{"_id":"65e6320ee7aa93c3b9057265","slug":"home-of-overweight-diseases-patients-increased-twice-in-a-year-ambala-news-c-36-1-ame1006-119300-2024-03-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: अधिक वजन बीमारियों का घर, एक वर्ष में दो गुना बढ़े मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: अधिक वजन बीमारियों का घर, एक वर्ष में दो गुना बढ़े मरीज
विज्ञापन
अंबाला सिटी। बढ़ता मोटापा भविष्य में गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। इसमें हृदय रोग, शुगर, बीपी, लकवा और अन्य घातक बीमारियां शामिल हैं। पहले जहां व्यस्कों में ये बीमारियां पाई जाती थी, वहीं अब यह बीमारी बच्चों में भी देखने को मिल रही हैं।
इसका मुख्य कारण अधिक जंक फूड का सेवन, जीवन शैली, कसरत न करना हैं। इस प्रकार की जीवन शैली के कारण बच्चों के वजन में तेजी से इजाफा होता है। इससे बढ़ती उम्र के साथ अनेक बीमारियां जन्म लेती है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार जिला में वर्तमान में 20334 लोग बीपी की समस्या से ग्रस्त है तो वहीं 10882 लोग शुगर की बीमारी से पीड़ित है। जबकि वर्ष 2022-2023 तक शुगर के 4971 मरीज और बीपी के 10614 मरीज थे।
युवाओं में भी बढ़ रही बीमारियां
पहले के समय में बीपी और शुगर की बीमारियां के लिए 40 और 50 वर्ष की आयु के लोगों को जांचा जाता था, लेकिन अब बीपी के लिए 20 से 22 वर्ष और शुगर के लिए 30 वर्ष से जांच शुरू कर दी जाती है। समय रहते यदि इन बीमारियों का पता चल पाए तो इनपर काबू पाया जा सकता है। दिल की बीमारियों की शुरूआत बीपी से ही शुरू होती है सबसे पहले व्यक्ति को बीपी की समस्या होती है और धीरे धीरे दिल की बीमारियां उसे जकड़ लेती हैं।
विज्ञापन
कम उम्र में नहीं हो पाती जांच
डिप्टी सीएमओ डॉ. नीलम ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि किशोर अवस्था में ही बच्चों का वजन व्यस्कों से भी अधिक हो जाता है। लेकिन अभिभावक समय रहते बच्चे के बढ़ते वजन की जांच नहीं करवाते जिससे किशोरों में बीपी व दिल की बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। अधिक वजन के कारण बच्चे को सांस संबंधी समस्या भी हो सकती है। जबकि समय ऐसी परिस्थितियों में बच्चे की जांच करवाना जरूरी होता है। इससे समय रहते बीमारियों का पता लगाया जा सके। ऐसी बीमारियों से बचने को हमें जंक फूड का सेवन कम से कम करना चाहिए, सुबह व शाम को व्यायाम करना चाहिए, एक जगह अधिक देर तक बैठना नहीं चाहिए, समय रहते अपने बीएमआई की जांच करानी चाहिए।
विज्ञापन
इसका मुख्य कारण अधिक जंक फूड का सेवन, जीवन शैली, कसरत न करना हैं। इस प्रकार की जीवन शैली के कारण बच्चों के वजन में तेजी से इजाफा होता है। इससे बढ़ती उम्र के साथ अनेक बीमारियां जन्म लेती है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार जिला में वर्तमान में 20334 लोग बीपी की समस्या से ग्रस्त है तो वहीं 10882 लोग शुगर की बीमारी से पीड़ित है। जबकि वर्ष 2022-2023 तक शुगर के 4971 मरीज और बीपी के 10614 मरीज थे।
विज्ञापन
युवाओं में भी बढ़ रही बीमारियां
पहले के समय में बीपी और शुगर की बीमारियां के लिए 40 और 50 वर्ष की आयु के लोगों को जांचा जाता था, लेकिन अब बीपी के लिए 20 से 22 वर्ष और शुगर के लिए 30 वर्ष से जांच शुरू कर दी जाती है। समय रहते यदि इन बीमारियों का पता चल पाए तो इनपर काबू पाया जा सकता है। दिल की बीमारियों की शुरूआत बीपी से ही शुरू होती है सबसे पहले व्यक्ति को बीपी की समस्या होती है और धीरे धीरे दिल की बीमारियां उसे जकड़ लेती हैं।
विज्ञापन
कम उम्र में नहीं हो पाती जांच
डिप्टी सीएमओ डॉ. नीलम ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि किशोर अवस्था में ही बच्चों का वजन व्यस्कों से भी अधिक हो जाता है। लेकिन अभिभावक समय रहते बच्चे के बढ़ते वजन की जांच नहीं करवाते जिससे किशोरों में बीपी व दिल की बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। अधिक वजन के कारण बच्चे को सांस संबंधी समस्या भी हो सकती है। जबकि समय ऐसी परिस्थितियों में बच्चे की जांच करवाना जरूरी होता है। इससे समय रहते बीमारियों का पता लगाया जा सके। ऐसी बीमारियों से बचने को हमें जंक फूड का सेवन कम से कम करना चाहिए, सुबह व शाम को व्यायाम करना चाहिए, एक जगह अधिक देर तक बैठना नहीं चाहिए, समय रहते अपने बीएमआई की जांच करानी चाहिए।