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फैक्ट्री में धमाके से साथ फटा बॉयलर, 100 मीटर तक गिरे कलपुर्जों ने घरों में मचाई तबाही
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अंबाला सिटी: विस्फोट के बाद लोगों के घरों में गिरे पूर्जे दिखाते लोग। संवाद
- फोटो : Ambala
मंडौर स्थित जिंदल पेट्रो फोम में शनिवार दोपहर जोरदार धमाके के साथ बेबी बॉयलर फटा। धमाके की गूंज आसपास के करीब एक किलोमीटर एरिया तक पहुंची। हादसे के वक्त फैक्ट्री में करीब 12 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से दो मजबूर घायल हो गए। घायल आलोक को निजी अस्पताल में उपचार के बाद वापस भेज दिया गया, जबकि दूसरे कुंवरपाल को अस्पताल में भर्ती किया गया है। कुंवरपाल की दाईं टांग टूटी गई है। इतना ही नहीं उसके चेहरे पर भी बॉयलर के टुकड़े लगने से वह लहूलुहान हो गया था। हालांकि उसकी हालत भी खतरे से बाहर है। धमाके का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बॉयलर के टुकड़े करीब 100 मीटर दूर जाकर गिरे। इस वजह से आसपास के घरों को नुकसान हुआ। कई घरों और इस फैक्ट्री के नजदीक लगती अन्य फैक्ट्रियों में दरारें आने के साथ उनके शीशे भी टूट गए।
कुंवरपाल और आलोक दोनों कर रहे थे ठोक-पीट का काम
हादसा करीब सवा एक बजे हुआ। उस समय कुंवरपाल और आलोक फोम से गद्दा बनाने का काम कर रहे थे। फोम के टुकड़े करने के बाद उन पर केमिकल का प्रयोग कर यहां गद्दे बनाए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत कुंवरपाल और आलोक दोनों फोम की ठोक-पीट रहे थे। यहां बेबी बॉयलर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि इसमें ईंधन ज्यादा डाल दिया गया था। इसी कारण बॉयलर फट गया। कुंवरपाल और आलोक को बॉयलर फटने से चंद सेकेंड पहले इसका आभास हो गया था। इसीलिए उन्होंने खुद को बचाने का प्रयास किया। इसमें आलोक तो लगभग सफल रहा, लेकिन कुंवरपाल उससे आगे था इसीलिए हादसे में सबसे ज्यादा उसे चोटें आईं।
अजैब सिंह और उसका बेटा निर्मल लेटे हुए थे घर के बरामदे में
हादसे के बाद कलपुर्जे अजैब सिंह के घर जाकर गिरे। उस वक्त अजैब सिंह खाना खाकर घर के बाहर मंजा बिछाकर लेटे हुए थे। वहीं, उनका बेटा निर्मल सिंह इसी बरामदे में गेट के दूसरी और तखत पर बैठा हुआ था। दोनों से करीब 4 फुट दूरी पर यह कलपुर्जे आकर गिरे। इससे दोनों सहम गए बाद में अंदाजा हुआ कि यह बॉयलर के टुकड़े हैं। इन कलपुर्जों ने अजैब सिंह के घर की छत के कुछ टुकड़े को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया वहीं पशुओं के बाड़े की दीवार भी इस धमाके के कारण गिर गई। इतना ही नहीं घर के कई शीशे भी टूट गए।
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यह थे हादसे के वक्त फैक्ट्री में मौजूद
हादसे के वक्त फैक्ट्री में कुंवरपाल, आलोक और उसकी पत्नी सिया, कर्ण सिंह, प्रधान, भूरा, रविंद्र, सूरज, अरुण दो अन्य लड़के जिन्होंने एक दो दिन पहले ही नौकरी संभाली थी ड्यूटी पर थे। इनके अलावा एक सिक्योरिटी गार्ड थी था। इनमें से कर्ण सिलेंडर भरवाने के लिए गया हुआ था क्योंकि फैक्ट्री में ही सभी का खाना भी बनता था। वहीं यह रहते थे। सिक्योरिटी गार्ड गेट पर था बाकी ईधर-उधर काम कर रहे थे। केवल कुंवरपाल और आलोक ही बॉयलर के नजदीक फोम से गद्दे बनाने के लिए ठुकाई कर रहे थे।
जैसे ही पता चला मैं मौके पर पहुंचा था। दोनों घायल मजदूरों का उपचार करवाया गया है। मुझे पता चला है कि उन्होंने कुछ ईंधन ज्यादा लगा दिया। इसीलिए बेबी बॉयलर फट गया। आज गर्मी रोज से ज्यादा थी और मजदूरों ने रोजाना से भी ज्यादा ईंधन लगा दिया।
- राजेश, जिंदल पेट्रो फोम संचालक।
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कुंवरपाल और आलोक दोनों कर रहे थे ठोक-पीट का काम
हादसा करीब सवा एक बजे हुआ। उस समय कुंवरपाल और आलोक फोम से गद्दा बनाने का काम कर रहे थे। फोम के टुकड़े करने के बाद उन पर केमिकल का प्रयोग कर यहां गद्दे बनाए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत कुंवरपाल और आलोक दोनों फोम की ठोक-पीट रहे थे। यहां बेबी बॉयलर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि इसमें ईंधन ज्यादा डाल दिया गया था। इसी कारण बॉयलर फट गया। कुंवरपाल और आलोक को बॉयलर फटने से चंद सेकेंड पहले इसका आभास हो गया था। इसीलिए उन्होंने खुद को बचाने का प्रयास किया। इसमें आलोक तो लगभग सफल रहा, लेकिन कुंवरपाल उससे आगे था इसीलिए हादसे में सबसे ज्यादा उसे चोटें आईं।
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अजैब सिंह और उसका बेटा निर्मल लेटे हुए थे घर के बरामदे में
हादसे के बाद कलपुर्जे अजैब सिंह के घर जाकर गिरे। उस वक्त अजैब सिंह खाना खाकर घर के बाहर मंजा बिछाकर लेटे हुए थे। वहीं, उनका बेटा निर्मल सिंह इसी बरामदे में गेट के दूसरी और तखत पर बैठा हुआ था। दोनों से करीब 4 फुट दूरी पर यह कलपुर्जे आकर गिरे। इससे दोनों सहम गए बाद में अंदाजा हुआ कि यह बॉयलर के टुकड़े हैं। इन कलपुर्जों ने अजैब सिंह के घर की छत के कुछ टुकड़े को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया वहीं पशुओं के बाड़े की दीवार भी इस धमाके के कारण गिर गई। इतना ही नहीं घर के कई शीशे भी टूट गए।
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यह थे हादसे के वक्त फैक्ट्री में मौजूद
हादसे के वक्त फैक्ट्री में कुंवरपाल, आलोक और उसकी पत्नी सिया, कर्ण सिंह, प्रधान, भूरा, रविंद्र, सूरज, अरुण दो अन्य लड़के जिन्होंने एक दो दिन पहले ही नौकरी संभाली थी ड्यूटी पर थे। इनके अलावा एक सिक्योरिटी गार्ड थी था। इनमें से कर्ण सिलेंडर भरवाने के लिए गया हुआ था क्योंकि फैक्ट्री में ही सभी का खाना भी बनता था। वहीं यह रहते थे। सिक्योरिटी गार्ड गेट पर था बाकी ईधर-उधर काम कर रहे थे। केवल कुंवरपाल और आलोक ही बॉयलर के नजदीक फोम से गद्दे बनाने के लिए ठुकाई कर रहे थे।
जैसे ही पता चला मैं मौके पर पहुंचा था। दोनों घायल मजदूरों का उपचार करवाया गया है। मुझे पता चला है कि उन्होंने कुछ ईंधन ज्यादा लगा दिया। इसीलिए बेबी बॉयलर फट गया। आज गर्मी रोज से ज्यादा थी और मजदूरों ने रोजाना से भी ज्यादा ईंधन लगा दिया।
- राजेश, जिंदल पेट्रो फोम संचालक।