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Ambala News: बिना आईडी कार्ड ब्रीडिंग चैकर को फील्ड में उतारा
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अंशु शर्मा, अंबाला। डेंगू के लारवा की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अंबाला कैंट व सिटी में 50 ब्रीडिंग चैकर को तो उतार दिया है लेकिन बिना आईडी कार्ड इनको जांच से पहले खुद को कर्मचारी साबित करना गले की फांस बन गया है। गली-मोहल्लों में जब यह ब्रीडिंग चैकर किसी के घर का दरवाजा खटखटाते हैं तो पहले उन्हें लोगों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ता है। कोई उन्हें जांच से पहले आईडी कार्ड दिखाने के लिए बोलता है तो कोई अपने सीनियर अधिकारी से बात करवाने को कहता है। जैसे-तैसे वह डेंगू के लारवा को लेकर जागरूक करना शुरू तो करते देते हैं लेकिन जैसे ही घर के भीतर जाने की बात बोलते हैं तो उन्हें गेट पर ही रोक दिया जाता है।
जब यह ब्रीडिंग चैकर अपने साथ आए अन्य साथियों को दूर से दिखाते हैं व रजिस्टर में आस पड़ोस के लोगों का डाटा दिखाते हैं तो उन्हें जाने की अनुमति दे जाती है। ऐसे में लोगों का कहना होता है कि बिना आईडी कार्ड किसी भी घर में घुसाना गलत है इसलिए आईडी कार्ड का होना बेहद जरूरी है। हालांकि कुछ लोग बिना एतराज के चेकिंग के लिए राजी हो जाते हैं।
लगातार बढ़ रही चोरियों व स्नैचिंग की वारदातों से लोगों में भय
कैंट व सिटी में बढ़ती चोरी की वारदातों के कारण लोगों में भय का माहौल है। घरों व दुकानों में चोरी के साथ-साथ स्नैचिंग की वारदातें बढ़ती जा रही है। यहीं कारण है कि लोग गली-मोहल्लों में घूमने वाले हर संदिग्ध पर खुद ही नजर रखते हैं। साथ ही कोई उनके दरवाजे पर आता है तो पूरी जांच के बाद ही उन्हें घर के भीतर दाखिल होने दे रहे हैं। ब्रीडिंग चैकर के सामने भी इसी वारदातों का जिक्र कर लोग उनसे आईडी कार्ड रखने की बात का जिक्र कर रहे हैं।
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120 दिन के लिए रोजाना पैसों पर रखे जाते हैं ब्रीडिंग चैकर
बरसातों में डेंगू व मलेरिया के मरीज सामने आने से पहले ही विभाग की तरफ से ब्रीडिंग चैकर रखे जाते हैं। ब्रीडिंग चैकरों की टीम रोजाना डोर टू डोर जाकर लोगों को जागरूक करती है और पौधों व कूलरों आदि कबाड़ में जमा पानी को हटाती है। जिस घर में डेंगू का लारवा पाया जाता है तो उन्हें नोटिस भी थमाया जाता है ताकि वह दोबारा से पानी जमा न होने दें। विभाग की तरफ से इन अस्थाई कर्मचारियों को महज 120 दिन के लिए रखा जाता है। रोजाना इन्हें 450 रुपये दिए जाते हैं।
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50 ब्रीडिंग चैकर को 120 दिन के लिए रखा गया है। कुछ समय पहले ही नियुक्ति हुई है इसलिए अभी नहीं दिए गए थे। जल्द ही उन्हें आईडी कार्ड दे दिए जाएंगे। ज्यादा ब्रीडिंग चैकर पुराने है तो उन्हें लोग जानते हैं।
डॉ. संजीव सिंगला, डिप्टी सिविल सर्जन मलेरिया अंबाला
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मेरे संज्ञान में आईडी कार्ड मिलने का मामला नहीं है। अगर ऐसा है तो जल्द ही उन्हें आईडी कार्ड दिलवा दिए जाएंगे।
डॉॅ. राकेश सहल, सिविल सर्जन अंबाला
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जब यह ब्रीडिंग चैकर अपने साथ आए अन्य साथियों को दूर से दिखाते हैं व रजिस्टर में आस पड़ोस के लोगों का डाटा दिखाते हैं तो उन्हें जाने की अनुमति दे जाती है। ऐसे में लोगों का कहना होता है कि बिना आईडी कार्ड किसी भी घर में घुसाना गलत है इसलिए आईडी कार्ड का होना बेहद जरूरी है। हालांकि कुछ लोग बिना एतराज के चेकिंग के लिए राजी हो जाते हैं।
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लगातार बढ़ रही चोरियों व स्नैचिंग की वारदातों से लोगों में भय
कैंट व सिटी में बढ़ती चोरी की वारदातों के कारण लोगों में भय का माहौल है। घरों व दुकानों में चोरी के साथ-साथ स्नैचिंग की वारदातें बढ़ती जा रही है। यहीं कारण है कि लोग गली-मोहल्लों में घूमने वाले हर संदिग्ध पर खुद ही नजर रखते हैं। साथ ही कोई उनके दरवाजे पर आता है तो पूरी जांच के बाद ही उन्हें घर के भीतर दाखिल होने दे रहे हैं। ब्रीडिंग चैकर के सामने भी इसी वारदातों का जिक्र कर लोग उनसे आईडी कार्ड रखने की बात का जिक्र कर रहे हैं।
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120 दिन के लिए रोजाना पैसों पर रखे जाते हैं ब्रीडिंग चैकर
बरसातों में डेंगू व मलेरिया के मरीज सामने आने से पहले ही विभाग की तरफ से ब्रीडिंग चैकर रखे जाते हैं। ब्रीडिंग चैकरों की टीम रोजाना डोर टू डोर जाकर लोगों को जागरूक करती है और पौधों व कूलरों आदि कबाड़ में जमा पानी को हटाती है। जिस घर में डेंगू का लारवा पाया जाता है तो उन्हें नोटिस भी थमाया जाता है ताकि वह दोबारा से पानी जमा न होने दें। विभाग की तरफ से इन अस्थाई कर्मचारियों को महज 120 दिन के लिए रखा जाता है। रोजाना इन्हें 450 रुपये दिए जाते हैं।
50 ब्रीडिंग चैकर को 120 दिन के लिए रखा गया है। कुछ समय पहले ही नियुक्ति हुई है इसलिए अभी नहीं दिए गए थे। जल्द ही उन्हें आईडी कार्ड दे दिए जाएंगे। ज्यादा ब्रीडिंग चैकर पुराने है तो उन्हें लोग जानते हैं।
डॉ. संजीव सिंगला, डिप्टी सिविल सर्जन मलेरिया अंबाला
मेरे संज्ञान में आईडी कार्ड मिलने का मामला नहीं है। अगर ऐसा है तो जल्द ही उन्हें आईडी कार्ड दिलवा दिए जाएंगे।
डॉॅ. राकेश सहल, सिविल सर्जन अंबाला