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गाेवर्धन पर्वत उठाकर तोड़ा था घंमड : स्वामी राजेश्वरानंद
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आशा सिंह गार्डन में श्रीमद्भागवत कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु।
अंबाला सिटी। आशा सिंह गार्डन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने गाेवर्धन पूजा की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण अपनी लीला करने के लिए अवतरित हुए तभी एक समय देवराज इंद्र को अहंकार हो गया था।
इंद्र के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने एक लीला रची ।भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की निंदा करते हुए कहा कि हमें तो ऐसे देवता की पूजा करनी चाहिए, जो स्वामी प्रत्यक्ष आकर पूजन सामग्री स्वीकार करें। श्री कृष्ण ने कहा कि इंद्र से ज्यादा शक्तिशाली तो यह गोवर्धन पर्वत है, जो वर्षा का मूल कारण है। इसलिए हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।यह सुनकर सब बहुत प्रभावित हुए और सब ने मिलकर इंद्र देव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा कृष्ण की ओर से बताई विधि से गोवर्धन पर्वत की पूजा की। यह देख इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने जोरों की वर्षा शुरू कर दी।
भयभीत होकर सभी ब्रजवासी भगवान श्री कृष्ण के पास पहुंचे। तब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की शरण में जाने के लिए कहा और भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया। इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने इंद्रदेव का अहम तोड़ा था।
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इंद्र के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने एक लीला रची ।भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की निंदा करते हुए कहा कि हमें तो ऐसे देवता की पूजा करनी चाहिए, जो स्वामी प्रत्यक्ष आकर पूजन सामग्री स्वीकार करें। श्री कृष्ण ने कहा कि इंद्र से ज्यादा शक्तिशाली तो यह गोवर्धन पर्वत है, जो वर्षा का मूल कारण है। इसलिए हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।यह सुनकर सब बहुत प्रभावित हुए और सब ने मिलकर इंद्र देव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा कृष्ण की ओर से बताई विधि से गोवर्धन पर्वत की पूजा की। यह देख इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने जोरों की वर्षा शुरू कर दी।
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भयभीत होकर सभी ब्रजवासी भगवान श्री कृष्ण के पास पहुंचे। तब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की शरण में जाने के लिए कहा और भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया। इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने इंद्रदेव का अहम तोड़ा था।
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