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स्वतंत्रता सेनानी शकुंतला देवी को दी अंतिम विदाई
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:52 AM IST
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माडल टाउन अंबाला शहर निवासी स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय शकुुंतला देवी का बुधवार को माडल टाउन स्वर्ग आश्रम में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को स्वर्ग आश्रम तक लाया गया जहां विधायक असीम गोयल, उपायुक्त अशोक सांगवान, एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह, एसीपी राजकुमार वालिया, जिला सैनिक बोर्ड के सचिव वीएम शर्मा ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र भेंट करके स्वतंत्रता सेनानी की देश के प्रति सेवाओं को नमन किया और श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर पुलिस की टुकड़ी द्वारा हवा में गोलियां दागकर, मातमी धुन बजाकर और शस्त्र उल्टे करके स्वतंत्रता सेनानी के पार्थिव शरीर को सलामी दी गई। स्वर्गीय शंकुतला देवी के बड़े पुत्र डा. राजीव मोहन राय ने उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।
उल्लेखनीय है कि लगभग 94 वर्षीय शकुंतला देवी का 2 फरवरी को प्रात: 8 बजे निधन हो गया था। शकुंतला देवी शादी से पहले अपने पिता से प्रेरणा लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुई और एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में ही उनकी शादी हुई थी। पति डा. एमएम राय और ससुर दीवान चंद दत्त पाकिस्तान के कसूर क्षेत्र में रहते हुए स्वतंत्रता संग्राम में कई बार जेलों में गए और शकुंतला देवी ने भी अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों का डटकर मुकाबला किया। आंदोलन के दौरान कई बार घायल भी हुई और कई बार उन्हें कसूर जेल में बंद भी रखा गया। वह अपने पीछे दो विवाहित पुत्र डा. राजीव मोहन राय, संजीव मोहन राय और विवाहित पुत्री अर्चना सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके अंतिम संस्कार में स्वास्थ्य मंत्री की ओर से कैटोनमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी, डीपीआरओ परमजीत सिंह, एपीआरओ हरदीप सिंह, भाजपा के जिला अध्यक्ष जगमोहन लाल कुमार, भाजपा नेता शुभादेश मित्तल, अनुभव अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल लक्की, रितेश गोयल, भारत भूषण अग्रवाल, जगतार अरोड़ा, चंद्रगुप्त बंसल, सौरभ गुप्ता, आनंद मोहन शुक्ला, नरेंद्र भलोटिया, सुदेश धीमान, कुलविंद्र सिंह घेल, सद्दाम हुसैन, संत सिंह कंधारी आदि मौजूद रहे।
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उल्लेखनीय है कि लगभग 94 वर्षीय शकुंतला देवी का 2 फरवरी को प्रात: 8 बजे निधन हो गया था। शकुंतला देवी शादी से पहले अपने पिता से प्रेरणा लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुई और एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में ही उनकी शादी हुई थी। पति डा. एमएम राय और ससुर दीवान चंद दत्त पाकिस्तान के कसूर क्षेत्र में रहते हुए स्वतंत्रता संग्राम में कई बार जेलों में गए और शकुंतला देवी ने भी अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों का डटकर मुकाबला किया। आंदोलन के दौरान कई बार घायल भी हुई और कई बार उन्हें कसूर जेल में बंद भी रखा गया। वह अपने पीछे दो विवाहित पुत्र डा. राजीव मोहन राय, संजीव मोहन राय और विवाहित पुत्री अर्चना सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके अंतिम संस्कार में स्वास्थ्य मंत्री की ओर से कैटोनमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी, डीपीआरओ परमजीत सिंह, एपीआरओ हरदीप सिंह, भाजपा के जिला अध्यक्ष जगमोहन लाल कुमार, भाजपा नेता शुभादेश मित्तल, अनुभव अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल लक्की, रितेश गोयल, भारत भूषण अग्रवाल, जगतार अरोड़ा, चंद्रगुप्त बंसल, सौरभ गुप्ता, आनंद मोहन शुक्ला, नरेंद्र भलोटिया, सुदेश धीमान, कुलविंद्र सिंह घेल, सद्दाम हुसैन, संत सिंह कंधारी आदि मौजूद रहे।
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