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प्लाट बेचने के नाम पर डॉक्टर से 1.35 करोड़ की ठगी में 3 नामजद
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प्लाट की खरीद के नाम पर शहर जग्गी गार्डन वासी डॉ. बालकिशन से एक करोड़ 35 लाख की ठगी की गई। काशी नगर के प्लाट का यह लेन-देन 2018 में आरंभ हुआ। चौड़ मस्तपुर के वीरेंद्र सिंह, विक्रम और भूपेंद्र ने उससे रजिस्ट्री तक के पैसे ले लिए लेकिन बाद जब शक होने पर जब जांच की गई तो पता चला कि जमीन विवादित है। मांगने पर भी जब पैसे नहीं मिले तब पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी गई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एसपी के आदेश पर बलदेव नगर थाने में ठगी, अमानत में खयानत और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया।
यह है पूरा मामला: बालकिशन के अनुसार उसके पास दवा लेने आने वाले वीरेंद्र ने उसे बताया कि भूपेंद्र और विक्रम सिंह काशीनगर में अपने 300-300 गज के प्लाट बेचना चाहते हैं। भाई के साथ प्लाट देखने गए बालकिशन को चारदीवारी में दो प्लाट दिखाए गए, जिनका एक ही गेट था। डॉ. को बताया गया कि कि विक्रम और भूपेंद्र रिश्तेदार हैं। भूपेंद्र सिंह ने उन्हें कागज दिखाए। उसके बाद 21 हजार 700 रुपये प्रति गज के हिसाब से सौदा तय कर 50 हजार पेशगी दे दी गई। दोनों प्लाट के सौदे भूपेंद्र सिंह ने किए। पेशगी की लिखित नहीं हुई। इसके बाद वीरेंद्र इकरानामा के तौर पर दुकान से दो लाख ले गया। एक खाली कागज यह कहते हुए साथ लेकर गया कि वह उसपर दोनों के हस्ताक्षर कराकर लाएगा। सितंबर 2018 में रजिस्ट्री की तारीख तय हुई। इसके बाद अलग-अलग खातों में पैसे डाले जाते रहे। उसके बाद तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री करवाने के लिए फोटो और गवाह के हस्ताक्षर कर लिए। शिकायतकर्ता के भाई मुकेश के भी साइन हुए थे। कुछ दिन का समय ले लिया गया। बालकिशन ने फोन पर वीरेंद्र से रजिस्ट्री भेजने को कहा तो उसने कहा कि इंतकाल करवा रहा है। शक होने पर जब तहसील में पता किया तो बताया गया कि उनके नाम कोई रजिस्ट्री हुई ही नहीं। पूछने पर वीरेंद्र ने कहा कि प्लाट पर वविाद चल रहा है, अभी नहीं हो पाएगी। 28 दिसंबर को वीरेंद्र दोनों आरोपियों का फुल पेमेंट का इकरानामा लिखकर दे गया था। वह भी तहसील कार्यालय की जमाबंदी में न था। बलदेव नगर पुलिस ने अनुसार प्लाट बेचने के नाम पर करोड़ों की ठगी के केस की तफ्तीश जारी है।
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यह है पूरा मामला: बालकिशन के अनुसार उसके पास दवा लेने आने वाले वीरेंद्र ने उसे बताया कि भूपेंद्र और विक्रम सिंह काशीनगर में अपने 300-300 गज के प्लाट बेचना चाहते हैं। भाई के साथ प्लाट देखने गए बालकिशन को चारदीवारी में दो प्लाट दिखाए गए, जिनका एक ही गेट था। डॉ. को बताया गया कि कि विक्रम और भूपेंद्र रिश्तेदार हैं। भूपेंद्र सिंह ने उन्हें कागज दिखाए। उसके बाद 21 हजार 700 रुपये प्रति गज के हिसाब से सौदा तय कर 50 हजार पेशगी दे दी गई। दोनों प्लाट के सौदे भूपेंद्र सिंह ने किए। पेशगी की लिखित नहीं हुई। इसके बाद वीरेंद्र इकरानामा के तौर पर दुकान से दो लाख ले गया। एक खाली कागज यह कहते हुए साथ लेकर गया कि वह उसपर दोनों के हस्ताक्षर कराकर लाएगा। सितंबर 2018 में रजिस्ट्री की तारीख तय हुई। इसके बाद अलग-अलग खातों में पैसे डाले जाते रहे। उसके बाद तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री करवाने के लिए फोटो और गवाह के हस्ताक्षर कर लिए। शिकायतकर्ता के भाई मुकेश के भी साइन हुए थे। कुछ दिन का समय ले लिया गया। बालकिशन ने फोन पर वीरेंद्र से रजिस्ट्री भेजने को कहा तो उसने कहा कि इंतकाल करवा रहा है। शक होने पर जब तहसील में पता किया तो बताया गया कि उनके नाम कोई रजिस्ट्री हुई ही नहीं। पूछने पर वीरेंद्र ने कहा कि प्लाट पर वविाद चल रहा है, अभी नहीं हो पाएगी। 28 दिसंबर को वीरेंद्र दोनों आरोपियों का फुल पेमेंट का इकरानामा लिखकर दे गया था। वह भी तहसील कार्यालय की जमाबंदी में न था। बलदेव नगर पुलिस ने अनुसार प्लाट बेचने के नाम पर करोड़ों की ठगी के केस की तफ्तीश जारी है।
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