने के लिए फर्जी पासपोर्ट बनाया जाता है। वेंकट गर्ग ने भी गुरुग्राम के पते पर एक फर्जी पासपोर्ट बनाया था। इसके बाद वह विदेश भाग गया। अभी तक चर्चा है कि वह वियतनाम भागा। मगर कई मामलों में तो पता ही नहीं चल पाता है कि अपराधी किस नाम और पते पर पासपोर्ट बनवा कर भाग गया। इसके साथ ही आरोपी को पकड़ने के लिए उस देश से भारत के कैसे संबंध हैं इस पर भी निर्भर करता है। कई देशों से अच्छे संबंध में तो काफी मदद मिलती है, कुछ देशों की एजेंसियां रुचि ही नहीं लेतीं।
भाषा के लिए नहीं हैं पर्याप्त साधन
हरियाणा में अधिकतर एफआईआर हिंदी भाषा में होती हैं। इसके साथ ही अपराध के रिकॉर्ड को भी हिंदी भाषा में ही रिकॉर्ड किया जाता है। ऐसे में अगर किसी और देश की भाषा में अपराधी का रिकॉर्ड भेजना हो तो यह समस्या एक चुनौती बनकर खड़ी हो जाती है। मगर आने वाले समय में पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से इस समस्या के समाधान का रास्ता खोज सकती है।
वर्जन
पुलिस वेंकट गर्ग को पकड़ने के लिए कोशिश कर रही है। इस पर माॅनीटरिंग भी की जा रही है। कई बार दो देशों से जुड़ी कार्रवाई में समय लग जाता है। मगर हमें उम्मीद है कि जल्द आरोपी को पुलिस पकड़ लेगी।
-पंकज नैन, आईजी, अंबाला।
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किसी भी अपराधी को विदेश से लाने में पुलिस के सामने कई चुनौतियां बन जाती हैं। इसमें से एक है भाषा की चुनौती। दरअसल, पुलिस को अगर अपराधी को उस देश में जाकर पकड़ना हो तो संबंधित देख की एजेंसियों की मदद लेनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें अपराधी की पूरी जानकारी देनी होती है।
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जानकारी देने के लिए उन्हें उनकी ही भाषा में अपराधी के अपराध का रिकॉर्ड व अन्य जानकारी देनी होती है। यही कारण है कि संबंधित अपराधी का रिकॉर्ड उस देश की भाषा में देने में पुलिस को काफी समय लग जाता है। इसी बात का फायदा उठाते हुए आरोपी एक देश से दूसरे देश चला जाता है।
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गैंगस्टर ग्योंग का मामला बना था चुनाैती
गैंगस्टर जाेगिंदर ग्योंग फिलीपींस भाग गया था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बताया जाता है कि फिलीपींस से उसे भारत लाने में करीब चार माह का समय तो सिर्फ दस्तावेज तैयार करने में ही लगा। इस समय में पुलिस ने रिकॉर्ड को हिंदी से संबंधित देश की भाषा में बदलवाया। इसके बाद आगे की प्रक्रिया को अमल में लाया गया। इसी प्रकार पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो नारायणगढ़ में बसपा के प्रदेश सचिव हरबिलास रज्जूमाजरा की हत्या कराने से पहले ही मुख्य साजिशकर्ता वेंकट गर्ग विदेश भाग गया था। अब उसे विदेश से लाना भी एक चुनौती से कम नहीं है।
फर्जी पासपोर्ट दूसरी चुनौती
भगोड़े अपराधियों की ओर से अक्सर विदेश भागने के लिए फर्जी पासपोर्ट बनाया जाता है। वेंकट गर्ग ने भी गुरुग्राम के पते पर एक फर्जी पासपोर्ट बनाया था। इसके बाद वह विदेश भाग गया। अभी तक चर्चा है कि वह वियतनाम भागा। मगर कई मामलों में तो पता ही नहीं चल पाता है कि अपराधी किस नाम और पते पर पासपोर्ट बनवा कर भाग गया। इसके साथ ही आरोपी को पकड़ने के लिए उस देश से भारत के कैसे संबंध हैं इस पर भी निर्भर करता है। कई देशों से अच्छे संबंध में तो काफी मदद मिलती है, कुछ देशों की एजेंसियां रुचि ही नहीं लेतीं।
भाषा के लिए नहीं हैं पर्याप्त साधन
हरियाणा में अधिकतर एफआईआर हिंदी भाषा में होती हैं। इसके साथ ही अपराध के रिकॉर्ड को भी हिंदी भाषा में ही रिकॉर्ड किया जाता है। ऐसे में अगर किसी और देश की भाषा में अपराधी का रिकॉर्ड भेजना हो तो यह समस्या एक चुनौती बनकर खड़ी हो जाती है। मगर आने वाले समय में पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से इस समस्या के समाधान का रास्ता खोज सकती है।
वर्जन
पुलिस वेंकट गर्ग को पकड़ने के लिए कोशिश कर रही है। इस पर माॅनीटरिंग भी की जा रही है। कई बार दो देशों से जुड़ी कार्रवाई में समय लग जाता है। मगर हमें उम्मीद है कि जल्द आरोपी को पुलिस पकड़ लेगी।
-पंकज नैन, आईजी, अंबाला।