फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Chhath Puja arrives with Nahay Khay, ghats started getting decorated

Ambala News: नहाय खाय के साथ छठ पूजा का आगमन, सजने लगे घाट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Nov 2023 12:56 AM IST
विज्ञापन
Chhath Puja arrives with Nahay Khay, ghats started getting decorated
अंबाला सिटी के मानव चौक पर छठ पूजा के सामान की खरीदारी करती महिलाएं।
अंबाला सिटी। छठ पूजा महापर्व के लिए अंबाला के विभिन्न क्षेत्रों में पूर्वांचल सदस्यों की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं। शुक्रवार को नहाय खाय के साथ छठ पूजा का आगमन हो गया।
विज्ञापन

छठ व्रतियों ने नहाय-खाय में स्नान के बाद कद्दू और चना दाल की सब्जी और अरवा चावल का प्रसाद वितरित किया। इस पर्व के लिए कहा गया कि यह पर्व सनातन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे अधिक दिनों तक चलने वाला पर्व है। इसी पर्व के लिए मानव चौक पर छठ पूजा की दुकानें सजी गई हैं, जहां से पूर्वांचली लोग सामान की खरीदारी कर रहे हैं।
विज्ञापन

इसमें नारियल, घलघल, सिंदूर, कुटम मसाला, सूप, डगरा, टोकरी, मट्टी से तैयार चूडिय़ां, बद्दी, आरता सहित अन्य सामान जोकि बिहार के विभिन्न जिलों से मंगवाकर बेचा जा रहा है। इस सामान की विशेषता यह भी है यह सामान हरियाणा पंजाब आदि क्षेत्रों में नहीं मिलता है। इसलिए इस कारोबार से जुड़े दुकानदार छठ पूजा से कई दिनों पहले ही इस सामान को बिहार से एकत्रित करके रखते हैं और छठ पूजा पर्व के मौके पर दुकानें लगाकर बेचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस पर्व में महिलाएं संतान की दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस पर्व में बिना पत्नी के पति भी महिलाओं की तर्ज पर विधिवत व्रत रखते हैं और अपने बच्चों की सुखमय जीवन की कामना करते हैं। इस पर्व का आगमन हो चुका है, अंबाला क्षेत्रों में बनाए गए सभी नदियों व तैयार किए गए पानी के घाटों पर बहुत ही सुंदर ढंग से सजावट की जा रही हैं।
ऐसे रहेंगी चार दिनों की पूजा-विधि
20 नवंबर तक धूमधाम से यह पर्व मनाया जाएगा। छठ पूजा में हर दिन अलग-अलग विधियों से पूजा करने का महत्व माना गया है। जिसमें पहले दिन नहाय-खाय किया जाता है, दूसरे दिन खरना होता है और तीसरे व चौथे दिन सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है, संध्या व ऊषा अघ्र्य के लिए व्रती व उसका पूरा परिवार नदी, तालाब या पानी के घाट पहुंचेंगे और सूप, दउरा, डाला आदि सिर पर उठाकर लोग घाट तक लेकर विधिवत पूजन करेंगे। सूर्य देव को अघ्र्य देने और छठी मईया की पूजा के लिए व्रती उसी टोकरी इस्तेमाल करेंगी। इसी परंपरा के चलते घाट पर जाने से पहले टोकरी को अच्छी तरह सजाया जाता है। उसमें पूजा विधि अनुसार सभी प्रकार की जरूरी सामग्रियों को रखा जाता है। उसके बाद ही छठ पूजा का कार्यक्रम प्रारंभ होता है।

छठ पूजा टोकरी में रखेंगी ये सामग्री
छठ पूजा से पूर्व टोकरी को बहुत ही सुंदर भव्य ढंग से सजाया जाएगा। जिसमें पूजा संबंधित सामग्री भी सजाई जाएगी। इसमें सूप, दउरा, डलिया बांस या पीतल के, नारियल, सुथनी, शकरकंदी, शहद की डिब्बी, सुपारी, कैराव, धूप, आंवला, नींबू बड़ा, डगरा, लाल धान चावल, कच्ची हल्दी, अधरक जड़ वाली, गुड़, पान का पत्ता, फल, दीपक, गन्ना, फूल, ठेकुआ प्रसाद, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, लाल या पीला कपड़ा सूप बांधने के लिए खूब सजाया जाता है।

अंबाला सिटी के मानव चौक पर छठ पूजा के सामान की खरीदारी करती महिलाएं।

अंबाला सिटी के मानव चौक पर छठ पूजा के सामान की खरीदारी करती महिलाएं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed