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डेंगू का कहर बरकरार आंकड़ा 150 के पार
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जिले में डेंगू का डंक बढ़ता जा रहा है। इससे मरीजों की संख्या सरकारी रिकार्ड में 150 के पार चली गई है। सरकारी रिकार्ड की बात करें तो जिले में 5 नवंबर तक डेंगू के 150 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा उन मरीजों का है जिन्होंने अंबाला जिला नागरिक अस्पताल से डेंगू के टेस्ट करवाए। उन मरीजों का जिला स्वास्थ्य विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है जिनका बाहर से इलाज चल रहा है या जो पंचकूला और पीजीआई में डेंगू के चलते भर्ती हैं।
जिला अस्पताल में नहीं प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था
जिला नागरिक अस्पताल में अभी ब्लड कंपोनेंट सपरेटर नहीं मशीन की व्यवस्था नहीं है। इस मशीन से स्वस्थ मरीज के शरीर से निकाले गए खून से रक्त और प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज को यही प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। यहां पर यह सुविधा नहीं होने के कारण प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज को पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है। हालांकि छावनी नागरिक अस्पताल में यह मशीन आ चुकी है लेकिन वहां ट्रेंड स्टाफ इसे चलाने के लिए नहीं है।
छावनी नागरिक अस्पताल में नहीं कोई सुविधा
50 करोड़ से बने छावनी नागरिक अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं है। यही हाल नारायणगढ़ नागरिक अस्पताल के भी हैं। सभी मरीजों को यहां से जिला नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जबकि छावनी नागरिक अस्पताल में भी आबादी के हिसाब से डेंगू वार्ड बनाए जाने की व्यवस्था होनी अनिवार्य है। क्योंकि यहां पर रोजाना 2 हजार से ज्यादा ओपीडी होती है।
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अस्पताल में आई महिला लौटी बैरंग, रोटरी में करवाया बच्चों को एडमिट
छावनी नागरिक अस्पताल में अपने बेटे को लेकर पहुंची सरिता को बैरंग लौटना पड़ा। सरिता ने बताया कि वह महेश नगर से है। उसके 22 साल के बेटे शिवा और 25 साल की बेटी चेतना दोनों को डेंगू है। उन्होंने बाहर से टेस्ट करवाया था। जब नागरिक अस्पताल में पहुंची तो वहां से डाक्टर ने पैरासीटामोल टेबलेट दे दी जबकि दोनों की हालत सही नहीं थी। डाक्टर को कहने के बावजूद बच्चों को एडमिट नहीं किया गया। महिला ने आरोप लगाए कि डाक्टर ने यहां तक कह दिया कि बच्चों को यही गोली देते रहो और घर में ही रखो। इसीलिए मजबूरी में उन्होंने उसे रोटरी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां तीन दिन से उनका उपचार चल रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना बढ़ रही मरीजों की तादाद
जिला नागरिक अस्पताल का डेंगू वार्ड भी मरीजों से फुल है। हालांकि यहां सभी मरीजों को दवाई तो दी ही जा रही है इन्हें मच्छरों से बचाने के भी उचित बंदोबस्त किए गए हैं। समय-समय पर मरीजों की जांच भी हो रही है।
पुलिस लाइन से आया हूं। प्राइवेट अस्पताल से ही डेंगू का टेस्ट करवाया था। वहां पर डेंगू की पुष्टि हो गई है। बुखार नहीं उतर रहा था। शरीर टूट जाता है। मंगलवार रात को यहां आया था। आज यहां भी डेंगू के टेस्ट हुए हैं।
मुनीष।
कई दिनों से बुखार आ रहा है। बाहर साढ़े 750 रुपए में लीवर और डेंगू का टेस्ट करवाया था। उसमें डेंगू आया है। दो दिनों से एडमिट हूं। आज थोड़ा बहुत आराम लग रहा है। यहां सभी सुविधा मिल रही हैं।
रामबली
मंजी साहिब गुरुद्वारा के पास से आई हूं। चार दिनों से यहां भर्ती हूं। अब थोड़ा आराम लग रहा है। यहीं पर डेंगू का टेस्ट हुआ था। उसमें डेंगू की पुष्टि हो गई है।
कविता।
अब मौसम का ही सहारा
जिले में पूरी तरह से पांव पसार चुके डेंगू के डंक को रोकने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग को केवल मौसम से ही उम्मीद है। क्योंकि 15 डिग्री तापमान के नीचे डेंगू पनप नहीं पाता। ऐसे में 15 डिग्री अधिकतम तापमान का जिला स्वास्थ्य विभाग को बेसब्री से इंतजार रहेगा।
करीब 150 डेंगू के केस सामने आए हैं। हमने कई जगह स्थिति पर काबू पा लिया है। हुसैनी में भी अब स्थिति कंट्रोल में हैं। मरीजों को सभी सुविधाएं अस्पताल में मुहैया करवाई जा रही हैं। अभी ब्लड सपरेटर मशीन हमारे पास नहीं आई है। छावनी में मशीन है लेकिन वहां पर इसे चलाने वाला ट्रेंड स्टाफ नहीं है। जल्द ही स्टाफ की भी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. संजीव सिंगला, उप सिविल सर्जन डेंगू विभाग।
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जिला अस्पताल में नहीं प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था
जिला नागरिक अस्पताल में अभी ब्लड कंपोनेंट सपरेटर नहीं मशीन की व्यवस्था नहीं है। इस मशीन से स्वस्थ मरीज के शरीर से निकाले गए खून से रक्त और प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज को यही प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। यहां पर यह सुविधा नहीं होने के कारण प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज को पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है। हालांकि छावनी नागरिक अस्पताल में यह मशीन आ चुकी है लेकिन वहां ट्रेंड स्टाफ इसे चलाने के लिए नहीं है।
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छावनी नागरिक अस्पताल में नहीं कोई सुविधा
50 करोड़ से बने छावनी नागरिक अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं है। यही हाल नारायणगढ़ नागरिक अस्पताल के भी हैं। सभी मरीजों को यहां से जिला नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जबकि छावनी नागरिक अस्पताल में भी आबादी के हिसाब से डेंगू वार्ड बनाए जाने की व्यवस्था होनी अनिवार्य है। क्योंकि यहां पर रोजाना 2 हजार से ज्यादा ओपीडी होती है।
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अस्पताल में आई महिला लौटी बैरंग, रोटरी में करवाया बच्चों को एडमिट
छावनी नागरिक अस्पताल में अपने बेटे को लेकर पहुंची सरिता को बैरंग लौटना पड़ा। सरिता ने बताया कि वह महेश नगर से है। उसके 22 साल के बेटे शिवा और 25 साल की बेटी चेतना दोनों को डेंगू है। उन्होंने बाहर से टेस्ट करवाया था। जब नागरिक अस्पताल में पहुंची तो वहां से डाक्टर ने पैरासीटामोल टेबलेट दे दी जबकि दोनों की हालत सही नहीं थी। डाक्टर को कहने के बावजूद बच्चों को एडमिट नहीं किया गया। महिला ने आरोप लगाए कि डाक्टर ने यहां तक कह दिया कि बच्चों को यही गोली देते रहो और घर में ही रखो। इसीलिए मजबूरी में उन्होंने उसे रोटरी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां तीन दिन से उनका उपचार चल रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना बढ़ रही मरीजों की तादाद
जिला नागरिक अस्पताल का डेंगू वार्ड भी मरीजों से फुल है। हालांकि यहां सभी मरीजों को दवाई तो दी ही जा रही है इन्हें मच्छरों से बचाने के भी उचित बंदोबस्त किए गए हैं। समय-समय पर मरीजों की जांच भी हो रही है।
पुलिस लाइन से आया हूं। प्राइवेट अस्पताल से ही डेंगू का टेस्ट करवाया था। वहां पर डेंगू की पुष्टि हो गई है। बुखार नहीं उतर रहा था। शरीर टूट जाता है। मंगलवार रात को यहां आया था। आज यहां भी डेंगू के टेस्ट हुए हैं।
मुनीष।
कई दिनों से बुखार आ रहा है। बाहर साढ़े 750 रुपए में लीवर और डेंगू का टेस्ट करवाया था। उसमें डेंगू आया है। दो दिनों से एडमिट हूं। आज थोड़ा बहुत आराम लग रहा है। यहां सभी सुविधा मिल रही हैं।
रामबली
मंजी साहिब गुरुद्वारा के पास से आई हूं। चार दिनों से यहां भर्ती हूं। अब थोड़ा आराम लग रहा है। यहीं पर डेंगू का टेस्ट हुआ था। उसमें डेंगू की पुष्टि हो गई है।
कविता।
अब मौसम का ही सहारा
जिले में पूरी तरह से पांव पसार चुके डेंगू के डंक को रोकने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग को केवल मौसम से ही उम्मीद है। क्योंकि 15 डिग्री तापमान के नीचे डेंगू पनप नहीं पाता। ऐसे में 15 डिग्री अधिकतम तापमान का जिला स्वास्थ्य विभाग को बेसब्री से इंतजार रहेगा।
करीब 150 डेंगू के केस सामने आए हैं। हमने कई जगह स्थिति पर काबू पा लिया है। हुसैनी में भी अब स्थिति कंट्रोल में हैं। मरीजों को सभी सुविधाएं अस्पताल में मुहैया करवाई जा रही हैं। अभी ब्लड सपरेटर मशीन हमारे पास नहीं आई है। छावनी में मशीन है लेकिन वहां पर इसे चलाने वाला ट्रेंड स्टाफ नहीं है। जल्द ही स्टाफ की भी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. संजीव सिंगला, उप सिविल सर्जन डेंगू विभाग।