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तीन दोस्तों ने गला घोटकर उतारा था मौत के घाट
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crime
- फोटो : Ambala
ऐश परस्ती के पैसों का जुगाड़ करने के लिए कैंट तेली मंडी के दिव्यांग मनीष उर्फ गोलू, शाहबाद जरनैल सिंह (किराएदार जग्गी गार्डन) सर्वजीत ने दोस्ती के रिश्तों को तार-तार कर दिया। बोह के टैक्सी चालक स्वर्णजीत को बहाने से बुलाकर पहले स्मैक पिलाई फिर शराब। जब वह बेसुध हो गया दो ने उसके हाथ-पैर पकड़ लिए जबकि तीसरे ने मफलरनुमा कपड़े से गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। कार में शव डालकर शंभु बेरियर के पास मानकपुर रोड पर वीरान जगह ले जाकर पहचान मिटाने के लिए पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। जनवरी महीने में की गई हत्या में अधजला शव बरामद किया गया था। कॉल डिटेल, आरोपियों के हावभाव के आधार पर ब्लाइंड मर्डर गुत्थी सुलझ गई है। पैसों के जुगाड़ के लिए तीनों ने मृतक की नई टाटा जस्ट कार को मेरठ में 22 हजार में बेच दिया। 31 जनवरी को छावनी के मेरठ थाने में परिवार ने गुमशुदगी का एक केस दर्ज कराया था। ब्लाइंड मर्डर सुलझाने के लिए एसपी अभिषेक जोरवाल ने सीआईए इंस्पेक्टर केवल सिंह को बधाई दी है।
ऐसे हुई पहचान
31 फरवरी को मानकपुर रोड पर मिले क्षत-विक्षत लावारिस शव की पहचान न होने पर 3 फरवरी को लावारिस के आधार पर पोस्टमार्टम कराकर करनाल की सेवा संस्था से संस्कार करा दिया गया। सदर थाना पुलिस द्वारा रखे गए कपड़ों से 7 फरवरी को परिवार ने शव की पहचान करा दी। परिवार की गुहार पर अनिल विज ने एसआईटी गठित करवा जांच तेज करने के आदेश दिए।
मृतक का मोबाइल अपने पास रखा
आरोपियों ने मृतक का मोबाइल अपने पास रखा ताकि पुलिस व परिवार को गुमराह कर सकें। सीआईए को जब परिवार ने गोलू व अन्य से दोस्ती के बारे में बताया तो उन्होंने बताया कि घटना के दिन स्वर्णजीत उसके पा आया था। किश्त भरने के लिए वह उन्हें 4 हजार में मोबाइल बेच गया था।
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आरोपियों ने ऐश परस्ती के पैसों का जुगाड़ करने के लिए अपपने दोस्त स्वणजीत की योजना बनाकर गला घोटकर मारा। बहाने से घर से लाए, अत्याधिक नशा कराकर बेसुध कर दिया। पहचान छिपाने के लिए पेट्रोल छिड़ककर शव को जला दिया। वे उसकी कार हथियाना चाहते थे ताकि बेचकर पैसे ला सकें। मेरठ में 22 हजार में बेची कार, पैसों की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। काल डिटेल, हावभाव व एक जैसे बयानों से पैदा शक से केस सुलझाया गया।
केवल सिंह, इंस्पेक्टर सीआईए-वन।
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ऐसे हुई पहचान
31 फरवरी को मानकपुर रोड पर मिले क्षत-विक्षत लावारिस शव की पहचान न होने पर 3 फरवरी को लावारिस के आधार पर पोस्टमार्टम कराकर करनाल की सेवा संस्था से संस्कार करा दिया गया। सदर थाना पुलिस द्वारा रखे गए कपड़ों से 7 फरवरी को परिवार ने शव की पहचान करा दी। परिवार की गुहार पर अनिल विज ने एसआईटी गठित करवा जांच तेज करने के आदेश दिए।
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मृतक का मोबाइल अपने पास रखा
आरोपियों ने मृतक का मोबाइल अपने पास रखा ताकि पुलिस व परिवार को गुमराह कर सकें। सीआईए को जब परिवार ने गोलू व अन्य से दोस्ती के बारे में बताया तो उन्होंने बताया कि घटना के दिन स्वर्णजीत उसके पा आया था। किश्त भरने के लिए वह उन्हें 4 हजार में मोबाइल बेच गया था।
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आरोपियों ने ऐश परस्ती के पैसों का जुगाड़ करने के लिए अपपने दोस्त स्वणजीत की योजना बनाकर गला घोटकर मारा। बहाने से घर से लाए, अत्याधिक नशा कराकर बेसुध कर दिया। पहचान छिपाने के लिए पेट्रोल छिड़ककर शव को जला दिया। वे उसकी कार हथियाना चाहते थे ताकि बेचकर पैसे ला सकें। मेरठ में 22 हजार में बेची कार, पैसों की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। काल डिटेल, हावभाव व एक जैसे बयानों से पैदा शक से केस सुलझाया गया।
केवल सिंह, इंस्पेक्टर सीआईए-वन।