{"_id":"da23ca9a9692af41c63342d60010e411","slug":"hospital-in-narrow-steet-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तंग गली की दुकान में अस्पताल, गुफा में ऑपरेशन थिएटर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तंग गली की दुकान में अस्पताल, गुफा में ऑपरेशन थिएटर
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Wed, 02 Dec 2015 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपरेशन के बाद मरीजों की आंखें खराब होने के मामले में अंबाला कैंट में महेशनगर के मन्नु मार्केट में स्थित सर्वकल्याण चैरिटेबल संस्था की तरफ से जिस आई हॉस्पिटल में मरीजों के आपरेशन किए जाते थे, वह एक छोटी सी दुकान में चलाया जा रहा है। इसी दुकान के कोने में डॉक्टर मरीजों की आंखों का चैकअप करता है और दूसरे कोने में गुफानुमा तंग सी जगह पर अॅापरेशन थिएटेर बना हुआ है, जहां मरीजों की आंखों के ऑपरेशन किए जाते थे। बीच के हिस्से में एक डॉक्टर का बेटा बतौर रिसेप्शनिस्ट बैठता था और वहां दो अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहते थे। आंखों के आपरेशन से पहले और ऑपरेशन के बाद मरीजों को दुकान के ठीक ऊपर बनाए गए एक गंदे माहौल वाले कमरे में मौजूद गंदे बिस्तरों पर लेटाकर उनकी आंखों में दवाई डाली जाती थी। इसके लिए मरीजों को सीढिय़ां चढ़कर ऊपर जाना पड़ता था।
इतना ही नहीं आपरेशन थिएटर का वाश बेसिन भी बहुत गंदा था, जिसमें स्टील के मेडिकल बाक्स में भी एक्सपायर और असुरक्षित औजार पड़े थे। अॅापरेशन थिएटर में मशीन मौजूद नहीं थी, केवल एक पेंशट टेबल मौजूद था, जिस पर मरीज को लेटाकर ऑपरेशन किया जाता था। इसके अलावा दुकान में बने अस्पताल के बाहर भी जबरदस्त गंदगी और बदबू का आलम था।
मौजूदा माहौल को देखकर यहां छापा मारने आई चीफ मेडिकल अफसर, एसडीएम और एसीपी की टीमें भी हैरान हो गई। अफसर पहले तो अस्पताल की हालत देखकर हैरान थे, बाद में जब उन्होंने आपरेशन थिएटर के हालात देखे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गुफानुमा छोटी सी जगह पर बनाए गए ऑपरेशन थिएटर को भी जांच के दौरान प्रशासन ने सील कर दिया है।
विज्ञापन
मरीजों से लिए जाते थे 6500 से 8500 रुपये
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आई अस्पताल को नाम तो चैरिटेबल आई अस्पताल दिया गया, लेकिन यहां अॅापरेशन करने के 6500 से 8500 रुपये लिए जाते थे। ऑपरेशन के बाद पिता की आंख खराब होने की शिकायत लेकर पहुंचे तीमारदार अमन ने बताया कि उन्हें यहां बताया जाता था कि इस अस्पताल में जो लैंस डाला जाता है, उसकी कीमत प्राइवेट में 20000 से 30000 रुपये हैं।
सोफा-सैटी में छिपा रखा था रिकॉर्ड
चैरिटेबल अस्पताल में मौजूद दो डाक्टर तो पहले ही नदारद थे, जबकि स्टाफ को भी कुछ गड़बड़ी का अहसास हो चला था। महेशनगर एसएचओ अपनी एक मुलाजिम के साथ सीएमओ के निर्देशों पर सुबह ही यहां पहुंच गए और उन्होंने वहां मौजूद कुछ रिकार्ड कब्जे में ले लिया। लेकिन पुराना रिकार्ड अस्पताल के कर्मचारियों ने सोफा-सैटी में छिपा लिया। एसडीएम, सीएमओ और एसीपी जब छापामारी करने पहुंचे तो एसडीएम ने वहां मौजूद रिसेप्शनिस्ट से आंखों के ऑपरेशन के पिछले रिकार्ड के बारे में पूछा।
लेकिन वह इधर-उधर की बातें करके एसडीएम को उलझाने लगा। इस पर एसडीएम को गुस्सा आ गया और वहां मौजूद सोफा सैटी को खोलना शुरू कर दिया। सोफा-सैटी को खोलते ही उसके भीतर पुराना रिकॉर्ड भी मिला।
प्राथमिक रिपोर्ट में ये मिली खामियां
-जिस जगह पर ऑपरेशन किया जाता था, वो माहौल आई सर्जरी के अनुकूल नहीं था।
-अस्पताल में आई सर्जरी को लेकर जो मेडिकल स्टैंडर्ड है, उनकी पालना भी नहीं की जा रही थी
-ऑपरेशन थिएटर और जिस जगह गंदे बैडों पर मरीजों को लेटाकर उनका आई ट्रीटमेंट किया जाता था, वो जगह आंखों की सर्जरी के मानकों के अनुरूप नहीं है।
-ऑपरेशन थिएटर में स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया भी दुरुस्त नहीं थी।
विज्ञापन
इतना ही नहीं आपरेशन थिएटर का वाश बेसिन भी बहुत गंदा था, जिसमें स्टील के मेडिकल बाक्स में भी एक्सपायर और असुरक्षित औजार पड़े थे। अॅापरेशन थिएटर में मशीन मौजूद नहीं थी, केवल एक पेंशट टेबल मौजूद था, जिस पर मरीज को लेटाकर ऑपरेशन किया जाता था। इसके अलावा दुकान में बने अस्पताल के बाहर भी जबरदस्त गंदगी और बदबू का आलम था।
विज्ञापन
मौजूदा माहौल को देखकर यहां छापा मारने आई चीफ मेडिकल अफसर, एसडीएम और एसीपी की टीमें भी हैरान हो गई। अफसर पहले तो अस्पताल की हालत देखकर हैरान थे, बाद में जब उन्होंने आपरेशन थिएटर के हालात देखे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गुफानुमा छोटी सी जगह पर बनाए गए ऑपरेशन थिएटर को भी जांच के दौरान प्रशासन ने सील कर दिया है।
विज्ञापन
मरीजों से लिए जाते थे 6500 से 8500 रुपये
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आई अस्पताल को नाम तो चैरिटेबल आई अस्पताल दिया गया, लेकिन यहां अॅापरेशन करने के 6500 से 8500 रुपये लिए जाते थे। ऑपरेशन के बाद पिता की आंख खराब होने की शिकायत लेकर पहुंचे तीमारदार अमन ने बताया कि उन्हें यहां बताया जाता था कि इस अस्पताल में जो लैंस डाला जाता है, उसकी कीमत प्राइवेट में 20000 से 30000 रुपये हैं।
सोफा-सैटी में छिपा रखा था रिकॉर्ड
चैरिटेबल अस्पताल में मौजूद दो डाक्टर तो पहले ही नदारद थे, जबकि स्टाफ को भी कुछ गड़बड़ी का अहसास हो चला था। महेशनगर एसएचओ अपनी एक मुलाजिम के साथ सीएमओ के निर्देशों पर सुबह ही यहां पहुंच गए और उन्होंने वहां मौजूद कुछ रिकार्ड कब्जे में ले लिया। लेकिन पुराना रिकार्ड अस्पताल के कर्मचारियों ने सोफा-सैटी में छिपा लिया। एसडीएम, सीएमओ और एसीपी जब छापामारी करने पहुंचे तो एसडीएम ने वहां मौजूद रिसेप्शनिस्ट से आंखों के ऑपरेशन के पिछले रिकार्ड के बारे में पूछा।
लेकिन वह इधर-उधर की बातें करके एसडीएम को उलझाने लगा। इस पर एसडीएम को गुस्सा आ गया और वहां मौजूद सोफा सैटी को खोलना शुरू कर दिया। सोफा-सैटी को खोलते ही उसके भीतर पुराना रिकॉर्ड भी मिला।
प्राथमिक रिपोर्ट में ये मिली खामियां
-जिस जगह पर ऑपरेशन किया जाता था, वो माहौल आई सर्जरी के अनुकूल नहीं था।
-अस्पताल में आई सर्जरी को लेकर जो मेडिकल स्टैंडर्ड है, उनकी पालना भी नहीं की जा रही थी
-ऑपरेशन थिएटर और जिस जगह गंदे बैडों पर मरीजों को लेटाकर उनका आई ट्रीटमेंट किया जाता था, वो जगह आंखों की सर्जरी के मानकों के अनुरूप नहीं है।
-ऑपरेशन थिएटर में स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया भी दुरुस्त नहीं थी।