निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों ने दिया धरना, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 23 May 2020 12:27 AM IST
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केंद्रीय ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संघ के आह्वान पर भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कोरोना की आड़ में किया जा रहे निजीकरण के खिलाफ रोष व्यक्त किया। संगठन सदस्यों ने कहा कि सरकार कोरोना महामारी के बहाने मजदूरों, कर्मचारियों और आम मेहनतकश जनता के जन तांत्रिक अधिकारों व श्रम कानूनों को खत्म कर रही है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को प्राइवेट कंपनियों के हवाले कर रही है। जिसका विरोध उन्होंने हल्ला बोल कार्यक्रम के तहत उपायुक्त कार्यालय पर सांकेतिक धरना देकर किया और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
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शुक्रवार को अलग-अलग विभागों के कार्यकर्ता शिक्षा सदन पर इकट्ठे हुए और नारेबाजी की। इसके बाद उपायुक्त कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य महासचिव सतीश सेठी, कर्मचारी महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता जयवीर घनघस ने कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, परिवहन, बैंक, व बीमा जैसे महत्वपूर्ण जन कल्याण के सभी महकमो का निजीकरण कर दिया गया है। आत्मनिर्भरता के नाम पर पूंजिपतियों के मुनाफे को बढ़ाया जा रहा है। काम के बढ़ाए गए घंटे का फैसला वापस लिया जाए। सार्वजनिक विभागों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते व एलटीसी पर लगाई गई रोक हटाई जाए। पुरानी पेंशन बहाल की जाए। ठेका कर्मचारियों को विभाग के पे-रोल पर लेते हुए पक्का किया जाए। टूरिज्म सहित अन्य विभागों से नौकरी से हटाए गए सभी कर्मियों को वापस काम पर लिया जाए। लॉक डाउन के चलते जिन मजदूरों का रोजगार खत्म हुआ है उन सभी को रोजगार मिलने तक हर महीने पर्याप्त सूखा राशन व 7500 रुपये नकदी दी जाए।
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